पिछले साल का सबसे चर्चित नाम शायद सोनम गुप्ता ही रहा है. ये तो आपको पता ही होगा कि इस नाम की चर्चा मोदी सरकार नवंबर 2016 में किये गए नोटबंदी के फैसले के बाद हुई थी और रातों-रात ये नाम सुर्ख़ियों में आ गया था. सोशल मीडिया पर इस नाम को लेकर तरह-तरह के चुटकुले बन रहे थे. इतना ही नहीं लोगों ने इस सोनम गुप्ता की बेवफाई को लेकर कई तरह की कहानियां भी लिखी गयीं थीं.

अब आपको ये तो पता ही होगा कि आख़िर सोनम गुप्ता फ़ेमस कैसे और क्यों हुई थी. चलिए अगर नहीं पता है तो हम बता देते हैं कि किसी सिरफिरे ने 10 रुपये के नोट पर ये लिख दिया कि 'सोनम गुप्ता बेवफ़ा है' और वो नोट लोगों के हाथों से होता हुआ सोशल मीडिया में घूमने लगा. इस नोट का सफर केवल इंडिया ही नहीं बल्कि विदेशियों की टाइमलाइन तक का रहा. फिर चाहे 2000 रुपये का गुलाबी नोट हो, डॉलर हो या यूरो हर करेंसी पर 'सोनम गुप्ता बेवफा है' की छाप लगी. और इस तरह से नोटबंदी के उस कठिन दौर में इसने लोगों को थोड़ा हंसने का मौक़ा दिया.

'सोनम गुप्ता बेवफ़ा है' लिखे 10 रुपये की 2000 रुपये के नोट के साथ फ़ोटो खींचकर उसको किसी ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर पोस्ट कर दिया. बस फिर क्या था. हर जगह इसी बात की चर्चा होने लगी.

अब यहां देखिये कि लोगों ने इस फ़ोटो को कैसे-कैसे कैप्शन्स के साथ अपनी-अपनी टाइमलाइन पर शेयर किया.

इतना ही नहीं, लोगों ने सोनम गुप्ता को गूगल पर इतना सर्च किया कि ये नाम 2016 का सबसे ज़्यादा सर्च किया गया नाम बन गया.

हालांकि, पिछले कुछ दिनों से सोनम गुप्ता... नामक ये तूफ़ान थमता नज़र आ रहा था, लेकिन एक ट्विटर यूज़र ने एक बार फिर सबका ध्यान इसकी ओर खींचा.

जी हां, उसने एक किताब जिसका टाइटल ' I'm not a Betrayer' है के कवर की फ़ोटो को अपनी टाइम लाइन पर पोस्ट किया है. उसने ये बुक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट 'amazon' देखा. आपको बता दें कि ये एक किनडल एडिशन है.

इसमें कोई शक़ नहीं है कि इस बुक का फर्स्ट लुक आपको व्यंगात्मक ही प्रतीत होगा और आप यही सोचेंगे कि बुक के कवर पर इस तरह का मीम बनाना एक सोची समझी रणनीति है, जो कि सच भी इस किताब का सोनम गुप्ता से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि ये मार्केटिंग का एक नायब तरीका है.

लेकिन इस किताब के बारे में जानकर आप की सोच बिलकुल बदल जायेगी. तो आइये संक्षेप में जानते हैं इस किताब के बारे में:

मेरा नाम सोनम गुप्ता है. आपने मेरे बारे में सुना ही होगा. हां, मैं वहीं हूं जिसका नाम आपने बीते दिनों करेंसी नोट पर देखा होगा. मैं वही हूं, जिसने बहुतों की फेसबुक एकाउंट्स की टाइमलाइन पर लाइक और कमेंट्स की बाढ़ ला दी थी. और हां, मैं वही हूं जो उन दिनों न्यूज़ हेडलाइंस के ज़रिये सुर्ख़ियों में थी.
लेकिन,उस दौरान लोगों ने जो कुछ भी मेरे बारे में कहा, वो सच नहीं है. मैं बेवफ़ा नहीं हूं. अगर आप किसी बेवफ़ा को ढूंढ रहे हैं, तो वो है ये समाज, जिसकी दकियानूसी सोच में हम सांसें ले रहे हैं. मैं भी एक लड़की हूं, एक ऐसी लड़की जिसकी हर किसी को चाह होती है. एक ऐसी लड़की, जो अपने माता-पिता की आंखों का तारा है और जो सपनों और इच्छाओं से इस दुनिया को जीतना और उसमें सुकून से जीना चाहती है.
औरों की तरह ही मैंने भी अपने पेरेंट्स की ख्वाहिशों और सपनों को पूरा करने का ही सपना देखा है. मैंने उसी ज़िन्दगी को चुना है जो उन्होंने मेरे लिए चुनी है. मैंने अपने सपनों की जगह उनके होठों की मुस्कान को चुना है. क्या ये सब मुझे एक बेवफ़ा और धोकेबाज़ बनाता है? वैसे मैं आपसे किसी भी जवाब की उम्मीद नहीं कर रही हूं. लेकिन मैं ये भी नहीं चाहती हूं कि आप मेरे बारे में कोई भी राय बनायें या मुझे जज करें. मुझे बस आपका थोड़ा-सा कीमती समय चाहिए. क्या आप मेरे साथ कुछ देर के लिए बैठेंगे? क्या आप मुझ पर तब तक के लिए विश्वास करेंगे, जब तक आप मुझे सुनेंगे? क्या आप मेरी कहानी सुनेंगे? अगर इन सब सवालों पर आपका जवाब 'हां' है, तो मुझे अपनी कहानी बताने दीजिये.

इस बुक का रिव्यु करने वाले Vishal Bheeroo लिखते हैं, 'सोनम गुप्ता हमारी जिंदगियों में सोशल मीडिया के ज़रिये शामिल हुई थी. लेकिन सोनम गुप्ता केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक आम औरत की पूरी कहानी है, जिसने एक ऐसे समाज का गुस्सा झेला है, जिसमें लोगों की प्रवृत्ति ही पितृसत्तात्मक है. उसने एक ऐसे समाज का सामना किया है, जिसने एक औरत को एक अंजान आदमी के साथ अपना पूरा जीवन बिताने के लिए बाध्य किया है, और वो अंजान व्यक्ति एक ही रात में उसके आत्मसम्मान का हनन और उसके शरीर का उपभोग करता है. क्या पूरे इंडिया की लाखों औरतों की यही कहानी नहीं है?'

आपको बता दें कि Amazon India पर इस बुक का रिव्यु करने वाले बुक रिव्युअर्स का कहना है, 'ये एक औरत की कहानी है, जो ज़रूर पढनी चाहिए, इसकी कहानी ने हमारी सोच और समाज के मुंह पर करारा तमाचा मारा है.'

Source: huffingtonpost