महिलायें किसी भी क्षेत्र में और कोई भी काम कर सकती हैं और इस बात को प्रमाण की कोई ज़रूरत नहीं है. समय-समय पर दुनिया की महिलायें ख़ुद की काबिलियत को साबित कर चुकी हैं. शायद इसीलिए भगवान ने जीवन देने का काम भी महिलाओं को ही दिया है. लेकिन कैसी विडंबना है कि आज भी महिलाओं को काबिलियत को उनके काम से नहीं, बल्कि उनके औरत होने के हिसाब से आंका जाता है. पता नहीं लोगों की ये मानसिकता कब बदलेगी?

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IBM की चेयरमैन और सीईओ, Ginni Rometty ने समाज की इस छोटी सोच को करारा जबाब दिया है. हाल ही में IBM द्वारा आयोजित किये गए Advancing Women's Leadership Dinner में Ginni Rometty ने कहा,

'मुझे एक महिला होने के बारे में मत पूछो, मैंने जो काम किया है मुझे उसके लिए जज करो.'
Ginni Rometty
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बीते 12 फरवरी को आयोजित हुए THINK फ़ोरम में उन्होंने कहा, 'महिलाओं को उनके काम के आधार पर जज करना चाहिए, न कि उनके जेंडर, धर्म और जाति के आधार पर.

मेरी कहानी का सबक ये है कि कृपया पहले मेरे काम मूल्यांकन करें और फिर मुझे जज करें. मैं नहीं चाहती कि मुझे IBM की पहली महिला सीईओ के रूप में जाना जाए. मैं चाहती हूं कि मुझे केवल IBM की सीईओ के रूप में पहचाना जाए.'
Ginni Rometty
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इस Leadership Dinner में उन्होंने अपने कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर निकलने और IBM के सबकी सोच और मान्यताओं को साथ लेकर चलने वाले कल्चर के बारे में भी बात की. उन्होंने ये भी बताया कि कल्चर ऑफ़ इन्क्लूज़न हर कंपनी में होना चाहिए और हर दिन ये बढ़ना ही चाहिए. IBM ने हर महिलाओं, पुरुषों के बाथरूम्स की लड़ाई, आप्रवासन सुधार और सपने देखने वालों के अधिकारों की लड़ाई और समाज में कई तरह के सुधारों के लिए आवाज़ उठाई है. Rometty ने कहा कि IBM का राजनीति से ज़्यादा नीति को प्राथमिकता देने का इतिहास रहा है.