रेगिस्तान, ऊंट और राजपुताना किला... ये तीन चीज़ें राजस्थान की पहचान से जुड़ी हुई हैं, लेकिन हम बात करेंगे एक एेसी चौथी चीज़ की, जिसके लिए राजस्थान दुनिया भर में मशहूर है.

राजस्थानी थाली.

भारत में अतिथि सत्कार, राजस्थान से बेहतर शायद ही कहीं होता हो. बिना खान-पान के सत्कार संभव नहीं होता. राजस्थान के पकवानों को वहां के लोगों ने पीढ़ी दर पीढ़ी सींचा है. आज राजस्थान के पास एेसे कई पकवान हैं, जिन्हें एक राजस्थानी से बेहतर बनाने का दावा भी कोई नहीं कर सकता. Daal-baati choorma jahaan rajasthanki pechaan hai, wahin iske alag-alag kshetron mein banaane wala paramparik khana, iski khaasiyat.

जयपुर का दाल बाटी चूरमा

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आटे की लोइ को भट्ठी में पकाओ, तो बनती है बाटी. उसको घी में डुबो कर परोसो, मसालेदार दाल के साथ. इस जोड़ी को साथ मिलता है चूरमे का. मसालेदार दाल और मीठा-मीठा चूरमा. आपने अगर आज तक दाल बाटी चूरमा खाया न हो, तब भी ये कल्पना में स्वादिष्ट लगता है. कभी राजस्थान जाने का प्लान बना, तो स्टेशन के पास संतोष ढाबे पर 'दाल बाटी चूरमा' ज़रूर ऑर्डर करना.

जैसलमेर का लाल मांस

वैसे तो राजस्थान मुख्यत: शाकाहारियों का प्रदेश है, लेकिन Non Vegetarians भी यहां से निराश हो कर नहीं जाते. एक मांसाहारी हो कर भी अगर आपने लाल मांस नहीं खाया, तो राजस्थान की पकवान यात्रा अधूरी रह जाएगी.लाल मिर्च और लहसून से बनी इसकी ग्रेवी खाने की जान है. ये खाना सामान्य से थोड़ा तीखा होता है. जब भी खाएं, इस बात को ध्यान में रखें.

पुष्कर की गट्टे की सब्ज़ी

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गट्टे की सब्ज़ी आपको राजस्थान के अलावा कहीं और नहीं मिलेगी और अगर मिल भी गई तो उसमें राजस्थान वाली बात नहीं होगी. बेसन से बनाई गई ये सब्ज़ी किसी भी चीज़ के साथ खाई जा सकती है. रोटी, चावल या बाटी मर्ज़ी आपकी है. हां, रोटी गरमा-गरम हो, तो बात ही कुछ और है. पुष्कर के अलावा आप इसे 'चौकी धानी' में भी खा सकते हैं.

कोटा की कचौड़ी

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कुरकुरी कचौड़ी नाश्ते के तौर पर खाई जाती है. इसे Basic कचौड़ी जैसा समझने की भूल मत करना. चटपटी मूंग की दाल इसके अंदर डाली जाती है. हरी चटनी के साथ ये अपने पूरे शबाब पर होती है. कहीं-कहीं मूंग की दाल की जगह टमाटर, प्याज़ या कुछ और भी भरा जाता है. कोटा में कचौड़ी के मज़े लेने हों, तो बस स्टैंड के पास 'रतन नमकीन' से बेहतर कुछ भी नहीं.

घेवर

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घेवर को बस एक मिठाई कहना इसे कमतर आंकना होगा, इसे कला कहा जाए तो बेहतर है. इसकी तुलना किसी भी अन्य मिठाई से नहीं की जा सकती. अगर आप मीठे के शौकीन हैं, तो घेवर आपके लिए ही बना है. मावा, मलाई या फिर सादा, घेवर जिस रूप में भी हो, कमाल होता है.

केर सांगरी

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मारवाड़ी शादी में जाने को मौका मिले, तो वहां से केर सांगरी और मक्के की रोटी खाए बिना वापस मत आइएगा. बेर और बीन्स से बना ये पकवान थोड़ा मसालेदार और चटपटा होता है. राजस्थानी थाली इसके बिना अधूरी होती है.

राजस्थान के लोग कब से कहे जा रहे हैं, पधारो म्हारे देस. अब तो हो ही आओ.

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