कहते हैं कि कभी-कभी किसी को समझने में कई साल गुज़र जाते हैं, और कभी एक पल में ही वो अपना लगने लगता है. शायद यही प्यार होता है. प्यार एक ऐसा एहसास होता है, जो कभी भी, कहीं भी और किसी से भी हो सकता है और प्यार दोबारा भी हो सकता है. और इस बात को कोमोला से बेहतर कोई और नहीं समझ सकता है. जी हां, कोमोला एक 50 वर्षीय महिला जिसने अपने बच्चों के ख़िलाफ़ जाकर अपने प्यार से शादी भी की.

आइये अब आपको कोमोला की पूरी कहानी से रू-ब-रू कराते हैं:

GMB Akash, जो एक बांग्लादेशी हैं और डॉक्यूमेंट्री फ़ोटोग्राफ़र भी हैं, ने कोमोला की ख़ूबसूरत लवस्टोरी को शब्दों में पिरोया है.

कोमोला जब केवल 25 साल की थी, तब उसके पति की मृत्यु हो गई थी. उस दुख की घडी में कोई उसका दुःख बांटने के लिए उसके साथ नहीं था, वो एकदम अकेली थी. अपने कठिन समय में किसी तरह खुद को संभालते हुए कोमोला ने अपने बच्चों का पेट पालने के लिए सड़क किनारे ब्रेड और अंडे बेचकर 20 साल गुज़ार दिए. कई सालों के कठिन परिश्रम के बाद, उसने अपने बच्चों के साथ और उनके लिए अच्छा जीवन जीना शुरू किया.

कोमोला ने आकाश को बताया,

20 सालों के बाद आज मैं इस स्थिति में पहुंची हूं कि एक कमरे का किराया दे पाने में सक्षम हुई हूं और अपना एक चावल का ढाबा चला रही हूं. अपनी आमदनी से मैंने अपने गांव में बेटों के लिए एक ज़मीन खरीदी और उनके लिए घर बना कर दिया. इसके साथ ही मैंने उनकी शादी भी करवाई.
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सालों से अकेले रहने वाली कोमोला कभी-कभी खालीपन भी महसूस करती थीं. फिर उसकी ज़िन्दगी में एक मज़दूर आया, जो अकसर उसके रेस्टोरेंट में आया करता था. उसको कोमोला बहुत अच्छी लगती थी, वो उसको पसंद करने लगता था. वो उसको घंटो बैठकर देखा करता था, पर कुछ बोलता नहीं था. धीरे-धीरे उसने कोमोला की उसके कामों में मदद करना शुरू कर दिया.

कोमोला ने बताया,

वो रेस्टोरेंट में बर्तन धोने और लोगों को खाना परोसने का काम करने लगा. वो हर तरह से और जैसे भी हो सके मेरी मदद करने लगा. अब मैं भी उसे पसंद करने लगी थी. वैसे तो पहली नज़र में ही वो मुझे अच्छा लगने लगा था. धीरे-धीरे मेरे मन में उसके लिए प्यार वाली भावनाएं आने लगीं थीं और मैं उसे प्यार करने लगी थी. एक दिन उसने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रखा.'
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उस मज़दूर ने कोमोला को प्रपोज़ कर दिया, पर समाज के डर से कोमोला उसके प्रस्ताव को स्वीकार करने में संकोश कर रही थी और अपनी भावनाओं को दबा रही थी. जब कोमोला के बच्चों को इस मज़दूर के बारे में पता चला, तो उन्होंने उस आदमी की ख़ूब पिटाई की. आखिरकार, हार कर कोमोला को उस मज़दूर को गांव छोड़कर जाने के लिए कहना पड़ा.

अपनी कहानी बताते हुए आगे कोमोला कहती हैं कि कोई नहीं समझ सकता कि मैं कितनी अकेली हूं. कोई भी इस बात को नहीं समझता है कि मुझे भी प्यार की ज़रूरत है, किसी के साथ की ज़रूरत है. मुझे भी कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए जिसके साथ में हर बात कर सकूं, अपने दुःख और सुख उसके साथ शेयर कर सकूं.

लेकिन वो कहते हैं ना कि दूरियां प्यार को और बढ़ाती हैं और रिश्ते को मजबूत करती हैं, ऐसा ही कुछ हुआ उन दोनों के साथ.

इसके साथ ही वो कहती हैं कि मुझे लगा था कि उसका अपमान करने के बाद मैं उसे अब दोबारा कभी नहीं देख पाऊंगी. एक दिन वो मेरे सामने आया और मुझे दोबारा शादी के लिए प्रपोज़ किया. और पिछले 5 सालों से हम एक-दुसरे के साथ रह रहे हैं और बहुत खुश हैं. हम साथ मिलकर एक छोटा सा रेस्टोरेंट भी चला रहे हैं.
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अपने प्यार के साथ शादी करने के बाद ख़ुशी से जीवन बिता रही कोमोला को अब समाज की कोई परवाह नहीं है. उसको परवाह नहीं है कि कोई उसके बारे में क्या सोचता है, क्या बोलता है... और ना ही उसको अपने बेटों का कोई ख़ौफ़ है.

वो कहती है, लोग मुझे देखकर हंसते हैं क्योंकि मैंने 50 साल की उम्र में एक बार फिर शादी की. कई बार वो मेरा मज़ाक उड़ाते हैं, मुझे चिढ़ाते भी हैं और पता नहीं क्या-क्या भला बुरा कहते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि अब मुझे इनकी कोई परवाह ही नहीं है. मैं खुश हूं और आगे भी ऐसे ही ख़ुश रहना चाहूंगी.

यहां पढ़िए कोमोला की पूरी कहानी: