22 जुलाई 2019 को भारत ने इतिहास रच दिया. इसरो द्वारा बनाया गया चंद्रयान-2, नासा से काफ़ी कम लागत में सफ़लतापूर्वक स्पेस में पहुंच गया. वैज्ञानिकों के अनुसार, 7 सितंबर को चंद्रयान-2 का प्रभाकरन ऑरबिटर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा.


भारत से पहले किसी भी देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग नहीं की है. देश की इस सफ़लता का श्रेय जाता है इसरो की दो महिला वैज्ञानिकों को. इसरो की दो महिला डायरेक्टर वनिथा मुथैया, ऋचा करिधाल का काम उस दिन ख़त्म होगा, जिस दिन चंद्रयान-2 का ऑरबिटर चंद्रमा पर लैंड करेगा.

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ऐसा पहली बार हुआ कि इसरो के इतने ज़रूरी मिशन का दो महिला वैज्ञानिकों ने नेतृत्व किया.

वनिता मुथैया- चंद्रयान-2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर

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वनिथा इसरो में पिछले 20 सालों से काम कर रही है. इसरो में वे पहली महिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वनिथा ये पद नहीं लेना चाहती थीं, एम. अन्नादुराई के काफ़ी कहने पर उन्होंने ये पद स्वीकार किया. अन्नादुराई को ये अच्छे से पता था कि वनिथा ये काम बख़ूबी कर सकती हैं.


वनिथा इसरो में Electronics System Engineer रह चुकी हैं और देश के Remote Sensing Satellites के लिए Data Handling का काम कर चुकी हैं. इसरो में उन्हें, Problem Solving Skills के लिए भी जाना जाता है. वनिथा ने इसरो के मंगल मिशन में भी अहम भूमिका निभाई थी.

2006 में उन्हें Astronautical Society of India ने Best Woman Scientist के अवॉर्ड से नवाज़ा था.

ऋचा करिधाल - चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर

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1997 से वे ISRO से जुड़ी हैं ऋचा और उन्हें 'Rocket Woman of India' भी कहा जाता है. वे मंगलयान मिशन की Operations Director रह चुकी हैं.


चंद्रयान-2 मिशन को धरती से अंतरिक्ष तक पहुंचाने में ऋचा की बेहद अहम भूमिका रही. चंद्रयान-2 के Autonomy System को डिज़ाइन करने की ज़िम्मेदारी उन्हीं की थी.

उन्होंने Indian Institute of Science, Bengaluru से Aerospace Engineering में MTech किया है.

Mars Orbiter Mission (MOM) के लिए उन्हें ISRO Team अवॉर्ड भी दिया गया था. 2007 में उन्हें राष्ट्रपति कलाम से Young Scientist Award दिया गया था.

ये दोनों महिलाएं लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं. सच है अगर सपने सच्चे हो तो कोई भी मंज़िल मुश्किल नहीं हैं.