पिछले साल के अंत में आधार कार्ड न होने की वजह से झारखंड के आदिवासी क्षेत्र में एक महिला को अनाज नहीं मिला था, जिसकी वजह से महिला की बेटी ने भूख से दम तोड़ दिया था. देश भर से आधार कार्ड की अनिवार्यता को ले कर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब आधार कार्ड लोगों के गले की फांस बन गया.

सुप्रीम कोर्ट में भी आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर एक जनहित याचिका पहले से ही दायर है, जो अभी विचारधीन है. हांलाकि देश के कई इलाकों में आधार कार्ड की अनिवार्यता अब भी जस की तस बनी हुई है, जिसकी वजह से अब भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. ताज़ा मामला दिल्ली से सटे गुरुग्राम का है, जहां एक गर्भवती महिला के पास आधार कार्ड न होने की वजह से हॉस्पिटल द्वारा उसे लेबर वार्ड में एडमिट नहीं किया गया. आखिरकार महिला ने हॉस्पिटल के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया.

ख़बरों के मुताबिक, महिला का नाम 25 वर्षीय मुन्नी केवट है. मामला प्रकाश में आने के बाद गुरुग्राम के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. बी.के. राजोरा ने दोषी डॉक्टर और नर्स को ससपेंड कर दिया है. महिला के पति का कहना है कि 'दर्द होने के बाद हम सुबह 9 बजे हॉस्पिटल के कैज़ुअल्टी वॉर्ड में पहुंचे, जहां हॉस्पिटल स्टाफ़ के लोगों ने हमें लेबर वॉर्ड में जाने को कहा, जब हम वहां पहुंचे, तो एडमिट करने के लिए स्टाफ़ ने मेरी पत्नी का आधार कार्ड मांगा, जो उस समय हमारे पास नहीं था.'

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हॉस्पिटल स्टाफ़ की इस बेरुखी का कई लोगों ने वीडियो भी बनाया, पर वो अपने फ़ैसले से नहीं हिले. आखिरकार मुन्नी ने हॉस्पिटल के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया, जिसके बाद अचानक ही हॉस्पिटल वाले हरकत में आ गए और उसे अंदर ले गए.

ये तो वो ख़बर थी, अब भी कई ख़बरें ऐसी हैं, जो सामने नहीं आ पाती.

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