एक समय में कश्मीर अपनी ख़ूबसूरती के लिए दुनियाभर के पर्यटकों की पहली पसंद हुआ करता था. आज वक़्त बदल चुका है, वो ख़ूबसूरत कश्मीर अब पहले जैसा नहीं रहा. पिछले कुछ दशकों से कश्मीर के बारे में टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक कुछ न कुछ सुनने को मिलता ही रहता है. कश्मीर को आज लोग आतंकवाद, पत्थरबाज़ी, अराजकता और कर्फ़्यू जैसी गतिविधियों के लिए जानते हैं. लेकिन इसी कश्मीर का एक दूसरा चेहरा भी है, जो सुकून भरा है और यहां के लोगों को आज़ादी से जीने मौका देता है.

आज हम बात करने जा रहे हैं कश्मीर के गुरेज़ वैली की. ये ख़ूबसूरत वैली पहले वाले कश्मीर की याद ताज़ा करती है. भले ही इस घाटी के आस-पास के इलाक़े आतंकवाद से प्रभावित हों, लेकिन गुरेज़ वैली के लोग शांति और ख़ुशहाली के साथ जी रहे हैं. पिछले कई सालों से ये घाटी अपनी ख़ूबसूरती से पर्यटकों को ख़ूब आकर्षित कर रही है. हरे-भरे पहाड़, बर्फ़ से ढकी चोटियां, दूर-दूर तक फैले घास के हरे मैदान और शांत वातावरण यहां के लोगों को सुकून से जीने की आज़ादी देता है.

कश्मीर के दुर्गम इलाक़े में फैली गुरेज़ वैली आज अपनी ख़ूबसूरती के कारण पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रही है.

श्रीनगर से क़रीब 121 किमी दूर गुरेज़ वैली तक आतंकवाद प्रभावित बांदीपोरा होते हुए पहुंचा जा सकता है. क़रीब छः घंटे की ये यात्रा आपको असल कश्मीर के दर्शन कराएगी. श्रीनगर से गुरेज़ वैली पहुंचने तक आप अपनी इस यात्रा के दौरान आप खेत, नदी, झरने, पहाड़, मैदान और हिमालय के शानदार नज़ारों का आनंद ले चुके होंगे. इस दौरान जब आप राज़धान पास पहुंचते हैं तो 3,500 मीटर की ऊंचाई पर होंगे.

ख़ूबसूरत नज़रों के बीच आप सड़क किनारे बने छोटे-छोटे मैगी पॉइंट पर चाय और मैगी के अनोखे कॉम्बिनेशन का मज़ा ले सकते हैं. भूख तेज़ हो तो आप सड़क किनारे बने किसी ढाबे में कश्मीरी खाने का लुफ़्त भी उठा सकते हैं. ख़ासकर फ़्राइड ऐग के साथ कश्मीरी रोटी का आनंद लेना न भूलें.

ये पूरा इलाक़ा भारतीय सेना के नियंत्रण में है. इस इलाक़े में सेना के जवान दिन-रात ड्यूटी पर तैनात रहते हैं. इतनी कठिन परिस्तिथियों में काम करने के बावजूद जब चेकपोस्ट पर आप उन्हें अपनी आईडी दिखाएंगे, तो वो अच्छी सी स्माइल के साथ आपको आगे जाने की अनुमति देंगे. उस वक़्त आप ख़ुद को उन्हें सैल्यूट करने से रोक नहीं पाएंगे. इस दौरान आप इसी तरह कई चेकपोस्ट पॉइंट से होते हुए गुरेज़ वैली पहुंचेंगे. गुरेज़ वैली पहुंचने पर आपको एहसास होगा कि ये जगह वाक़ई में कितनी ख़ूबसूरत है.

जब ये नदी भारत से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश करती है, तो वहां इसे नीलम नदी कहा जाता है.

1- कहां रुकें

अगर आप भी गुरेज़ वैली की सैर पर जाना चाहते हैं, तो यहां के इस ख़ूबसूरत रेस्ट हॉउस में रात बिता सकते हैं. किशन गंगा नदी के किनारे स्थित इस रेस्ट हॉउस के ठीक पीछे कश्मीरी कवियत्री हब्बा ख़ातून के नाम से मशहूर 'हब्बा ख़ातून पर्वत' है. इस घाटी के चारों ओर फैले घने जंगलों में आपको Snow Leopard और Himalayan Brown Bear दिख जायेंगे. अगर आपको मछली पकड़ने का शौक है, तो किशन गंगा नदी पर इसका आनंद ले सकते हैं. इस घाटी की सुंदरता का असली मज़ा लेना है, तो पैदल यात्रा करना बेहतर रहेगा ताकि इस क्षेत्र को आप अच्छे से एक्सप्लोर कर सकें.

2- क्या खायें

बेहद दूर होने के चलते गुरेज़ वैली कम ही पर्यटक जा पाते हैं इसलिए यहां रहने और खाने की कुछ ही जगहें हैं. वैसे तो कश्मीर के कई सारे स्वादिष्ट व्यंजन फ़ेमस हैं, लेकिन यहां का रिश्ता और चावल आपको एक अलग ही स्वाद के दर्शन कराएगा. कश्मीरी बिरयानी यहां की पहचान है इसे भी ट्राय कर सकते हैं.

गुरेज़ वैली में मौसम चाहे ठण्ड का हो या गर्मी का कश्मीरी ग्रीन टी और कहवा की एक घूंट आपकी सारी थकान चुटकी में गायब कर देगी. यहां के लोग बेहद सीधे-सादे होते हैं वो आपको कहवा पीने अपने घरों में आमंत्रित भी करते हैं.

3- कब जायें

गुरेज़ वैली जाना है तो जून से लेकर सितंबर तक का समय सबसे बेहतर रहेगा. इस समय यहां का मौसम बेहद शानदार होता है और चारों ओर हरे-भरे पहाड़ नज़र आएंगे. जबकि बाकि समय में इस इलाक़े में भारी बर्फ़ बारी होती है जिससे कि इस घाटी का संपर्क अन्य जगहों से पूरी तरह से काट जाता है.

4- कैसे जायें

हवाई मार्ग

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गुरेज़ वैली से सबसे क़रीबी हवाई अड्डा श्रीनगर एयरपोर्ट है. श्रीनगर से प्राइवेट कैब या फिर लोकल ट्रांसपोर्ट का सहारा लेकर गुरेज़ वैली पहुंचा जा सकता है. श्रीनगर से गुरेज़ वैली की दूरी 140 किमी दूर है प्राइवेट कैब से जाने पर 3 से 4 हज़ार रुपये के आसपास ख़र्च होंगे.

सड़क मार्ग

श्रीनगर के बटमालू बस स्टेशन से बांदीपोर तक के लिए शेयरिंग कैब और बसें आसानी से मिल जाएंगी. बांदीपोर पहुंचने के बाद आप गुरेज़ घाटी के लिए टैक्सी ले सकते हैं. दूर-दराज़ का क्षेत्र होने के चलते यहां के लिए सार्वजानिक बस सेवा उपलब्ध नहीं है.

रेलमार्ग

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निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी या उधमपुर रेलवे स्टेशन है. यहां से आप श्रीनगर पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा ले सकते हैं. 7 घंटे में आप श्रीनगर पहुंच जायेंगे. उसके बाद यहां से घाटी के लिए टैक्सी ले सकते हैं.

अब सोच क्या रहे हैं? अब सोचने का टाइम नहीं है बैग पैक कीजिये और इस ख़ूबसूरत घाटी की सैर पर निकल पड़िए.

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