विश्व सिर्फ़ ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से जूझ रहा है, ऐसा नहीं है. ग्लोबल वॉर्मिंग के अलावा दूसरी कई समस्याएं विश्व को जकड़े हुए हैं. इनमें से एक प्रमुख समस्या, शरणार्थी समस्या है. बेहतर जीवन की तलाश में लोग पलायन के लिए मजबूर हैं. मध्य-पूर्व और अफ़्रीका में आंतकवाद और अकाल की समस्या से परेशान काफ़ी लोग, यूरोप और दूसरे देशों में पलायन करने को मजबूर हैं. आज विश्व शरणार्थी दिवस है. हम आपके लिए शरणार्थी कैंप से कुछ ऐसी तस्वीरें और जानकारियां लेकर आए हैं, जिससे आप जान पाएंगे कि क्यों शरणार्थी समस्या एक बड़ी समस्या का रूप लेती जा रही है...

ऊपर तस्वीर में दिखाई देने वाले ये बच्चे इराक़ के हैं, जो हसन शाम शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में लगभग 65.6 मिलियन लोग दुनिया में चल रहे संघर्षों के कारण अपना देश छोड़ने पर मजबूर हुए थे. जबकि साल 2015 में ये आंकड़ा तीन लाख का था. UN के इस आंकड़े के अनुसार, लगभग हर तीन सेकेंड में एक इंसान पलायन करने पर मजबूर है.

स्पेन के एक NGO, Proactiva Open Arms ने 16 जून 2017 को ख़तरनाक तरीके से समुद्र पार कर रहे 600 से अधिक प्रवासियों और शरणार्थियों को बचाया था. Golfo Azzurro के डैक के किनारे खड़े, लीबिया के ये लोग नाव से भू-मध्य सागर पार करने का प्रयास कर रहे थे.

सीरिया के शरणार्थी शिविर रक्का के अंदर खेलते हुए बच्चे.

इराक़ी सेना और इस्लामिक स्टेट के बीच चल रहे युद्ध के कारण ये लोग अपना घर और शहर छोड़ रहे हैं. ये लोग दक्षिण मोसुल में बने हम्माम अल-अलील शरणार्थी कैंप पर जा रहे हैं. मोसुल में जिहादी आईएस के खिलाफ़ इराक़ी सेना की हवाई कार्रवाई से आम नागरिकों के हताहत होने के कारण इन्हें शरणार्थी कैंप में जाना पड़ रहा है.

UN के शरणार्थी कैंप अल-अलगया शरणार्थी कैंप में खड़ा एक दक्षिण सूडान से आया बच्चा. इस साल दक्षिण सूडान से लगभग 95 हज़ार शरणार्थी, सूडान आये. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि दुनिया के सबसे युवा देश से लोग युद्ध और अकाल से परेशान हो कर पलायन कर रहे हैं. दक्षिण सूडान साल 2011 में सूडान से अलग हो गया था, तब से ही यहां के कुछ इलाकों में अकाल से लाखों लोग भुखमरी की कगार पर आ गए हैं.

इराक़ के एक शरणार्थी कैंप के टेंट से बाहर झांकता हुआ बच्चा.

इटली जाने के लिए जहाज़ के डैक पर बैठी इन महिलाएं को स्पेन के NGO, Proactiva Open Arms ने नाव से भूमध्य सागर को पार करने से बचाया था.

इस्लामिक स्टेट से इराक़ी सेना के साथ चल रहे युद्ध के कारण पलायन करने को मजबूर हुए इराकी नागरिक. ये तस्वीर इराक़ के सबसे प्राचीन शहर हातरा की है. इस प्राचीन शहर की महत्वपूर्ण पुरातात्विक जगहों को आईएस ने बहुत ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है.

नील नदी के किनारे Aburoc में दक्षिण सूडान से आए विस्थापितों के शिविर का हवाई दृश्य. दक्षिण सूडान से लगभग 25,000 लोग विस्थापित होकर Aburoc आए हैं.

इराक़ में Iraqi Counter Terrorism Service (CTS) फ़ोर्स और इस्लामिक स्टेट के बीच चल रहे युद्ध से लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ रहा है.

सीरिया के रक्का में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों का कब्ज़ा हो जाने के बाद सीरिया और टर्की की सीमा पर बने अल-माबरौका शरणार्थी शिविर में खाने के लिए इंतज़ार करती सीरिया की एक महिला.

शरणार्थियों की समस्या केवल उन्हीं की नहीं है. ये समस्या उन देशों की भी है, जो इन्हें आसरा दे रहे हैं. किसी भी देश में संसाधन सीमित होते हैं, इन्हीं संसाधनों से देश का गुज़ारा होता है. बाहर से शरणार्थियों के आने से किसी भी देश के ऊपर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि अन्य देश शरणार्थियों को अपने देश में सीमित मात्रा में प्रवेश दे रहे हैं. जिसके कारण कैंप में और कैंप के बाहर शरणार्थियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. शरणार्थी समस्या का केवल एक ही समाधान है कि विश्वभर में फैले संघर्षों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से खोजा जाए.

Source - Hindustan Times

Feature Image Source - Aljazeera