एक थकान भरे दिन के बाद शाम की सैर हम सभी को रिलैक्स्ड फ़ील करवाती है. हमारी तरह मुंबई की जैस्मीना खन्ना को भी शामें बहुत पसंद है. सूरज ढलने के बाद हम तो पार्क में आराम से टहलने जा सकते हैं लेकिन जैस्मीना के लिए ये आसान नहीं है.  

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News18 के एक लेख के अनुसार जैस्मीना सिर्फ़ अपने घर या दफ़्तर की खिड़की या बैलकनी तक ही जा सकती हैं. जैस्मीना को Cerebral Palsy है, ये एक Neurological Disorder है जिससे चलने-फिरने, Posture में परेशानी होती है. जैस्मीना व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं.  

मुंबई के एक IT फ़र्म में काम करने वाली जैस्मीना के लिए मुंबई में घूमना-फिरना आसान नहीं है. 2018 में जैस्मीना और उनके दोस्त और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट, संकेत खांडिलकर ने विले पारले ईस्ट की ऑडिटिंग की और पाया कि वहां की सड़कें वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए चलने योग्य नहीं है. 

Source: Access To Hope

ये सिर्फ़ विले पारले की ही कहानी नहीं है. पूरे देश का ही हाल है. बारिश में सड़कों का हाल देख कर सब 'साफ़' हो ही जाता है.  

Business Today से बात-चीत में जैस्मीना ने बताया कि उनके पास हमेशा एक पर्सनल ड्राइवर और कार होती थी. उन्हें कई पार्टीज़, फै़मिली गेट-टुगेदर मिस करने पड़ते थे. कारण यही था कि उन्हें कार से बाहर निकलना और कार में बैठने में दिक्कत होती. जैस्मीना को उठाकर कार में बैठना था, जिससे उन्हें असहजता भी महसूस होती.  

2015 में सरकार ने 'सुगम्य भारत अभियान' लॉन्च किया, ये दिव्यांगों के लिए भारत सरकार की एक योजना थी. बहुत हो-हल्ले के बावजूद ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही है. 

Source: News18

जैस्मीना ने News18 से बात-चीत में बताया कि कोई भी बदलाव का बीड़ा नहीं उठा रहा था तो उन्होंने ख़ुद ही ये ज़िम्मेदारी उठा ली. 

जैस्मीना और संकेत ने मिलकर, 'Access To Hope' नामक एक ग़ैर-सरकारी संस्थान शुरू किया जिसका मक़सद था दिव्यांगों के लिए मुंबई की सड़कों को 'चलने-फिरने योग्य बनाना'.  
अपने पायलट प्रोजेक्ट के लिए Access To Hope हनुमान रोड और नेहरू रोड पर काम कर रहा है.  

हमारी ऑडिट रोड सरकार की गाइडलाइन्स के आधार पर ही है. हमने के.ईस्ट वॉर्ड के असिस्टेंट कमीश्नर को इस मुहीम में मदद करने के लिए कहा है. 

                    - संकेत

संकेत और जैस्मीना ने बीएमसी और एक डिज़ाइन आर्किटेक्चरल फ़र्म के साथ मिलकर एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप शुरू की है. ये फ़र्म सड़कों की प्रोटोटाइप बनाएगी. 

सरकारी गाइडलाइन्स के मुताबिक़, फ़ुटपाथ्स का Tactile (स्पर्श करने योग्य) होना अनिवार्य है. रेसिडेन्शियल क्षेत्रों में 1.8 मीटर और कमर्शियल क्षेत्रों में 2.5 मीटर की चौड़ाई वाले फ़ुटपाथ्स होने चाहिए ताकी 2 व्हिलचेयर्स आराम से मूव कर सकें. गाइडलाइन्स के मुताबिक़, फ़ुटपाथ्स की एक निहित हाइट भी होनी चाहिए. ज़्यादातर फ़ुटपाथ्स ये क्राइटेरिया फ़ोलो नहीं करते.  

Source: Get Me Enabled

बहुत से Disability Rights Activists इस बात को मानते हैं कि बीते कुछ सालों में दिव्यांगों के प्रति लोगों का और सरकार का नज़रिया बदला है और दिव्यांगों के लिए काम हो रहा है. संकेत और जैस्मीना के अनुसार कुछ Ramps के अलावा ज़्यादा कुछ नहीं किया गया.

इस प्रोजेक्ट के डिज़ाइन और इंजीनियरिंग एस्पेक्ट को Nature Nurture Architects and Planners की पारूल देख रही हैं. News18 से बात-चीत में पारूल ने बताया कि एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जो सभी के सुगम हो.