ज़िंदगी में कुछ हासिल करने के लिए हम इंंसान हर तरफ़ हाथ-पांव मारते हैं. हमें लगता है कि हम जैसे चाहेंगे, ज़िंदगी को दिशा दे देंगे. मगर कभी-कभी किस्मत आपसे ये अख़्तियार छीन लेती है. कुछ बुरे के लिए नहीं, बल्कि कुछ बड़े के लिए. वो बड़ा काम, जिसकी उम्मीद न तो आपने की थी, और न ही इस दुनिया ने.

ऐसी ही किस्मत 'रजनी पंडित' (Rajani Pandit) की भी थी. वो रजनी पंंडित, जिन्हें लोग 'लेडी जेम्स बॉन्ड' (Lady James Bond) के नाम से जानते हैं. इन्हें देश की पहली महिला जासूस (Country's First Female Spy) भी माना जाता है.

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एक क्लर्क कैसे बनी जासूस?

22 साल की उम्र तक रजनी पंडित की ज़िंदगी बिल्कुल एक आम लड़की की तरह थी. ग्रेजुएशन का पहला साल चल रहा था. इस दौरान वो किसी नौकरी में आकर ख़ुद के पैरों पर खड़ा होना चाहती थीं. ऐसे में उन्होंंने एक ऑफ़िस में क्लर्क की नौकरी कर ली. इस दौरान उनके ऑफ़िस में ही काम करने वाली एक महिला के घर पर चोरी हुई. महिला को शक था कि ये चोरी ज़रूर उसकी नई बहू ने की होगी. 

रजनी पंडित ऐसी चीज़ों को लेकर शुरू से जिज्ञासु रही थीं. दरअसल, उनके पिता ख़ुद CID में थे. वो उन्हें बचपन से देखती आ रही थीं. बहुत सी बातें वो उनके साथ रहकर सीख चुकी थीं. ऐसे में उन्होंने उस महिला से इस केस को छानबीन करने की इजाज़त मांगी. उस महिला ने दे भी दी.

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जब रजनी ने छानबीन शुरू की, तो मामला कुछ और ही निकला. मालूम पड़ा कि चोरी उस महिला की बहू ने नहीं, बल्कि बेटे ने की थी. पूछताछ में उसके बेटे ने अपना गुनाह क़ुबूल भी कर लिया. इस तरह रजनी ने महज़ 22 साल की उम्र में अपना पहला केस सॉल्व किया और उनके जासूसी करियर की शुरूआत हो गई. 

जब पिता को मालूम पड़ी बेटी की जासूसी

पहले केस के बाद रजनी पंडित की चर्चा होने लगी थी. लोग उन्हें अपने मामले सॉल्व करवाने के लिए अप्रोच करने लगे थे. मीडिया में भी उनका नाम आने लगा था. 22 साल की रजनी अब देश की पहली महिला जासूस के तौर पर पहचान बनाने लगी थीं. मगर इस बारे में उनके माता-पिता को जानकारी नहीं थी. जब उनके पिता को रजनी के काम के बारे में मालूम पड़ा तो उन्होंने रजनी के इस काम के ख़तरों के प्रति आगाह किया. मगर रजनी ने अपनी मंज़िल चुन ली थी और उन्होंने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा.

जब रजनी पंडित को मिला उनके जासूसी करियर का सबसे मुश्किल केस

ये एक मर्डर केस था. एक पिता और बेटे की हत्या हुई थी. ये केस रजनी के पास आया. जिस महिला के पति और बेटे की हत्या हुई थी, रजनी उसके घर में नौकरानी बन कर काम करने लगीं. दरअसल, शक की सुई उस महिला पर पहले से थी. मगर सुबूत नहीं थे. महिला के बीमार पड़ने पर रजनी ने उसकी काफ़ी सेवा की. धीरे-धीरे रजनी ने महिला का विश्वास जीत लिया. मगर फिर एक दिन गड़बड़ हो गई. 

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रजनी का टेप रिकॉर्डर क्लिक की आवाज़ कर गया. उस महिला को रजनी पर शक हो गया. ऐसे में उसने रजनी का घर से बाहर आना-जाना बंद करवा दिया. 

6 महीने बाद रजनी को मिला मौक़ा

रजनी 6 महीने तक नौकरानी के तौर पर काम करती रहीं. फिर एक दिन कोई शख़्स महिला से मिलने आया. ये वही आदमी था, जिसे महिला ने हत्या करने का काम दिया था. रजनी का मालूम था कि यही उनका मौक़ा है. मगर दिक्कत ये थी कि महिला उन्हें बाहर जाने नहीं देती थी. ऐसे में उन्होंने चाकू से अपना पैर काट लिया. रजनी ने महिला को बताया कि उन्हें काफ़ी चोट लगी है. ऐसे में डॉक्टर के पास जाकर इलाज करना होगा. 

ख़ून बहता देख, महिला ने भी इजाज़त दे दी. रजनी तुरंत बाहर गईं और STD बूथ से अपने क्लाइंट को पुलिस लेकर आने को बोला. उस दिन महिला और हत्यारा दोनों गिरफ़्तार हो गए.

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रजनी ने इसके बाद कई केस सॉल्व किए. इसके लिए उन्होंने बहुत बार अपना भेष भी बदला. एक बार रजनी ने प्रेग्नेंट औरत तो दूसरी बार फेरीवाले का भेष बदलकर काम किया. कहते हैं कि उन्होंने 80,000 से ज़्यादा केस सॉल्व किए हैं. 'फेसिस बिहाइंड फेसिस' और 'मायाजाल' नाम से उन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं. lबता दें, उन्होंने आज तक अपना परिवार नहीं बसाया, क्योंकि उन्होंने अपने काम से ही शादी कर ली है.