आपने कई बॉलीवुड की फ़िल्मों में देखा होगा जब हीरो और विलन के बीच एक्शन चल रहा होता है और *धायं*. हीरो को गोली लगती है, लेकिन ये क्या! दर्द से करहाने की बजाये हीरो फिर उठ खड़ा होता है और विलन की वाट लगा देता है. असल ज़िन्दगी में ऐसा नहीं होता यारों!

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रेडियो और टीवी प्रेसेंटर, ग्रेग फुट बताते हैं कि असलियत में बुलेट सफ़ाई से आर-पार नहीं होती है. इस GIF के माध्यम से देखिये कि क्या होता है जब शरीर पर गोली लगती है.

देखा आपने कि कैसे जब इस हैम के टुकड़े पर गोली मारी गयी तो मांस अंदर से फट जाता है, लेकिन बाहर एक छोटा सा ही घाव दिखाई देता है. मतलब की गोली के तेज़ आवेग से अंदरूनी डैमेज हो जाता है.

फुट बताते हैं कि 'गोली नर्म इंसानी मांसपेशियों को आसानी से भेदने की ताकत रखती है'.

इस GIF में दिखाया गया जेलेटिन देखिये. हमारा शरीर भी ऐसा ही है. जब गोली लगती है तब मांस फैलता है और फिर सिकुड़ जाता है.

इसलिए कहते हैं न, ज़िन्दगी फ़िल्मों की तरह नहीं होती. यहां अगर गोली लगती है तो जान भी गोली की तरह निकल जाती है.

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