1992 तक भारतीय वायुसेना महिला विमानचालकों को अकेले विमान उड़ाने की इजाज़त नहीं देते थे. हालांकि अभी हमारे सामने जो हालात हैं वो काफ़ी सुधरे नज़र आते हैं. भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में भी जेंडर के आधार पर पहले से कम भेदभाव होता है पर अभी भी महिलाएं कई लड़ाईयां लड़ रही हैं.

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एक ऐतिहासिक निर्णय


1992 में रक्षा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया, महिलाओं को बतौर विमानचालक वायुसेना में शामिल करने का.

वायुसेना ने 1992 में ही 8 वेकेंसी निकालीं. 20,000 से ज़्यादा महिलाओं ने आवेदन दिया, जिनमें से 500 ने एंट्रेंस परीक्षा पास की. इन 500 में से 13 को ही Induction के क़ाबिल पाया गया और उन्हीं में से एक थी हरिता कौर देओल.

कौन थीं हरिता कौर देओल?


10 नवंबर, 1971 को चंडीगढ़ के एक सिख परिवार में हरिता का जन्म हुआ. हरिता के पिता, भारतीय सेना में कर्नल थे.

1993 में हरिता कौर देओल का Induction शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) में हुआ. अन्य महिला कडैट्स के साथ हरिता को एयर फ़ोर्स अकैडमी, दुंदीगल (कर्नाटक) में ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद सारे महिला कडैट्स की येलहांका एयर फ़ोर्स स्टेशन के एयर लिफ़्ट फ़ोर्सेस ट्रेनिंग इस्टैब्लिशमेंट में आगे की ट्रेनिंग हुई.

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आसमान के भी आगे की उड़ान


ट्रेनिंग के बाद फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट हरिता कौर देओल भारतीय वायुसेना में उड़ान भरने वाली पहली महिला बनीं. 2 सितंबर, 1994 को हरिता ने 22 साल की उम्र में Avro HS-748 उड़ाया. हरिता ने लगभग आधे घंटे की उड़ान भरी. ATC उन पर नज़र रख रही थी, पर हरिता ने अपने साथियों और सीनियर्स को चिंता करने का कोई कारण नहीं दिया.

एक रिपोर्ट के अनुसार, जब हरिता प्लेन से बाहर आईं तब उनका भव्य स्वागत किया गया. मीडिया से बात-चीत करते हुए हरिता ने कहा,
'मैं ख़ुश हूं क्योंकि मैं सोलो करने वाली पहली महिला हूं और मैं अपने इंस्ट्रक्टर के विश्वास पर खरी उतरी... मैं अपने माता-पिता से बात करूंगी और शायद दोस्तों के साथ विकेंड पर जश्न मनाऊं...'

हरिता की उपलब्धि कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं थी.

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बहुत जल्दी कह दिया दुनिया को अलविदा


इतिहास रचने के लगभग 2 साल बाद ही हरिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया. 24 दिसंबर, 1996 को हरिता कौर देओल समेत 24 Air Personnel चैनई से हैदराबाद जा रहे थे. HS- 748 Avro की को-पायलट थीं फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट हरिता कौर देओल. हैदराबाद के रास्ते में प्लेन में कुछ ख़राबियां आ गईं और आंध्र प्रदेश के एक गांव के पास प्लैन क्रैश हो गया. ऑन-बोर्ड सारे वायु सेना के सदस्यों शहीद हो गये.

देश और वायुसेना के लिए ये एक बहुत बड़ा नुक़सान था. हरिता हम सब के बीच नहीं हैं पर उनकी वीरता और साहस की कहानियां हमेशा हम सबके बीच रहेगी.