अक़्सर स्पोर्ट्स में और बॉडी बनानेवाली महिलाओं को समाज के ठेकेदारों द्वारा अपनी बॉडी पर ध्यान देने की नसीहत मिलती है. Muscular औरतों को समाज के ठेकेदारों से काफ़ी कुछ सुनना पड़ता है.


पर महिलाएं अगर कुछ ठान लें तो वो सब हासिल करके ही दम लेती हैं. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है महाराष्ट्र की भावना टोकेकर ने.

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47 वर्षीय भावना ने एशियन पावरलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में 4 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं. सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि भावना ने वेटलिफ़्टिंग 40 की उम्र से शुरू की. ज़्यादातर लोग कुछ नया करने से पहले उम्र, लोग क्या कहेंगे ये सब सोचते हैं पर भावना ने जो ठाना वो कर के दिखाया.


रिपोर्ट्स के अनुसार, 6 साल पहले भावना ने दवाईयों के साइट-एफ़ेक्ट्स को कम करने के लिए Gym Join किया और आज वो रूस में पावरलिफ़्टिंग में स्वर्ण जीत चुकी हैं.

भावना के पति भारतीय वायुसेना में हैं और वायुसेना की बॉडीबिल्डिंग टीम ने भावना का वेटलिफ़्टिंग से परिचय करवाया.

वेटलिफ़्टिंग और अन्य स्पोर्ट्स को लेकर महिलाओं से जुड़ी कई ग़लतफ़हमियां हैं जैसे ये सिर्फ़ भारी शरीर वालों के लिए है. मैंने 41 की उम्र में ट्रेनिंग शुरू की...

- भावना टोकेकर

भावना होममेकर थीं पर उन्हें इंटरनेट का भी चस्का था. वे वेटलिफ़्टिंग के बारे में काफ़ी कुछ पढ़ती और काफ़ी वीडियोज़ भी देखतीं. Gym शुरू करने के बाद उन्होंने एक दिन भी ट्रेनिंग मिस नहीं की है.


Instagram देखते हुए एक दिन उन्हें वर्ल्ड पावरलिफ़्टिंग कांग्रेस के आंध्र प्रदेश और कर्नाटका के अध्यक्ष मोहम्मद अज़मत के बारे में पता चला. उनके वीडियोज़ से प्रेरित होकर भावना ने उनसे संपर्क किया.

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प्रतियोगिता में हिस्सा लेना तो काफ़ी दूर की बात थी. इससे पहले कई अन्य बातें थीं जैसे कि इस उम्र में हिस्सा लेने दिया जाएगा या नहीं, क्या मैं दूसरों के मुक़ाबले ख़री उतरूंगी? मुझे आज भी याद है मैंने उन्हें 10 फरवरी को Message करके पूछा कि क्या मैं भारत की तरफ़ से पावरलिफ़्टिंग में हिस्सा ले सकती हूं. पावरलिफ़्टिंग वेटलिफ़्टिंग से काफ़ी अलग है, इसलिए जब अज़मत सर ने मुझे ट्रायल देने के लिए बुलाया तो मुझे यक़ीन नहीं हुआ.

- भावना टोकेकर

ट्रायल्स में भावना का चयन Masters2 श्रेणी में हुआ. कुछ टेकनीक करेक्शन और कुछ नियम सीख कर वो रूस में प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गईं. जिस महिला को सेलेक्शन का भरोसा नहीं था उसने प्रतियोगिता में 4 स्वर्ण पदक जीत लिए.

भावना ने ये साबित कर दिया की उम्र सिर्फ़ एक नंबर है और अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई किसी भी उम्र में कुछ भी कर सकता है.