एक स्टडी के मुताबिक़, भारत (India) में सारी महिलाएं अपने दिन के क़रीब 5 घंटे घर के काम करने में बिताती हैं. कई वर्किंग महिलाओं को एक साथ एक से ज़्यादा रोल्स भी करने पड़ते हैं. उन्हें ऑफ़िस जाने से पहले घर की सफ़ाई करने से लेकर खाना बनाने तक घर के सारे काम निपटाने पड़ते हैं. हालांकि, आज कल पुरुष भी घर के कामों में महिलाओं का हाथ बटाने लगे हैं. लेकिन पुरुषों का प्रतिशत इसमें बेहद कम है. सुबह से लेकर रात तक महिलाएं काम करते-करते अपने शरीर को आराम देना तक भूल जाती हैं. इस वजह से उन्हें नींद भी कम मिल पाती है. 

महिलाओं की इन सभी समस्याओं को मध्य प्रदेश की एक बेटी ने क़रीने से समझने की कोशिश की और उनको आराम देने के लिए तकनीक के माध्यम से एक जबर आइडिया ढूंढ निकाला. नतीजा ये हुआ कि उसके बनाए मॉडल को ख़ूब सराहा गया और देश भर में प्रथम स्थान मिला है. आज हम आपको इस पूरे मॉडल और उस होनहार बच्ची के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से बताएंगे. 

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Navashri Thakur

कौन है वो होनहार बच्ची?

हम यहां बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के पिपरिया के पास डोकरीखेड़ा गांव में रहने वाली 14 साल की नवश्री ठाकुर (Navashri Thakur) की. वो 10वीं कक्षा में पढ़ती हैं. कोई यकीन नहीं कर सकता कि महज़ 14 साल की उम्र में नवश्री ने अपनी मां की रसोई का काम आसान करने के लिए एक बहुपयोगी मशीन बना डाली है. ये मशीन रसोई के आठ कामों को कर सकती है. इस मशीन का स्लोगन है-'झट-पट काम, मां को आराम.' नवश्री पिपरिया के गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती हैं और उन्होंने ये मशीन अपनी टीचर आराधना पटेल के मार्गदर्शन में बनाई है. 

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मशीन को बनाने के पीछे है मां की प्रेरणा

नवश्री ठाकुर (Navashri Thakur) के इस मशीन बनाने के पीछे की प्रेरणा और कोई नहीं, बल्कि ख़ुद उनकी मां हैं. उनके माता-पिता दोनों खेतों में मजदूरी करते हैं. वो बताती हैं कि उनकीमां के सुबह 4 बजे उठने के बावजूद उनके घर के काम ख़त्म नहीं हो पाते हैं. वो और उनकी बहन भी मां की मदद करते हैं. लेकिन उनका स्कूल भी दूर है, इसलिए उन्हें जल्दी निकलना पड़ता है. खेतों से काम करने के आने के बाद भी उनकी मां घर के काम में जुट जाती थीं. ये सब देखते हुए नवश्री ने एक मशीन बनाने का फ़ैसला किया, जिससे उनकी मां को आराम मिल सके. वो 8वीं कक्षा से ही इस मशीन को बनाने में जुट गई थीं. पहले उनकी मशीन को स्कूल में, फिर ज़िला स्तर पर और इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर चुना गया. उनकी मशीन को मौजूदा समय में ‘इंस्पायर अवॉर्ड’ भी मिल चुका है. 

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क्या काम कर सकती है ये बहुपयोगी मशीन?

ये मशीन लकड़ी और स्टील के बर्तन जैसे थाली का इस्तेमाल करके बनाई गई है. इसे हाथ से चलाया जा सकता है और इसे बिजली से ऑपरेट करने की आवश्यकता नहीं है. इसके सांचे को बदलकर आप इससे कई काम कर सकते हैं. इससे आप पापड़, पानी पूरी, जूस, सेव, चिप्स आदि बना सकते हैं. लहसुन, अदरक कुचल सकते हैं और सब्जी-फल भी काट सकते हैं और तो और इससे रोटी तैयार करके गैस पर सेंक सकते हैं. इस मशीन को बनाने के लिए नवश्री के कुल 3,000 रुपये ख़र्च हुए.

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नवश्री ये मशीन सभी महिलाओं को करती हैं समर्पित

नवश्री ठाकुर (Navashri Thakur) की मशीन सभी महिलाओं को समर्पित है, जो घर के और बाहर काम करने के दौरान अपनी सेहत का ख्याल रखना भूल जाती हैं. उनकी टीचर आराधना कहती हैं कि, इस मशीन को बनाने के लिए उन्हें NIF की तरफ़ से फंडिंग मिली थी. लेकिन अगर इस मशीन को कारखानों में बड़े स्तर पर बनाया जाए, तो इसकी लागत 2000 रुपये से भी कम आएगी. इस यूनिक आइडिया के लिए जल्दी ही नवश्री को देश के राष्ट्रपति के द्वारा भी सम्मानित किया जाएगा.  

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नवश्री ठाकुर (Navashri Thakur) के इस युवा आविष्कार के जितनी तारीफ़ की जाए, उतनी कम है.