सोशल मीडिया के ज़माने में हमें किसी भी चीज़ के बारे में जानना हो, तो गूगल पर एक सेकेंड के अंदर उसकी पूरी जानकारी हमारे सामने होती है. अगर किसी से कुछ पूछो, तो वो यही कहता है कि गूगल कर ले न यार. तो इसका मतलब ये हुआ कि इस दुनिया की कोई भी जानकारी चाहिए, तो बस गूगल करो और जवाब ले लो. गूगल ने लोगों के बीच अपनी ऐसी साख़ बना ली है कि हम उसकी हर बात पर भरोसा कर लेते हैं. लेकिन इसके साथ ही सवाल ये भी उठता है कि क्या गूगल से हमें जो भी जानकारी मिलती है वो 100 प्रतिशत सही होती है?

Source: indianexpress

इसको लेकर भी कई लोगों के भिन्न-भिन्न मत हो सकते हैं. जो लोग अब भी सोशल मीडया से जुड़ नहीं पाए हैं, वो आज भी किसी जानकारी के लिए पुरानी किताबों का सहारा लेते हैं. लेकिन जब बात प्रमाणिकता की आती है, तो सौ फ़ीसदी भरोसा हम गूगल पर भी नहीं कर सकते. भले ही गूगल अपने कंटेंट की प्रमाणिकता की लाख दलीलें ही क्यों न दे दे. लेकिन सच तो ये है कि कई बार ऐसा होता कि हम गूगल पर जिस किसी के बारे में भी जानकारी चाहते हैं हिंदी और इंग्लिश में उसकी जानकारी अलग-अलग होती है. क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि गूगल से मिली जानकारी ग़लत साबित हुई हो?

आईये जानते हैं ऐसा कब-कब होता है, जब गूगल आपको ग़लत जानकारी देता है?

1. गूगल मैप अकसर ग़लत लोकेशन दिखाता है, जाना कहीं होता है और पहुंच कहीं जाते हैं.

Source: wired

2. अगर आप किसी दो जगहों के बीच की दूरी किमी में जानना चाहते हैं, तो वो भी ग़लत दिखाई जाती है.

Source: technorms

3. किसी जगह का पता ढूंढना हो, तो वो भी सही लोकेशन पर नहीं मिल पाता है.

Source: irjci

4. गूगल पुराने और नए एड्रेस को समय के साथ अपडेट नहीं करता है.

5. किसी शब्द विशेष का हिंदी या इंग्लिश मीनिंग जानना हो, तो जवाब कुछ और ही मिलता है.

Source: deutschseite

6. भारत के पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरी की मरणतिथि हिंदी और इंग्लिश में अलग-अलग लिखी गयी है.

Source: wikipedia

7. बॉलीवुड स्टार इरफ़ान खान की जन्मतिथि भी दोनों जगह अलग-अलग दिखाई गयी है. ऐसे ही कई लोग होंगे जिनकी डेट ऑफ़ बर्थ ग़लत बताता है गूगल.

Source: wikipedia

8. गूगल का एडिट ऑप्शन सिक्योरिटी लेस है, कोई भी इसके साथ छेड़खानी कर सकता है.

Source: theportcitynews

भारत में आज भी ज़्यादातर काम हिंदी में ही होते हैं. गूगल हिंदी और गूगल इंग्लिश में एक ही व्यक्ति की जानकारी अलग-अलग होती हैं. लेकिन लोगों को गूगल पर इतना ज़्यादा भरोसा होता है कि वो ग़लत को सही मान बैठते हैं. क्या ये गूगल की जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वो लोगों को दोनों भाषा में सही जानकारी उपलब्ध कराए?