कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति न्यूक्लियर युद्ध की भीषण परिस्थितियों में कैसे अपना बचाव करेगा? कई आतंकी संगठनों के निशाने पर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति, डॉनल्ड ट्रंप जब-जब अमेरिका से बाहर यात्रा कर रहे होते हैं, तो उनकी सुरक्षा का स्तर बेहद बढ़ा दिया जाता है.

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अपने आधिकारिक विमान, एयर फ़ोर्स वन में बैठकर जब-जब अमेरिकी राष्ट्रपति दूसरे देशों की यात्रा करते हैं, तो उन्हें हमेशा चार E-4B बोइंग विमान फ़ॉलो कर रहे होते हैं. ये सभी विमान, किसी भी आतंकवादी हमले या न्यूक्लियर हमले के दौरान अमेरिकी प्रेजीडेंट के लिए फ्लाइंग पेंटागन की तरह काम करेंगे. अमेरिका पर अगर कोई देश युद्ध का ऐलान करता है, तो भी इन विमानों का इस्तेमाल किया जाएगा.

ये सभी विमान बोइंग 747 हैं, जिन्हें काफ़ी हद तक युद्ध की परिस्थितियों के लिए बनाया गया है. इनमें खास उपकरणों के अलावा, मिलिट्री विशेषज्ञों और सूचना सहायकों की भी सुविधा मौजूद होगी.

इन विमानों में फ्लाइट के अंदर ही रिफ्यूल करने की सुविधा भी मौजूद होगी. ये विमान हवा में 35.4 घंटों तक ऑपरेशनल रह सकते हैं.

किसी भी न्यूक्लियर युद्ध या राष्ट्रीय इमरजेंसी की स्थिति में ये विमान अमेरिकी डिफ़ेस सेकेट्री, जॉइन्ट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और खुद अमेरिका के प्रेजीडेंट के लिए कमांड सेंटर का काम करेंगे.

इन विमानों को 70 के दशक से ही अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है. शीत यु्द्ध के दौरान इन विमानों का इस्तेमाल किया गया था. ये विमान किसी भी समय, किसी से भी संपर्क साध सकते हैं. न्यूक्लियर विस्फ़ोट के बाद निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स से बचाव के लिए भी उपाय किए गए हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप के अमेरिका में होने की स्थिति में एक E-4B विमान 24 घंटे चालू रहेगा. इमरजेंसी की परिस्थितियों या, राष्ट्रपति से तुरंत मुलाकात जैसी परिस्थितियों के लिए ही इस विमान का एक इंजन पूरे दिन चलता रहता है.

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तकनीकी तौर पर अगर देखा जाए, तो इन विमानों को अमेरिकी सरकार ने सीक्रेट नहीं रखा है लेकिन इनके बारे में चर्चा भी बेहद कम होती है. यहां तक कि एयर फ़ोर्स सार्वजनिक तौर पर इनमें से कुछ विमानों को खरीदने से इंकार भी कर चुका है.

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