जेल के अन्दर की दुनिया के बारे में जानने की उत्सुकता सभी को रहती है. अपने ख्यालों में तो कई बार हम जेल तोड़ कर भाग भी चुके होंगे. हमारे लिए जेल से भागने की कहानियां हमेशा ही आकर्षण का केंद्र रही हैं. ऐसी घटनाओं पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं और सैंकड़ों फ़िल्म भी बन चुकी हैं. पर अब इन्हें सुन कर ऐसा लगता है कि क्या मज़ाक है यार! जेल से भागना कोई बच्चों का खेल थोड़े ही है.

पर यकीन इन 5 क़ैदियों की जेल से भागने की कहानियां आपको हैरत में डाल देंगी.

1. शेर सिंह राणा

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शेर सिंह राणा का नाम अगर आपने सुना होगा तो आपको याद होगा कि यही वो आदमी था, जिसने 2001 में फूलन देवी को गोली मारी थी. पहले से ही कुख्यात ये पेशेवर हत्यारा फूलन देवी को मारने के बाद और भी कुख्यात हो गया. जब राणा तिहाड़ जेल में बंद था, तो वो अपने भाई के साथ अपने गांव रुड़की के एक साथी संदीप ठाकुर की मदद से भागने का षडयंत्र बना रहे थे. जेल में संदीप राणा से चार बार मिलने आया, तीन बार वकील बन कर तो एक बार दोस्त बन कर. फिर एक बार संदीप पुलिस अधिकारी बन कर आया, जिसने जेलर को ये विश्वास दिला दिया कि उसे राणा को कोर्ट ले जाने का काम सौंपा गया है. इस तरह नकली अधिकारी बन कर नकली पेपर्स के सहारे संदीप राणा और उसके भाई को ले उड़ा.

2. जगतार सिंह हवारा

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हवारा बब्बर खालसा इंटरनेशनल का एक सदस्य था और खालिस्तान आन्दोलन में भी काफी सक्रिय था. वो पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेंत सिंह की हत्या में भी एक संदिग्ध माना जा रहा था. आरोप साबित हो जाने के बाद उसे चंडीगढ़ के बुरैल जेल में डाल दिया गया. अब उसके भागने की कहानी सुनिए. जेल से भागने की उसकी कहानी किसी के ज़िद को पूरा करने का एक बेजोड़ नमूना है. सबसे पहले तो हवारा ने जेल के किचन बैरक में 35 फ़ीट लम्बी सुरंग खोद डाली, पर उससे काम नहीं बना. उसके बाद उसे दूसरे बैरक में शिफ्ट कर दिया, फिर उसने गुरुद्वारे के नीचे भी एक सुरंग खोद डाली. पर पहले जैसा ये भी बेकार रहा. अगला मौका तो जैसे उसके लिए लकी चार्म था, हवारा और उसके साथ अन्य 3 कैदियों ने 8 फीट गहरी और 108 फुट लम्बी सुरंग खोदी, जो दो सुरक्षा दीवारों से होती हुई जेल के क्षेत्र से 20 मीटर दूरी निकलती थी. फिर एक दिन हवारा और उसके तीनों साथ जेल से निकल कर गायब हुए और दोबारा कभी नहीं दिखे.

3. बेतिया जेल के 8 कैदी

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बात अगस्त 2002 की है और घटना बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया जेल की. 8 कैदी थे, जिनपर हत्या के अलावा बाकी सारे मुकदमे दर्ज थे. उनके भागने में उनकी समझदारी से ज़्यादा जेल प्रशासन की लापरवाही काम आई. इनके जेल से भागने की कहानी बहुत हद तक गैंग्स ऑफ़ वासेपुर की तरह है. इन्होंने जेल की सलाखें आरी में ग्रीज़ लगा कर काटीं. फिर जेल के बाहर छुपने के लिए एक फुट की खायी खोदी और कूद गये. चूंकि उनमें से एक दीवार पर चढ़ नहीं पाया, इसलिए वो पकड़ा गया.

4. चार्ल्स शोभराज

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जेल से भागने वालों की ये लिस्ट चार्ल्स शोभराज के नाम के बिना अधूरी लगती है. चार्ल्स का नाम दुनिया भर के ठगों में लिया जाता है. लेकिन चार्ल्स बस ठगी तक ही नहीं, इसमें भारत, नेपाल और थाईलैंड में तकरीबन 12 लोगों की हत्या की. अब उसके जेल से भागने की कहानी सुनिए. शोभराज को 18 साल की सज़ा मिली थी, जो वो तिहाड़ में काट रहा था. भागने के लिए वो सिरिंज से अपना खून निकाल कर पी गया, ताकि सबको लगे कि उसे अल्सर है. फिर जब उसे डॉक्टर्स के पास ले जाया गया, तो वहां से वो रफू-चक्कर हो गया. हालांकि कुछ ही दिनों में वो पकड़ा भी गया. एक बार वो अपने एक स्मग्लर दोस्त डेविड की मदद से भगा, उसने फलों के बहाने डेविड से नशे की दवाइयां मंगवाई और सिक्योरिटी वालों को सुंघा कर भाग निकला. जेल से कैसे भागें, इस पर चार्ल्स एक किताब लिख सकता है.

5. नटवरलाल

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ताजमहल और लालकिला जैसी धरोहरों को बेचने वाले भारत के सबसे शातिर ठग नटवरलाल के बिना ये लिस्ट अधूरी है. 1912 में बिहार के सिवान जिले में जन्मे नटवरलाल उर्फ़ मिथलेश कुमार श्रीवास्तव के ठगी के कई किस्से मशहूर हैं. बात 1996 की है नटवरलाल इतना बूढ़ा हो गया था कि जेल तोड़ कर भाग सकने में समर्थ था. इसलिए उसने बीमारी का बहाना बना कर जेल अधिकारियों से अस्पताल ले जाने को कहा. उसकी उम्र को देख कर जेल वाले मान गये. उस वक़्त नटवर कानपुर जेल में था, उसे एम्स भेजा गया. चूंकि वो बहुत बूढ़ा हो चुका था, इसलिए उसके साथ बस 2 कांस्टेबल भेजे गये. नई दिल्ली स्टेशन पर उसे वहां एक सफाई वाले के हवाले छोड़ कर दोनों कांस्टेबल पान खाने चले गये. नटवरलाल ने मौके की नज़ाकत को देखते हुए सफाई वाले से चाय लाने को कहा. जब तक वो वापस आता, तब तक नटवरलाल गायब हो चुका था.

तो ये थे जेल की सुरक्षा को ठेंगा दिखा कर भाग निकलने वाले शातिर अपराधी. कैसा लगा आपको ये आर्टिकल? इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें.