दिल्ली के एक न्यायालय ने घेरलु हिंसा के मामले में, महिला के हक़ में एक ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया है.

Additional Sessions Judge A K Kuhara ने महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए फ़ैसला सुनाया कि महिला के पति को उसे 2.7 लाख रुपये देने होंगे.

महिला ने 2000 में अपना करियर छोड़कर शादी कर के Settle होने का फ़ैसला किया था. कोर्ट में महिला की दलील थी कि वो एक फ़िल्ममेकर थी और शादी के बाद उसने अपने करियर को छोड़ दिया था.

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जज ने अपने Ruling में कहा,

अपीलकर्ता ने अमेरिका से फ़िल्म मेकिंग का कोर्स किया था. 2000 में शादी के बाद उन्होंने फ़िल्म लाइन छोड़ दी थी.

जज ने ये भी कहा कि महिला की Qualifications सिर्फ़ फ़िल्म इंडस्ट्री में ही काम आ सकती है. ये पेशा बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव से भरा है. जज ने अपने फ़ैसले में कहा कि समाज में लैंगिक समानता स्थापित होनी चाहिए. इसके साथ ही जज ने ये भी कहा कि अगर महिला में आत्मनिर्भर बनने के गुण हैं, तो उसे अपने पैरों पर खड़े होने का पूरा मौका मिलना चाहिए.

कोर्ट ने इस बात को तवज्जो दी कि कई बार सफ़ल महिलाएं भी शादी बिगड़ने से टूट जाती हैं. ज़िन्दगी की दौड़ में वापस शामिल होने के लिए ऐसी महिलाओं को भी वक़्त लगता है.

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जज ने ये भी कहा कि महिला के पति बहुत ही अच्छी Lifestyle जीते हैं और महिला को महीने में मिलने वाले 1 लाख रुपये कम हैं. महिला के पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी के अवैध संबंध थे, इस दलील को भी कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.

2015 में एक Trial Court ने महिला को Compensation के रूप में 1.7 लाख रुपये देने की घोषणा की थी. इस फ़ैसले को महिला ने ऊपरी अदालत में Challenge किया था. महिला ने अपनी शिकायत में ये कहा था कि उसके पति और सास ने उस पर अत्याचार किये.

कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ ये कहना मुश्किल है. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी न्यायाधीश ने महिला की शिक्षा को ध्यान में रखकर फ़ैसला सुनाया है.

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