सॉफ्ट से दिखने वाले पेपर से अगर ज़रा तेजी से हाथ रगड़ जाए, तो ऐसा घाव देता है कि आप तड़प उठते हैं. बड़ी देर तक टीस होती रहती है कि इतना हल्का पेपर था यार! लेकिन जान निकल रही है. वैसे ज़्यादातर लोग दर्द के इस अनुभव से ज़रूर गुज़रे होंगे. अब विज्ञान ने पता लगा लिया है कि इस दर्द के होने का कारण क्या है? आखिर क्यों ये मामूली सी चोट हमें बेचैन करती है और किसी काम का नहीं छोड़ती.

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त्वचा रोग विशेषज्ञ Dr. Hayley Goldbach कहते हैं कि यह आंशिक रूप से उस जगह से थोड़ा नीचे होता है, जहां हम घाव को समझते हैं. वैसे भी हमारी उंगलियां Pain-Magnets से कम नहीं होतीं.

Goldbach कहते हैं कि 'वैसे अगर चेहरे और जननांगों में पेपर से कट लग जाए, तो भी बहुत ज्यादा दर्द होता है. अगर आप इसकी कल्पना करें, तो समझ पाएंगे. उंगलियों से ही हम दुनिया भर के काम निपटाते हैं. छोटे-बड़े हर काम में इनका यूज़ होता है. इस जगह पर बहुत सारी नसें यहीं आकर ख़त्म होती हैं. ये बिलकुल सेफ्टी मेकेनिज्म की तरह है.'

BBC Future के मुताबिक़, ये पेपर कट्स जितना दिखते हैं, उससे कहीं ज्यादा बुरे होते हैं.

Scientific American के अनुसार, वे कोई छोटे कट्स ही नहीं होते, बल्कि वहां संवेदनशील तंत्रिकाओं का पूरा बण्डल होता है, जो कट जाता है. Scientific American के Ferris Jabr के मुताबिक, पेपर कट जितना साफ़-सुथरा दिखता है, उतना होता नहीं है. पेपर से कटने पर घाव में पेपर के कुछ केमिकल्स भी रह जाते हैं, जो दर्द बढाते हैं.' ये घाव अन्दर होते हैं, इसलिए ज्यादा खून नहीं निकलता, लेकिन जब भी हम हाथ का प्रयोग करते हैं, तो नसें खिंचती हैं और घाव खुल जाता है. इसलिए दर्द होने लगता है.

अब तो आपको पता चल ही गया होगा कि पेपर से हाथ कटने पर इतना दर्द क्यों होता है, तो इस आर्टिकल को शेयर करके दूसरों को भी बताइए.

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