Padma Awards 2022: बीते बुधवार को भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस (Republic Day) की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों’ (Padma Awards) की घोषणा की गई थी. इस दौरान 4 हस्तियों को पद्म विभूषण, 17 हस्तियों को पद्म भूषण और 107 हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार देने का ऐलान किया है. पुरस्कार पाने वालों की लिस्ट में कुछ नामचीन हस्तियां तो कुछ अंजान चेहरे में भी शामिल हैं. इन्हीं अंजान चेहरों में से एक नाम केरल की समाज सेविका के.वी. राबिया (K. V. Rabiya) का भी है.

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सामाजिक कार्यकर्ता के.वी. राबिया (K. V. Rabiya) को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है. शारीरिक रूप से दिव्यांग होने की वजह से उनका सफ़र काफ़ी मुश्किलों भरा रहा. राबिया के पैरों ने तो उनका साथ नहीं दिया, लेकिन उनके इरादे इतने मजबूत थे कि उन्होंने ख़ुद को कमज़ोर नहीं होने दिया. राबिया ने अपने इन्हीं मज़बूत इरादों से समाज के लिए वो कर दिखाया, जो आज एक मिसाल है. इसी वजह से आज उनका सफ़र पद्मश्री तक पहुंच गया है. आज राबिया केरल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं.

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चलिए आज केरल की समाज सेविका पद्मश्री के.वी. राबिया (K. V. Rabiya) के बारे में जान लेते हैं-

K. V. Rabiya का जन्म और पढ़ाई

के.वी. राबिया (K. V. Rabiya) का जन्म 25 फ़रवरी 1966 को केरल के मलप्पुरम ज़िले के वेल्लिलक्कड़ गांव में हुआ था. राबिया बचपन से ही पोलियो से ग्रसित हैं. इसलिए व्हीलचेयर ही उनके चलने का सहारा है. लेकिन व्हीलचेयर पर होने के बावजूद उन्होंने दुनिया के लिए एक मिसाल पेश की. राबिया बचपन से ही कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे समाज का उद्धार हो सके. व्हीलचेयर पर रहते हुए उन्होंने सबसे पहले अपनी पढ़ाई पूरी की और शिक्षिका बनीं. शिक्षिका होने के साथ-साथ वो समाज सुधार के कार्यों में भी लगी रहीं. आज राबिया की कोशिशों के चलते ही उनके गांव में सड़क, बिजली, पीने का पानी, बैंक और टेलीफ़ोन कनेक्शन सबकुछ उपलब्ध है.

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के.वी. राबिया के सामाजिक कार्य

के.वी. राबिया (K. V. Rabiya) आज केरल में ‘चलनम’ नाम की एक संस्था चला रही हैं. इस संस्था के ज़रिए राज्य में दिव्यांग बच्चों के लिए कई स्कूल खोले गये हैं. राबिया ‘महिला सशक्तीकरण’ के लिए भी कई तरह के कार्य कर रही हैं. वो अपने प्रयासों से महिलाओं के लिए छोटी दुकानें और महिला पुस्तकालय भी स्थापित कर चुकी हैं. इसके अलावा राबिया दहेज, शराब, अंधविश्वास और नस्लवाद जैसे सामाजिक मुद्दों के ख़िलाफ़ भी लड़ रही हैं.

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कैंसर और एक्सीडेंट को दी मात   

के.वी. राबिया पहले से ही पोलियो से ग्रसित थीं, लेकिन साल 2000 में उन्हें कैंसर ने भी जकड लिया. कई महीनों के इलाज और कीमोथेरेपी के बाद वो इस बीमारी से उबरीं, लेकिन कुछ साल बाद उनके साथ फिर से एक दुर्घटना हो गई. दरअसल, बाथरूम में गिरने से उनको गंभीर चोट आई और वो व्हीलचेयर से सीधे बिस्तर पर आ गईं. इन घटनाओं ने राबिया को भले ही घाव दिए, लेकिन उनके आंतरिक शक्ति को छू भी नहीं पाए. बिस्तर पर रहते हुए भी राबिया ने आंदोलन जारी रखा.

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पद्मश्री से पहले भी मिले ये सम्मान

राबिया को साल 1994 में ‘केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय’ से ‘राष्ट्रीय युवा पुरस्कार’, जबकि साल 2000 में ‘केंद्रीय बाल विकास मंत्रालय’ से ‘कन्नकी स्त्री शक्ति पुरस्कार’ भी मिल चुका है. इनके अलावा राबिया को केंद्र और राज्य सरकार से कई अन्य पुरस्कार मिले हैं. अब पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे जाने वो लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं.

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साल 2009 में राबिया की आत्मकथा ‘ड्रीम्स हैव विंग्स’ (Dreams Have Wings) प्रकाशित हुई थी. इसके अलावा राबिया ने 3 और किताबें भी लिख चुकी हैं.

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