वो लेडी सिंघम याद है, जिसने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बीजेपी के लीडर्स को जेल भिजवाया था. तो जी ख़बर ये ही कि उनका तबादला कर दिया गया है.

योगी आदित्यनाथ एक भयमुक्त यूपी बनाने चले थे, ऐसा सुना था हमने. पर ये नहीं पता था कि बीजेपी के छुटभइया नेता और उनके मंत्री पुलिस वालों से ही डर जायेंगे.

मुख्यमंत्री के साथ 11 एमएलए और एमपी की एक बैठक में श्रेष्ठा ठाकुर के तबादले का निर्णय लिया गया.

बीजेपी के नेताओं ने इस पूरे मामले को अपनी आन-बान-शान का मुद्दा बना दिया. इलाके के बीजेपी प्रेसिडेंट, मुकेश भारद्वाज ने इसे पार्टी की आबरू के साथ जोड़ दिया. उन्होंने तो श्रेष्ठा के खिलाफ़ ये तक कह दिया कि उन्होंने मुख्यमंत्री और पार्टी को अपशब्द कहे थे.

वीडियो तो हमने भी देखा, पर हमें अपशब्द सुनाई नहीं दिए.

मामला इतना बड़ा नहीं था कि Circle Officer का तबादला कर दिया जाए. बीजेपी के कुछ नेता, पार्टी के सदस्यों के चालान के खिलाफ़ विरोध करने के लिए जुटे थे. बीजेपी लीडर प्रमोद लोधी के पास Documents नहीं थे, तो अफ़सर साहिबा ने उनका चालान काट दिया.

बीजेपी सदस्यों द्वारा इस मामले पर हल्ला-गुल्ला करने पर भी अफ़सर साहिबा टस से मस नहीं हुईं और सिर्फ़ इतना कहा कि, 'आप मुख्यमंत्री से लिखवा कर लायें कि पुलिस को अपनी ड्यूटी करने का हक़ नहीं है.'

अफ़सर साहिबा ने कोई ग़लत बात नहीं की थी, पर शायद मुख्यमंत्री जी को अपनी पार्टी के लोग ज़्यादा प्रिय हैं और जनसेवा करने वाले अधिकारियों का कोई मोल नहीं. योगी सरकार को अभी 100 दिन ही हुए हैं और कानून व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा है. अगर ऐसी वारदातें होती रहीं, तो 5 सालों में क्या होगा, वो समय ही बताएगा.

Source: India Times