वक़्त-वक़्त की बात है. कभी ऐसा भी होता है जब जीतने वाले से ज़्यादा हारने वाले की चर्चा होती है. वो कहते हैं न कि कोई गेम जीतो न जीतो, लेकिन लोगों का दिल जीतना ज़रूरी होता है. कुछ ऐसा ही 'फ़ेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता 2020' की रनर-अप मान्या सिंह के साथ भी हुआ है. 


बीते 10 फ़रवरी को मुंबई में 'फ़ेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता 2020' का आयोजन किया गया था, जिसकी विजेता मानसा वाराणसी थीं. वहीं यूपी के कुशीनगर की रहने वाली ऑटोरिक्शा चालाक की बेटी मान्या सिंह रनर-अप रहीं.

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क़िस्मत देखिये हर जगह मिस इंडिया की विजेता से ज़्यादा उसकी रनर-अप के चर्चे हो रहे हैं. उसकी वजह है मान्या सिंह का फ़ैमिली बैकग्राउंड. मिस इंडिया के मंच तक पहुंचने के लिये मान्या सिंह को काफ़ी चुनौतियों और संघर्ष से गुज़रना पड़ा. मान्या सिंह के पिता एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर हैं. 

ऑटो रिक्शा ड्राइवर की बेटी होने के नाते उन्हें बचपन से वो सुख-सुविधाएं नहीं मिली, जो बाक़ी बच्चों को मिलती हैं. मान्या की ज़िंदगी में कई पल ऐसे भी आये, जब उन्हें रातभर खाली पेट सोना पड़ा. पैसों की तंगी की वजह से कई सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा. परिवार की कमज़ोर आर्थिक स्थित और कठिन हालात देख कर मान्या कमज़ोर नहीं पड़ीं, बल्कि वो और भी मज़बूत होती चली गईं.  

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मान्या ने इंस्टाग्राम पर अपने परिवार के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'मैंने बिना खाए पिए भूखे रह कर कई रातें बिताई हैं. मैं ना जाने कितने दिन दोपहर में मीलों पैदल चली. मेरा खून, पसीना और आंसू मेरी आत्मा के लिए खाना बने और मैंने सपने देखने की हिम्मत जुटाई. रिक्शा चालक की बेटी थी. मुझे कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला क्योंकि मैंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था'.

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मान्या ने आगे बताया कि, 'जब मैं 14 साल की थी तो घर से भाग गई थी. मैं दिन में पढाई करती थी और शाम में घर-घर जाकर बर्तन साफ़ करती थीं. वहीं रात को मैं कॉल सेंटर में जॉब करती थी. मैंने जहां भी जाती पैदल जाया करती ताकि रिक्शे के पैसे बचा सकूं. मेरे पास जो भी कपड़े होते थे, वो मेरे ख़ुद के सिले हुए होते थे'.  

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मिस इंडिया प्रतियोगिता के मंच तक पहुंचना मान्या के लिये बहुत बड़ी बात थी, जिसमें वो कामयाब रही. सच में अगर संघर्ष और लगन से कुछ हासिल करने की कोशिश की जाये, तो सब मुमकिन है.