विश्व में कुल 196 देश हैं. सभी देशों के अपने नियम-क़ानून, संविधान, झंडे और सेना है. इतना ही नहीं, सभी देशों की अपनी आर्थिक नीति, कूटनीति और विदेश नीति है. वे उसी आधार पर एक-दूसरे देश से संपर्क बढ़ाते हैं और एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं. इस चक्कर में पूरी दुनिया आतंकवाद जैसी बीमारी से ग्रसित हो चुकी है. आए दिन कोई न कोई ऐसी घटना घटती रहती है, जिसके कारण मानवता को चोट पहुंचती है. हम अपनी वजह से इस पृथ्वी पर रह रहे अन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. ख़ैर, जीवों से याद आया कि इनका, तो कई देश ही नहीं होता है. ना ही इन्हें दूसरे देश जाने के लिए वीज़ा की ज़रुरत पड़ती है. क्या हम मानव भी इनके जैसी ज़िंदगी जी सकते हैं? इससे हमें कई फ़ायदे मिल सकते हैं.

सेना की ज़रुरत नहीं पड़ेगी

विश्व के सभी देशों की अपनी सेना होती है. वे दूसरे देशों से अपनी सुरक्षा के लिए रखते हैं. सोचिए, यदि हम एक हो गए, तो हमें सेना की ज़रुरत ही नहीं पड़ेगी.

Source: Army

कला का प्रसार होगा

बॉर्डर के कारण कई कलाकारों की प्रतिभा सीमित रहती है. अगर इन्हें दूसरे देशों में जाने की इज़ाज़त मिले, तो इनकी प्रतिभा और निखर कर सामने आएगी.

Source: Artist World

आपसी सौहार्द्र बढ़ेगा

एक देश में होने के कारण, हम दूसरे देशों के निवासियों को अच्छे से समझ नहीं पाते हैं. इस वजह से हम उनके साथ एक संवाद स्थापित नहीं कर पाते हैं. उदाहरण के लिए बगल में चीन है, मगर हम इंगलैंड के नागरिकों को अच्छे से समझ पाते हैं. कहने का मतलब यही है कि बॉर्डर नहीं रहने के कारण हम कई लोगों से मिल पाते और हमारी आपसी सौहार्द्रता बढ़ता.

Source: World Heritage

शिक्षा का विस्तार होगा

अलग देश होने के कारण हम अच्छे कॉलेजों में नहीं पढ़ पाते हैं. इस वजह से हमारा मानसिक विकास नहीं हो पाया है. अगर इस दुनिया में कोई देश नहीं होता, तो कई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता.

Source: Coursera

विश्व की सभी संस्कृतियों का सम्मान होगा

पूरी दुनिया में इस बात को लेकर बहस चल रही है कि हमारी संस्कृति दुनिया की सबसे अच्छी संस्कृति है. ये इसलिए हो रहा है क्योंकि हम दूसरे देशों की संस्कृति को समझना ही नहीं चाहते हैं.

Source: Wikipedia

हो सकता है कि कई लोग इस बात से असमत हों. मैं इसे मानता भी हूं, मगर एक कोशिश करने में क्या जा रहा है. आज हमने ख़ुद को पिंजरे में क़ैद कर लिया है. बॉर्डर और देश के नाम पर हम एक-दूसरे की हत्या कर रहे हैं.

धर्म, जाति-पात और भाषा के आधार पर हमने ख़ुद को बांट लिया है. इस कारण हमारा नुकसान भी हुआ है. विकास की होड़ में हमने किसी और को नहीं ख़ुद का नुकसान पहुंचाया है.

देखा जाए, तो इस धरती पर मिलने वाले सभी संसाधन प्रकृति के हैं. हम भी प्रकृति से बने हुए हैं और अन्य जीव भी प्रकृति की देन है. एक दिन हम सबको प्रकृति में मिट जाना है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि हम आपस में क्यों लड़ते हैं?