इस देश में महिलाओं की क्या स्थिति है, ये बात किसी से छिपी नहीं है. इसे विडम्बना कहा जाए या जनता का मज़ाक लेकिन इतिहास गवाह है कि सियासी नज़रिए से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में अब तक हुए विधानसभा चुनावों में प्रतिनिधित्व के मामले में महिलाएं घोर उपेक्षा का शिकार रही हैं. ऐसा नहीं है कि उनका विकास नहीं हो सकता है, मगर सभी पार्टियों ने जातिवाद, धर्मवाद और वंशवाद को इतना बढ़ावा दिया कि सभी मुद्दे गौण हो गए.

आंकड़ों पर ग़ौर करें, तो पाएंगे कि यूपी में तकरीबन 47% महिला वोटर्स हैं. वोट डालने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से आगे हैं. ख़ास बात ये है कि विधानसभा चुनाव में महिलाओं का रुझान पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा देखा जाता है. हालांकि, राजनीतिक पार्टियों को इस पर फ़र्क नहीं पड़ता है.

भारत में महिलाओं को घर की दहलीज़ों तक ही सीमित कर दिया गया है. उनकी उपस्थिति राजनीति में ना के बराबर है. अगर है भी, तो उनका असर भारतीय राजनीति पर ज़्यादा नहीं पड़ा है. यूपी इस देश का बड़ा राज्य है. यहां की जड़ों में राजनीति बसती है, मगर महिलाओं के विकास के बारे में कोई चर्चा तक नहीं करना चाहता है.

यूपी में महिलाओं के साथ कई समस्याएं होती हैं, जिन्हें सरकार पूरी तरह से इग्नोर कर देती है.

  • महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले बढ़ रहे हैं
  • महिलाओं के मातृत्व दर में काफी गिरावट देखने को मिली है
  • दलित महिलाओं के ख़िलाफ़ शोषण के मामले बढ़े हैं
  • घरेलू हिंसा काफ़ी बढ़ी है
  • छेड़-छाड़ के मामले आम हो रहे हैं

ये तो महज एक आंकड़ा है, जिसे हम और कहीं भी पढ़ सकते हैं. मगर हक़ीकत इससे भी ख़तरनाक है. हमें शायद नहीं पता कि अब महिलाएं भी विकास की बात करती हैं. उन्हें भी रोड, सुरक्षा और देश के हालातों के बारे में जानना होता है.

ऐसा नहीं है कि महिलाओं के बारे में राजनीतिक पार्टियों को जानकारी नहीं है. वे बस चुनाव के वक़्त में ही महिलाओं को याद करते हैं. ऐसे में साल 2017 के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों ने महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए ख़ास तैयारी शुरू कर दी है.

बीजेपी

बीजेपी ने स्मृति ईरानी को यूपी की महिला मतदाताओं को लुभाने की कमान दी है. इसके लिए बीजेपी ने ‘उड़ान’ नामक कैंपेन शुरू किया है.

कांग्रेस-समाजवादी पार्टी

हमेशा की तरह कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी मैदान में आ चुकी हैं, वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से डिंपल यादव महिलाओं को लुभाएंगी. डिंपल यादव लगातार महिला केंद्रित कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही हैं और अब चुनाव के वक्त समाजवादी पार्टी महिला मतदाताओं के सामने पार्टी का सबसे चिर-परिचित चेहरा लेकर जाने की तैयारी में है.

Source: PTI

Source: PTI

बसपा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने महिलाओं को रिझाने के लिए अपने अंदाज में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है. बीएसपी ने बुलंदशहर गैंगरेप और बदायूं डबल सुसाइड केस के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हुए बीएसपी की सरकार बनाने की अपील की है.

सच बात तो ये है कि सभी पार्टियां महिलाओं को सशक्त नहीं करना चाहती है. उत्तर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के मुद्दे अलग-अलग हैं. ऐसे में पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि क्या स्थानीय कार्यकर्ता और उम्मीदवार महिलाओं को रिझाने में कामयाब होंगे. सभी पार्टियों के चुनावी घोषणापत्रों के सामने आने पर भी काफी कुछ तय होगा कि आख़िर पार्टियां किस हद तक महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करना चाहती हैं.