हमारे देश में छेड़छाड़ की घटनाएं काफ़ी आम हैं. स्टॉकिंग, छेड़छाड़ आदि के लिए सज़ा का प्रावधान भी है. बहुत कम लोग इन सब अपराधों की एफ़आईआर करते हैं. ज़्यादातर लोग 'ऐसा ही होता है' कहकर टाल जाते हैं.


कुछ ही लोग हैं जो 100 डायल करके या महिला हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करते हैं. एक लड़की के साथ शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में छेड़छाड़ हुई और उसने ट्विटर पर ये घटना शेयर की. यही नहीं उसने ये भी बताया कि छेड़छाड़ करने वालों को कैसे सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सकता है.

'बहुत से लोगों को ये नहीं पता है कि किसी भी ट्रेन में टीटी की पावर सबसे ज़्यादा होती है , पुलिस अफ़सर से भी ज़्यादा. मेरे सहयात्री ने भरी शताब्दी में मेरे साथ छेड़छाड़ की. सबसे पहले आप चीखते हैं, ताकी आस-पास वाले आपकी सहायता कर सकें.'

'वो अगर मदद न भी करें तो उन्हें ये पता चल जाता है कि कुछ हुआ है. टीटी को सूचित करें. मेरे केस में टीटी दूर था. मैंने पैंट्री वाले को कहा कि वह पुलिस को बुलाए. टीटी से पहले आरपीएफ़ आ गई. मैंने उन्हें पूरी बात बताई. वे उस आदमी को कैबिन से बाहर ले गए.'

'मैं अफ़सरों के साथ दूसरे स्टेशन पर उतर गई. लड़कियों, ध्यान दो ये ज़रूरी है. मुझे पता है कि ये बहुत डरावना होगा, पर तुम्हें हर एक जानकारी कागज़ पर लिखकर देनी होगी. इससे अपना बयान लिखने में भी मदद मिलेगी और आगे उसे सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.

'जो भी याद हो, छोटी सी छोटी बात भी, लिख डालो. हमले से पहले और बाद में, उस आदमी के व्यवहार के बारे में भी लिखो. इसते अलावा आस-पास के लोगों के व्यवहार के बारे में भी लिखो.'

'सबसे नज़दीकी थाने जाओ. हर स्टेश पर थाना होता है. साफ़-साफ़ कहो कि तुम्हें FIR लिखवानी है. वे तुम्हें स्टेटमेंट लिखने कहेंगे, लिखो. सब कुछ अफ़सरों के सामने लिखो.'

'ऐसे केस में वक़्त की काफ़ी क़ीमत होती है. बिना FIR लिखे स्टेशन छोड़कर मत जाओ. अगर वो फ़ाइल करने कहें, फ़ाइल करो. मैं 3 घंटे तक थाने में थी, क्योंकि मेरी फ़ाइलिंग में वक़्त लग रहा था. हिम्मत मत हारो.'

'अगर वो FIR लिखने से इंकार करें, तो 100 डायल करो या महिला हेल्पलाइन पर कॉल करो और जीरो FIR करो. कन्ट्रोल रूम तुम्हें हाइड करेगा. अपने स्टेटमेंट की कॉपी और तस्वीर दोनों लेकर रखो. पुलिस से Receiving लेना मत भूलो.'

'Receiving यानी कि उनके दस्तख़त और Seal की हुई कॉपी. अपने स्टेटमेंट की कॉपी की तस्वीर लेना इसीलिए ज़रूरी है क्योंकि ये आगे काम आती है. उन्होंने मुझे अगले दिन स्टेशन बुलाकर शिकायत वापस लेने को कहा.'

'उन्होंने शिकायत वापस लेने के कई कारण दिए. जैसे कि मुझे छेड़छाड़ करने वाले के परिवार और बच्चों के बारे में सोचना चाहिए. मैं अड़ी रही. मैंने FIR की कॉपी ली. आपको हर एक अधिकारी के सामने पूरी कहानी बार-बार सुनानी पड़ेगी पर हार नहीं मानना.'

'वे आपके स्टेटमेंट में ग़लतियां निकालेंगे, पर आपको पता है कि उस आदमी ने आपके साथ क्या किया और बिना घबराए साफ़ आवाज़ में उनसे यही कहना, अपने बात से पीछे मत हटना क्योंकि इससे आपका केस कमज़ोर पड़ेगा.'

'तीसरे दिन मुझे कोर्ट ले जाया गया. जज कोर्टरूम को खाली करता है, ताकी आप अपना स्टेटमेंट दे सकें. जज आपको झूठे केस के नतीजों के बारे में बताएंगे. जज के सामने भी आप अपना स्टेटमेंट दोहराएंगे. उन चश्मदीदों का नाम दोहराएंगे.'

'घटना के बाद अगर आप अपने परिवार, दोस्तों को सबकुछ बताते हैं तो वो भी चश्मदीद बन सकते हैं. उनको बुलाकर पूछा जाएगा कि आपने उनसे क्या कहा. इसीलिए ये ज़रूरी है कि आप अपने परिवार या दोस्तों को घटना के बारे में बताएं.'

इसके बाद इस ट्विटर यूज़र ने FIR और कोर्ट से जुड़े कुछ मिथकों पर भी रौशनी डाली.

'लोग ये सोचते हैं कि FIR दायर करने से बार-बार कोर्ट आना पड़ता है. अगर ये एक क्रिमिनल केस है और आप एक चश्मदीद हैं तो आपको वक़ील की ज़रूरत नहीं है. State Prosecutor आपका केस लड़ेगा.'

'आपको सिर्फ़ एक बार कोर्ट की सुनवाई में जाना होगा. इसमें लगभग एक पूरा दिन लगेगा पर आपको जाना होगा. आपके द्वारा दिए गए पते पर आपको Summons भेजे जाते हैं.'

'कोर्ट की तारीख़ पर Summons साथ ले जाने न भूलें. उसमें ये लिखा होगा कि किस कोर्ट में आपकी सुनवाई होगी. वहां पुलिस वाले, अदालती स्टाफ़ आदि होंगे, जो आपकी सहायता करेंगे. डिफ़ेंस काउंसिंल मामले को 'सेटल' करने की कोशिश करेगा. मैंने ये ऑफ़र ठुकरा दिया था और कोर्ट ऑर्डर की मांग पर अड़ी रही.'

'Prosecution पहले आपसे सवाल जवाब करेंगे फिर Defence का वक़ील. वे आपकी कहानी में ग़लतियां ढूंढेंगे या फिर पुलिस की शिकायत और आपके कोर्ट में दिए गए स्टेटमेंट में असामनताएं निकालने की कोशिश करेंगे.'

'इसलिए ये ज़रूरी है कि आप अपने स्टेटमेंट पर अड़े रहें और वो सब याद रखें जो आपने लिखा था क्योंकि घटना के 7 महीने बाद सब याद रखना मुश्किल है. इसलिए स्टेटमेंट की तस्वीरें लेकर रखना ज़रूरी है.'

'सवाल-जवाब के बाद आप घर जा सकते हो. बस यहीं तक आपका काम था. आप पूरे मामले पर उनसे किसी भी तरह की मदद ले सकते हो.'

ट्विटर यूज़र ने ये भी बताया कि उनका केस अभी भी चल रहा है पर उन्हें कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ते.

इस लड़की कहानी पर लोगों की प्रतिक्रिया-