कहते हैं जोड़ियां ऊपर से बनकर आती हैं, किसकी ज़िन्दगी में कौन आयेग, कौन नहीं ये पहले से तय होता है. बस उस सही वक़्त का इंतज़ार करना आना चाहिए. वो कौन है, आपकी ज़िन्दगी में कब आएगा, ये सिर्फ़ वक़्त को पता होता है. लेकिन कहीं कोई ऐसा ज़िन्दगी में आ जाए जो अपने हिसाब से आपको बदलने की कोशिश करे, आपकी आज़ादी को ख़त्म करने की कोशिश करे, तो ज़िन्दगी नर्क हो जाती है.

कुछ ऐसी ही कहानी है इस लड़की की. इस कहानी को फ़ेसबुक पेज Humans of Bombay ने शेयर किया है.

तो कुछ यूं शुरू होती है ये कहानी जिसे इस बहादुर लड़की ने ख़ुद ही बताया है,

'मैं एक मैट्रिमोनियल साइट पर अनुभव से मिली थी. फिर हमने मिलने का सोचा. जब हम मिले तो पता ही नहीं चला कि कब 6 घंटे गुज़र गए बात करते-करते. हम दोनों का ऑफ़िस आस-पास ही था, इसलिए हम टी-ब्रेक के लिए और ऑफ़िस ख़त्म होने के बाद भी मिलने लगे. हम दोनों को एक-दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा और ये स्वाभाविक भी था. फिर हमने इसे आगे ले जाने का फ़ैसला किया और अपने पेरेंट्स को बताया.

उसके माता-पिता दिल्ली में रहते थे, इसलिए हमने अपने पेरेंट्स को वहीं मिलाना ठीक समझा. लेकिन जैसे ही हम खाने के लिए बैठे, अगले ही मिनट उसके पापा ने ये कहना शुरू कर दिया कि मुझे प्याज और लहसुन खाना बंद करना होगा. और मुझे शादी के तुरंत बाद दिल्ली में ही रहना होगा- मुझे पता था कि कहीं न कहीं अनुभव भी अपने माता-पिता के साथ रहना चाहता था, मगर मुझे लगा कि ये फ़ैसला हम मिलकर एक जोड़े के रूप में लेंगे.

उसके पेरेंट्स चाहते थे कि मैं ठीक रात 8 बजे उनके साथ डिनर करूं. मुझे बहुत गुस्सा आया था, लेकिन मैं सिर्फ़ उनको देखने के अलावा और कुछ नहीं कर सकती थी! अभी हमारी सगाई भी नहीं हुई थी और मुझे शादी के बाद डिनर शेड्यूल के बारे में पहले ही बताया जा रहा था. लेकिन बात यहीं ख़त्म नहीं हुई, इसके बाद जो उन्होंने कहा, वो तो और भी बुरा था. वो चाहते थे कि हम 2-3 महीने में बच्चे पैदा करें और मैं अपनी नौकरी भी छोड़ दूं!

मेरी मां से ये सब और सुना नहीं गया और वो बोलीं, कि मेरी बेटी ने अपने करियर को बनाने के लिए बहुत मेहनत की है, और वो जॉब कैसे छोड़ सकती है. अनुभव के पिता की अपनी बहू को लेकर जो उम्मीदें थीं कि वो जॉब छोड़ देगी, प्याज़-लहसुन नहीं खायेगी. उस इमेज पर मैं फ़िट नहीं बैठती थी. उनके पिता की इन बातों ने वहां बैठे हर व्यक्ति को चौंका दिया और सब चुप हो गए. और हम कमरे से बाहर आ गए, सभी बातों पर विचार-विमर्श करने के लिए.

फिर हमने अनुभव को भी बाहर बुलाया. उसको पता था कि हम कहां से हैं और हमारे विचार क्या हैं... हमने उससे उसके पेरेंट्स से बात करने के लिए कहा. उसने उनसे बात की और मुझे अंदर बुलाया. लेकिन जब मैंने उसके पेरेंट्स से आग्रह किया कि हमको कपल की तरह हमारी ज़िन्दगी के फ़ैसले लेने की आज़ादी दें तो उसकी मां को बहुत बुरा लग गया. ये सारी बातें बहुत अजीब तरह से समाप्त हो गईं, और हम अगले दिन घर के लिए रवाना हो गए.

जब एक हफ्ते बाद अनुभव वापस आया, तो हम थोड़ी देर के लिए सारी सिचुएशन को समझने और उनके बारे में बात करने के लिए मिले. लेकिन उससे मिलकर मुझे लगा कि मैं किसी और से मिल रही हूं. क्या ये वही आदमी है जो तब मेरे करियर का समर्थन कर रहा था, अब मुझे इसे छोड़ देने के लिए कह रहा था! सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उसके माता-पिता को ये मंज़ूर नहीं था. इतना ही नहीं, उसने मुझसे ये तक कहा कि प्याज़ और लहसुन छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं थी. इसलिए तुम्हें ये नहीं करना चाहिए था.

लेकिन मेरे सब्र का बांध तब टूट गया जब उसने मुझे ये कहते हुए काम करने से मना किया कि चाहे कुछ भी हो वो मुझसे ज़्यादा कमाता है. ये बात इसलिए मुझे ज़्यादा खटकी, क्योंकि हम हमेशा से ही अपनी ख़ुद की फ़र्म शुरू करने की बात करते थे क्योंकि हम दोनों और उसके बहन-बहनोई सभी वक़ील थे. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं क्या सुन रही थी...

बस वो दिन था जब मैंने अपने कदम पीछे ले लिए और इस रिश्ते को वहीं ख़त्म कर दिया. मैं किसी ऐसे व्यक्ति से शादी नहीं कर सकती, जो अपने माता-पिता को ख़ुश करने के लिए अपनी राय बदल दे. मैंने ये सोचने में बहुत समय बिताया कि क्या मुझे उनकी शर्तों पर सहमत होना चाहिए था, लेकिन मैं जानती थी कि मेरे लिए ख़ुद का सही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है. मैं अपने परिवार की पहली महिला हूं, जो नौकरी करती है- मुझे गर्व है कि मैं कौन हूं और मैं क्या हूं. मुझे अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो मेरा विचारों का सम्मान करे, कोई ऐसा व्यक्ति जो मुझे आसमान छूने में मदद करे, न कि मुझे नीचा दिखाए.'
Source: Gyfcat

ये कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो शादी के बाद भी काम करना चाहती हैं अपने सपनों को सच करना चाहती हैं, आगे बढ़ना चाहती हैं. और सोचने वाली बात है जो इंसान आपका साथ नहीं दे सकता आपको आगे बढ़ने देने के लिए, वो ज़िन्दगी भर आपको ख़ुश कैसे रख पायेगा. मेरा मानना है कि अगर आप किसी से शादी करते हैं, तो आप डॉन से जुड़ा हर फ़ैसला लेने का हक़ भी केवल आप दोनों को ही है. मां-बाप, भाई-बहन. रिश्तेदार क्या कहते हैं ये बात इतनी मायने नहीं रखती अगर आप दोनों साथ हैं तो.