आप जब अपने नज़दीक के सुपरमार्किट जाते हैं तो शेल्फ़ पर लगे प्लास्टिक के कंटेनर और बोतलें आपका ध्यान ज़रूर आकर्षित करती होंगी. अगर आप बैचलर हैं तो कोल्ड ड्रिंक और जूस की प्लास्टिक की बोतलें रूम पर पानी रखने के सबसे ज़्यादा काम आती हैं. एक सामान्य इंसान सोचता है कि 40-50 रुपये की कोल्ड ड्रिंक की बोतल में अगर साल भर पानी भर कर रखा जा सकता है तो क्या प्रॉब्लम है. प्रॉब्लम है बॉस... बहुत बड़ी प्रॉब्लम है...

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कोल्ड ड्रिंक-जूस की प्लास्टिक की बोतल का एक बार से ज़्यादा उपयोग करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. अर्थात बोतल के बार-बार के प्रयोग से हानिकारक रसायनों का रसाव होता है और इस प्रक्रिया को कहते हैं लीचिंग (Leaching).

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प्लास्टिक की बोतलें भी अलग-अलग क्वालिटी की होती हैं और सारे टाइप के प्लास्टिक कंटेनर हानिकारक नहीं होते. हर प्लास्टिक की बोतल पर प्लास्टिक आइडेंटिफिकेशन कोड (PIC) का मार्क होता है, जो #1 से #7 तक चिन्हित रहता है. कोल्ड ड्रिंक की बोतल Polyethylene Terephthalate या PET ग्रेड के प्लास्टिक से बनी होती है. इसका PIC होता है #1. सामान्य तौर पर #2, #4 और #5 नंबर का प्लास्टिक हमें हानि नहीं पहुंचाता है, लेकिन #3, #6 और #7 के प्लास्टिक न ही टिकाऊ होते हैं और इनमें से हानिकारक रसायनों का भी रसाव होता है.

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PET बोतल भी एक से ज़्यादा बार के इस्तेमाल के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि ये बोतलें ठीक से साफ़ नहीं होती हैं. इस वजह से इसकी सतह पर बैक्टीरिया और दूसरे कीटाणु आसानी से पनपते हैं. चूंकि, ये बोतलें पुनः प्रयोग के लिए नहीं होती हैं, धूप, गर्मी और ज़्यादा उपयोग के कारण ये जल्दी खराब हो जाती हैं. लेकिन हम फिर भी इनका उपयोग करते रहते हैं.

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* कैसे करें प्लास्टिक कंटेनर्स का सही उपयोग

1. कोल्ड ड्रिंक और सोडा की बोतलों का पुनः उपयोग न करें. ये सिर्फ़ एक बार के इस्तेमाल के लिए ठीक होती हैं, लेकिन धूप, गर्मी और सूर्य की अल्ट्रावायलेट लाइट के संपर्क में आने से इनका अवकर्षण और तेज़ हो जाता है.

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2. अगर आप हाईकिंग करते वक़्त पॉलीकार्बोनेट (#7) बोतलों का उपयोग करते हैं तो उनमें गर्म तरल पदार्थ न रखें. सौम्य डिटर्जेंट और कुनकुने पानी से उसे साफ़ करें. गर्म लिक्विड्स, जैसे सूप, चाय या कॉफ़ी ले जाने के लिए डबल-वॉल्ड स्टेनलेस स्टील थरमस का प्रयोग करें.

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3. अगर आपको अपने साथ बोतल रखनी ही है तो स्टेनलेस स्टील का कंटेनर उपयोग करें. चीनी मिट्टी या कांच के कंटेनर भी स्वस्थ तरीके से आपकी प्यास बुझाने में बहुत कारगर हैं.

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4. किसी भी प्लास्टिक कंटेनर को माइक्रोवेव में न रखें. माइक्रोवेव फ्रेंडली कंटेनर्स पर पहले से चिन्हित होता है.

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5. अगर आप मीट को डीफ़्रॉस्ट करना चाहते हैं तो उसे उसे सामान्य प्लास्टिक के कंटेनर में न रखें. उसे माइक्रोवेव सेफ़ कंटेनर में रख कर ही डीफ़्रॉस्ट करें.

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6. अगर आपके किचन में रखे प्लास्टिक के कंटेनर क्षतिग्रस्त होने लग जाएं, तो उन्हें बदल दें.

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7. अगर आप किसी प्लास्टिक कंटेनर का उपयोग डिटर्जेंट या केमिकल रखने के लिए करते हैं, तो उसमें खाद्य पदार्थ न रखें.

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8. जिन कंटेनर्स में आपका खाना डिलीवर होता है, वो सिर्फ़ एक बार ही उपयोग के लिए होते हैं. उनका बार-बार उपयोग न करें.

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खाद्य और तरल पदार्थ स्टोर करने के लिए जिन मैटेरियल्स का उपयोग करना चाहिए वो हैं कांच, स्टेनलेस स्टील, फ़ूड ग्रेड सिलिकॉन, चीनी मिट्टी के बर्तन वगेराह. इसीलिए तो हमारे पूर्वज पानी मटके में ही स्टोर कर के रखते थे. पानी ख़राब भी नहीं होता और सेहत के लिए भी अच्छा रहता है.

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