आपने अकसर लोगों को लड़कियों से ये बातें कहते सुना होगा:

'ठीक से बैठो'
'खाना तमीज़ से खाओ'
'लड़कियों की तरह चलो'
'उठते-बैठते अपने कपड़ों का ध्यान रखो'

दरअसल, लड़कियों से उम्मीद की जाती है कि वो एक तरह के तौर-तरीके को अपना लें. इसमें कई चीज़ें शामिल होती हैं, उनसे हमेशा अच्छा दिखने की उम्मीद की जाती है और ऐसे रहने को कहा जाता है, जिससे वो सुशील, सभ्य और सौम्य दिखें. यहां तक कि टीवी, विज्ञापनों, आदि में भी आपको ऐसी ही लड़कियां दिखायी जाती हैं, जो दिखने में टिप-टॉप और सभ्य होती हैं.

आम तौर पर लड़कियां भी इस तरह रहने की कोशिश करने लगती हैं, समाज के सामने वो ऐसी बन जाती हैं, जैसी समाज उनसे उम्मीद रखता है. लेकिन जब वो अकेली होती है, तब वो अपने Natural रूप में होती है.

आर्टिस्ट Sally Nixon ने अपने Illustrations से दिखाया कि लड़कियां उस वक़्त कैसे रहती हैं, जब उन्हें कोई देख नहीं रहा होता.

इन तस्वीरों में उन्होंने बखूबी बयां किया है कि जब एक लड़की ये चोगा उतार फेंक देती हैं, तो कैसी लगती है.

1. कभी-कभी अकेला होना अच्छा होता है, ख़ुद के साथ समय बिताने का मौका जो मिल जाता है.

2. अपने शरीर के साथ सहज होना.

3. Virtual दुनिया की भीड़ में.

4. किताबें वाकयी दोस्त होती हैं, इसलिए इनके होने पर अकेलापन महसूस नहीं होता.


5. बेज़ुबान दोस्त, जिसके सामने कोई बनावट ज़रूरी नहीं होती.

6. यहां कौन नहीं सोचता.

7. Girl Gang.

8. हम भी कभी-कभी झूठी प्लेट्स नहीं उठाते.

9. खाने का सलीका...हम कभी-कभी भूल भी जाते हैं.

10. बिस्तर मायने नहीं रखता, नींद होनी चाहिए.

11. सलीका हर वक़्त याद नहीं रहता.

12. नहीं ये भी 'लड़कों का काम' नहीं है.

13. हर बार महंगे रेस्टोरेंट्स? ज़रूरी नहीं.

14. ये हमारा फ़्रिज है, टीवी वाले फ़्रिज से बिलकुल अलग.

15. 'लड़कियां लुक्स पर हमेशा ध्यान देती हैं', हमेशा तो नहीं.

16. जंगलियों की तरह खाने का भी अपना मज़ा है.

17. ये सब भी तो ज़रूरी है.

18. मन की कर लो या सलीका दिखा लो.

19. ताड़ने का मज़ा सिर्फ़ तुम ही नहीं लेते.

20. गेम्स, क्योंकि मेरे अन्दर बचपन अभी बाकी है.

ये Illustrations ख़ूबसूरत हों न हों, सच्चे ज़रूर हैं. लड़कियों की ख़ूबसूरती तो कई आर्टिस्ट दिखा चुके हैं, पर उनका सबसे सच्चा स्वरूप दिखाने की पहल करने वाली इस आर्टिस्ट के Illustrations वाकयी शानदार हैं.

Source: Boredpanda