Cannes 2018 में इस साल भी भारत की लड़कियां धूम मचा रही हैं.

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पिछले साल दीपिका के Green Gown के चर्चे हुए, फिर ऐश्वर्या ने अपने Frozen Princess ड्रेस से कहर ढाया. इनके चर्चे और बढ़ाने सोनम भी पहुंच गयी थी अपने ट्रेडिशनल Pink Gown में.

इस बार ये काम हुमा क़ुरैशी, कंगना रनौत, दीपिका पादुकोण कर रही हैं.

इंडियन मीडिया को Regularly फॉलो करने वालों को अभी तक रट चुका होगा कि किस एक्ट्रेस ने कब कौन सा ड्रेस पहना और से देख कर कितने पागल हुए.

वैसे सिर्फ़ भारत की ये Actresses ही नहीं, हॉलीवुड की कई लीडिंग लेडीज़ भो Cannes 2018 में धमाल मचा रही हैं.

डायरेक्टर Nadine Labaki और Cate Blanchette के भी ख़ूब चर्चे हो रहे हैं. लेकिन ये हमारी Actresses से एक मामले में ज़रा पीछे रह गयीं. कोई भी इनकी ड्रेस की तारीफ़ नहीं कर रहा, सब Cannes 2018 में इनकी एक्टिंग, डायरेक्शन की बातें करेंगे.

Nadine Labaki

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ये डायरेक्टर लेबनान से ताल्लुक रखती हैं. इस साल इनकी फ़िल्म Capernaum, Palme D'OR की सबसे तगड़ी Entries में से एक है. इससे पहले इनकी दो फ़िल्में Cannes के लिए नॉमिनेट हो चुकी हैं.

Cate Blanchette

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Blue Jasmine और The Aviator के लिए दो बार ऑस्कर जीत चुकी ये ऑस्ट्रेलियाई एक्ट्रेस इस साल Cannes की ज्यूरी का हिस्सा हैं. इनकी एक्टिंग के चर्चे पूरी दुनिया में हो चुके हैं और अब ये Cannes के लिए नॉमिनेट हुई फ़िल्मों को जज करेंगी.

तो Cannes 2018 में भारत की तरफ़ से कोई फ़िल्म नहीं गयी?

हुई हैं. नंदिता दास की 'मंटो', जिसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी हैं, तिलोत्तमा शोम की Sir, धनुष की Extraordinary Journey Of The Fakir, दिनाकर राव की अस्थि। ये सभी फ़िल्में अलग-अलग Categories में दिखाई जा रही हैं.

फिर दीपिका, ऐश्वर्या, कंगना, हुमा का कौन सा प्रतिनिधित्व कर रही हैं?

Lo'real का!

ऐश्वर्या और दीपिका इस साल कॉस्मेटिक्स ब्रैंड Lo'real की ब्रैंड अम्बैस्डर के तौर पर Cannes में गयी हैं. कंगना और हुमा एक वोदका ब्रैंड, Grey Goose Vodka के प्रमोशन के लिए गयी हैं. हां, पिछले साल ऐश्वर्या ने 2002 में आयी संजय लीला भंसाली की 'देवदास' को रिप्रेज़ेंट किया था.

फ़िल्म फ़ेस्टिवल में कपड़ों के चर्चे!

किसी भी फ़िल्म फ़ेस्टिवल में जब भी एक्टर्स जाते हैं, तो ज़्यादातर या तो Nominate हुए रहते हैं, या किसी न किसी फ़िल्म में उनका योगदान होता है, या फिर वो कुछ बेहतरीन फ़िल्मों की स्क्रीनिंग के लिए वहां अपनी उपस्तिथि दर्ज करवाते हैं. लेकिन ऐसा क्यों होता है कि भारत के 'स्टार्स' जब भी किसी इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में जाते हैं, बात सिर्फ़ उनके कपड़ों तक रह जाती है?

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शबाना आज़मी ने कुछ समय पहले एक फ़ोटो ट्वीट थी. ये फ़ोटो थी 'निशांत' के डायरेक्टर श्याम बेनेगल, स्मिता पाटिल और शबाना आज़मी की, जिनकी फ़िल्म 70 के दशक में Cannes के लिए नॉमिनेट हुई थी. इन तीनों न ही कोई बहुत ग्लैमरस कपड़े पहने थे, न ही इन्होंने फ़ालतू के फ़ोटो शूट्स करवाए.

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ये तीनों वहां अपने काम की वजह से गए थे और वो इन तस्वीरों में दिखता है. यही बात शबाना आज़मी ने भी कही, कि उस समय फ़िल्म ज़रूरी थी, कपड़े नहीं.

मेरी बातों से ज़्यादा ये आर्टिकल मेरा मेसेज दे पाएंगे

आर्टिकल की हैडलाइन से लेकर उसके कॉन्टेंट तक में कहीं इस बात का ज़िक्र नहीं मिलेगा कि वो एक्टर वहां क्यों गयी है. सारा ध्यान सिर्फ़ इस बात पर होगा कि उस इंडियन स्टार ने क्या ड्रेस पहनी थी!

अगर मैं कहूं कि ऐसा सिर्फ़ इंडियन मीडिया में ही दिखाया जाता है, तो ये नाइंसाफ़ी होगी. लेकिन वहां की मीडिया में उतना ही ज़ोर Cannes की कुछ बेहतरीन फ़िल्मों पर ज़ोर दिया जाता है. Cannes में शामिल होने वाली कुछ बेहतरीन फ़िल्मों के बारे में कई लेख आपको मिल जाएंगे. अपने यहां ज़रा एक आर्टिकल ढूंढ निकालिए!

जो दिखता है, वही बिकता है

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Viral Content की पूजा करने वाले ये भी कहेंगे कि साहब जो दिखता है, वही तो बेचेंगे. चलिए आपकी बात ग़लत नहीं है, लेकिन Actress की ड्रेस और उसके लुक को इस एक्सटेंट तक ओब्जेक्टिफ़ाई करना कहां की पत्रकारिता है? और इन्हें इस तरह की पब्लिसिटी क्यों मिल रही है, जब इनमें से किसी की कोई भी फ़िल्म Cannes में नहीं दिखाई जाने वाली है.

ऐश्वर्या की ड्रेस समेटने में लगी लोगों की टीम पर आर्टिकल पढ़ने से फ़ुर्सत मिले, तो एक बार इस बता पर भी गौर कर लेना.