ट्रेन में सफ़र तो सबने किया होगा और उसी सफ़र के दौरान कभी अनुभव अच्छा रहा होगा, तो कभी बुरा. जहां रेलमंत्री सुरेश प्रभू भारतीय रेल और यात्रियों के लिए अच्छी से अच्छी सेवायें और सुविधायें लाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कुछ यात्रियों के बुरे बर्ताव के कारण सहयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसा ही एक मामला आया है, एक महिला, जो अपनी बच्ची को स्तनपान करा रही थी, को ट्रेन के यात्रियों ने नीचे उतार दिया, क्योंकि उसके स्तनपान कराने से उनको तकलीफ़ हो रही थी.

जी हां, ये तो आप सभी समझते होने कि एक छोटे बच्चे के साथ ट्रेन में सफ़र करना कितना मुश्किल होता है. कभी बच्चा रोता है, तो कभी भूख होता है. ऐसी ही परेशानी को से गुज़रना पड़ा पुणे की रहने वाली स्वपना कुलकर्णी और उसके परिवार को.

Pune Mirror की रिपोर्ट के अनुसार, 32 साल की स्वपना कुलकर्णी बीते रविवार अपने पति अमित और अपनी छोटी बच्ची के साथ पुणे से मुंबई जा रही थी. स्वपना ने दख्खन रानी एक्सप्रेस में एसी चेयर कार में रिज़र्वेशन कराया हुआ था और उनका टिकट कन्फ़र्म था. लेकिन ट्रेन में बहुत भीड़ थी.

ट्रेन में जब बच्ची को भूख लगी तो, स्वपना बच्ची को दूध पिलाने के लिए बगल की बोगी में चली गई. उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो बोगी पास पैसेंजर्स के लिए थी और रविवार होने के कारण उसमें भीड़ कम थी. इसलिए उन्होंने ये सोचा कि वो वहां पर आराम से बैठकर अपनी छोटी बच्ची को दूध पिला पाएंगी. लेकिन जैसे ही वो एक सीट पर बैठीं और बच्ची को दूध पिलाने लगीं, तभी वहां एक बुज़ुर्ग व्यक्ति आ गए और उन्होंने अपना पास दिखाते हुए स्वपना को वहां से उठ जाने को कहा.

स्वपना ने उनसे अनुरोध किया कि बच्ची को स्तनपान कराने तक उन्हें बैठने दे, लेकिन उन्होंने फौरन टीटीई को बुला लिया और उनको मजबूर कर दिया कि वो वहां से उठ जायें. बुज़ुर्ग तो बुज़ुर्ग, टीटीई ने भी उनकी कोई बात नहीं सुनी और न ही कोई मदद. टीटीई ने उनको तुरंत वहां से जाने के लिए कहा.

इसके बाद वो अपनी सीट पर आकर जब अपनी बच्ची को स्तनपान कराने लगीं, तो वहां बैठे सहयात्रियों को भी इससे परेशानी होने लगी. सहयात्रियों ने ये कहकर अपनी आपत्ति जताई कि उनके द्वारा बच्ची को स्तनपान कराने से उन्हें परेशानी हो रही है, इसलिए वो ट्रेन से उतर जाएं. जब उनके पति ने मामले में हस्तक्षेप किया तो वहां बैठे लोगों ने उनके साथ भी बुरा बर्ताव किया. आखिरकार उनको ट्रेन से उतरना ही पड़ा.

स्वपना ने अपने फेसबुक पेज पर सफर में हुई इस घटना के बारे में लिखा. उन्होंने अपनी तकलीफ और अपने इस दर्द को लोगों के साथ शेयर किया. साथ ही उन्होंने इस सभ्य समाज की मानसिकता पर भी एक सवाल खड़ा किया है.

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'सहयात्रियों की इस तरह की असंवेदनशीलता पर मुझे विश्वास ही नहीं हुआ. मेरा इरादा उनकी सीट पर कब्ज़ा करने का नहीं था, बल्कि मुझे तो कुछ देर के लिए ही जगह चाहिए थी. ताकि मैं अपनी बच्ची को आराम से दूध पिला पाती. जब मैंने बुजुर्ग व्यक्ति की टिप्पणियां खारिज कर दीं, तो उन्होंने तत्काल टीटीई को बुलाया, जिसने भी मेरी कोई सहायता नहीं की. उन्होंने हमें 'उनके ज़ोन' में कदम रखने के लिए धमकाया भी, जो की बहुत ही गलत और अनुचित था. वो मुझे नियमों और क़ानून पर लम्बा-चौड़ा भाषण देने लगे, जिन पर शायद वो खुद भी अमल नहीं करते होंगे.'

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दख्खन रानी एक्सप्रेस में सफ़र करने वाले पासहोल्डर्स और नॉन-पासहोल्डर्स के बीच में आये दिन झगडे होते रहते हैं. रेलवे प्रवासी मंच की अध्यक्ष हर्षा शाह ने बताया कि पहले भी कई बार इस तरह घटनाएं इस ट्रेन में हुई हैं.

Pune Mirror से बात करते हुए पुणे डिवीजन के वरिष्ठ डिवीजनल कमर्शियल मैनेजर, कृष्णनाथ पाटिल ने इस घटना पर कहा, 'सीट आरक्षित होने के बावजूद, सहयात्रियों को इस दंपती के साथ कुछ संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी. घटना की शिकायत रजिस्टर होने के बाद हम मामले की जांच करने के लिए तैयार हैं.' वहीं पुणे के डिवीजनल रेलवे मैनेजर B.K. Dadabhoy ने कहा, 'हमें ज़रूरत है कि हम इस घटना की जांच शुरूआत से करें, ताकि हमको पता चले कि आखिर क्यों पासहोल्डर्स द्वारा इस महिला को कोच से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया. जैसे ही मुझे अपने अधिकारियों से इस घटना का पूरा विवरण मिलेगा, तब ही हम इस पर कोई टिप्पणी आर पायेंगे और कोई ठोस कदम उठा पायेंगे.'

Feature Image Source: indiatimes

Source: indiatimes