1858 में अंग्रेज़ों ने इलाहाबाद शहर का नामकरण किया था. अब 160 साल बाद योगी सरकार ने इसका नाम प्रयागराज करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है. आज सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में इलाहाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई. अब इसे इसके पुराने नाम 'प्रयाग' से ही जाना जाएगा.

वैदिक काल से ही संगम नगरी इलाहाबाद को प्रयाग के नाम से जाना जाता था. कहा जाता है कि यहीं पर भगवान ब्रह्मा ने सृष्टी का निर्माण कर पहला बलिदान दिया था. अब सदियों बाद इलाहाबाद को फिर से उसके पुराने नाम से ही बुलाया जाएगा.

यूपी सरकार के इस फ़ैसले पर लोगों ने मिले-जुले रिएक्शन दिए हैं. कोई से ठीक, तो कुछ इसका विरोध करते दिख रहे हैं. आप भी देखिए लोगों ने योगी सरकार के इस फ़ैसले पर कैसे रिएक्ट किया है.

भले ही सरकारें किसी भी शहर का नाम बदल लें, लेकिन लोगों के दिलों से उस शहर का पुराना नाम नहीं निकाल सकती. इसका सटीक उदाहरण बैंगलोर, कलकत्ता और गुड़गांव हैं, जिनके नाम तो बदल दिए गए हैं. पर लोग आज भी इन शहरों का ज़िक्र करते वक़्त पुराने नाम का ही इस्तेमाल करते हैं.