हमारे देश में LGBT कम्युनिटी अपने अधिकारों के लिए सालों से लड़ती आ रही है, पर संस्कृति का हवाला देकर उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है, लेकिन धर्म का हमारे देश में इतना बड़ा कद है कि जब किसी काम के आगे धर्म का टैग जुड़ जाता है, फिर वो काम गलत भी हो, तो भी सबको स्वीकार होता है. महादेशवारा हिल्स में एक लड़के की शादी एक लड़के ही करवाई जा रही थी. नहीं, नहीं ये कोई Gay Wedding नहीं थी, बल्कि ये तो भगवान को खुश करने के लिए किया जा रहा था.

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महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में गांववाले मंदिर की तरफ़ जा रहे थे और उनके आगे थे दो लड़के, जिनमें से एक ने दुल्हन की पोशाक पहन रखी थी. स्थानीय लोगों से पूछने पर पता चला कि ये यहां की एक परम्परा है जिसे 'हराके' कहा जाता है. इसके लिए दो लड़कों को चुना जाता है और फिर नियमबद्ध तरीके से उनकी शादी करवाई जाती है. फिर एक जुलूस निकाला जाती है. लोगों के अनुसार, ऐसा करने से क्षेत्र में समृद्धि आती है और खूब बारिश होती है. इस कार्य के लिए आस-पड़ोस के गांवों में जाकर चंदा इकट्ठा किया जाता है.

इससे पहले भी हम देश के कई हिस्से में बारिश के लिए गधों से लेकर मेढकों की शादी करवाते देख चुके है. ये परम्पराएं सबसे ज़्यादा बेंगलुरु और तुमकुरु के गांवों में मानी जाती हैं. ज़रा सोचिये, अगर ये लड़के एक-दूसरे से प्यार करने वाले Gay Couple होते, तो क्या लोग इतनी ख़ुशी से इनकी शादी करवाते! नहीं, उस वक़्त यही संस्कृति और परम्पराएं इन दोनों की मौत की वजह बन जातीं.

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