उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ का जीवन पहले से कहीं ज़्यादा व्यस्त हो जायेगा. पहले जहां वो एक निश्चित समय अपने मंदिर और मठ को दे पाते थे, अब वो संभव नहीं है. राज्य के मुख्यमंत्री के पास इतना समय नहीं होता कि वो प्रशासनिक कार्यों से निकल कर अपनी निजी ज़िंदगी को वक़्त दे पाए. योगी जी जिस मंदिर के महंत है, वहां भी उनके कई काम लंबित पड़े हैं. सबसे मुख्य काम है गायों को संरक्षण प्रदान करना. गाय हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र मानी जाती है. योगी जी ने अपने जीवन में अब तक का काफ़ी समय गायों की देखभाल और रक्षा में बिताया है.

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मंदिर के एक सदस्य के अनुसार, योगी जी रोज़ सुबह 3 बजे उठते हैं और दैनिक प्रार्थनाएं करते हैं. उसके बाद वो अपने गौशाला में जाकर गायों को खाना खिलाते हैं. गायों को खिलाने से पहले योगीजी नाश्ता तक नहीं करते. मंदिर परिसर की लगभग 2 एकड़ भूमि पर गौशाला बनी हुई है. हर दिन कुछ वालंटियर्स 500 से भी ज़्यादा गायों की देख-भाल करते हैं. वालंटियर्स में एक मुस्लिम वालंटियर भी है, जिसका नाम मोहम्मद है. मोहम्मद यहां बचपन से अपनी सेवा दे रहे हैं. उनके पिता इनायतुल्लाह ने एक बार उन्हें ऐसा करने की सलाह दी थी, तब से वो ऐसा करते आ रहे है. उन्हें गायों को नहलाने और उनके लिए चारा जुटाने का काम सौंपा गया है.

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गौशाला के प्रभारी सुनील राय ने बताया कि आदित्यनाथ सभी गायों को नाम से बुलाते हैं और उन्हें खिलाते हैं. नंदिनी नाम की एक गाय से उन्हें सबसे ज़्यादा लगाव है. गौशाला में कई अच्छी नस्लों की गायें हैं, जिनमें से गुजराती, सह्वाल, देसी और गिर भी शामिल हैं. ये गायें रोज़ाना सैकड़ों लीटर दूध देती हैं. इस दूध का मट्ठा बनाया जाता है और भक्तों को प्रसाद के तौर पर दिया जाता है. दूध से मंदिर में दीये जलाने के लिए घी भी बनाया जाता है. साथ ही दूध भंडारे में भी बांटा जाता है, लेकिन दूध को बेचा नहीं जाता. गाय के गोबर से जैविक खाद बनाई जाती है.

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गाय से इस मंदिर का जुड़ाव बहुत पुराना है. इस मंदिर को गोरक्षा पीठ के नाम से भी जाना जाता है. आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ भी गोरक्षा पर बहुत जोर देते थे. उन्होंने गोरक्षा के लिए संसद में भी आवाज़ उठाई थी.

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