भालू की प्रजाति के पांडा सबके फ़ेवरिट होते हैं, इनको क्यूट बनाता है इनका ब्लैक एंड वाइट कलर और इनके फ़र. लेकिन जो चीज़ हम इंसानों को क्यूट लगती है, वही कुछ सालों से वैज्ञानिकों के लिए पज़ल बनी हुई थी. वैज्ञानिक बहुत टाइम से पांडा के अलग रंग (ब्लैक एंड वाइट) को समझने की कोशिश कर रहे थे. भालू की प्रजाति का होने के बावजूद इसका रंग न ही पोलर बीयर की तरह सफ़ेद और न ही ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) क्षेत्रों में रहने वाले भूरे या काले भालुओं की तरह था.

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सालों की जांच के बाद ये सामने आया कि पांडा का ब्लैक एंड वाइट रंग दो प्रमुख कारणों से होता है:

  • इनके शरीर का सफ़ेद हिस्सा, जैसे इनका मुंह (आंख और कान को छोड़ कर), गर्दन, पेट और पूंछ ठंडे इलाकों में छुपने में मदद करता है. इनका काला हिस्सा, जिसमें इनके हाथ और पैर आते हैं, इन्हें अंधेरे में छुपने में मदद करता है.
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पांडा के शरीर में और कोई रंग न होने की एक दूसरी वजह है भोजन के लिए इनका लिमिटेड चीज़ों पर निर्भर रहना. पांडा सिर्फ़ बांस ही खाते हैं, जिस वजह से इनके शरीर में और कोई कलर नहीं होता. इस वजह से इनके शरीर में फैट की कमी भी होती हैं, यानि बाक़ी भालुओं के मुक़ाबले इन्हें साल भर खाने की तलाश में अलग-अलग जगह जाना पड़ता है. भालुओं की प्रजाति हाइबरनेशन के लिए जानी जाती है, वो गर्मियों में शिकार से अपने शरीर में ज़्यादा फैट स्टोर कर लेते हैं और सर्दियों में आराम कर उस फैट को बर्न करते हैं.

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पांडा इनके मुक़ाबले इतना फैट स्टोर नहीं कर पाते, इसलिए इन्हें पूरे साल भर घूमना पड़ता है. कभी ठंडी-कभी गर्म जगहों में जाने की वजह से इनकी बॉडी ने अलग तरह के वातावरण में ख़ुद को Adapt कर लिया. उसी का नतीजा है उनका ब्लैक एंड वाइट होना.

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हालांकि पांडा की आंखों का काला रंग एक दूसरी वजह से है. गौर से देखेंगे तो पाएंगे, कि उसका चेहरा सफ़ेद होता है, जबकि उसकी आंखें काली. ऐसा वो अपने पर हमला करने वालों को डराने के लिए करते हैं और आक्रोश दिखाने के लिए.

पांडा का ये कलर साइंटिस्ट के लिए इसलिए भी गुत्थी बन गया था क्योंकि इनके अलावा और किसी स्तनधारी जीव (Mammals) में ये रंग देखने को नहीं मिला.

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