आपकी दिली तमन्ना क्या है? स्विट्ज़रलैंड में एक पॉश घर और गाड़ी? फ़िल्म स्टार्स जितनी दौलत और शौहरत या फ़िर अपनी मौत के बारे में जानकारी? ताकि मरने से पहले आप अपनी सारी ख़्वाहिशें पूरी कर सकें?

आपको भले ही बाकी सब मिले न मिले, लेकिन आपको अपनी मौत के बारे में संदेशा ज़रूर मिलता है. यमराज हर शख़्स को मृत्यु से पहले संदेश ज़रूर भेजते हैं.

मौत के दूत यानि भगवान यमराज को दक्षिण में लोकपाल भी कहा जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, वो पहले एेसे मानव थे जो परलोक सिधार गए थे, लेकिन अपनी श्रेष्ठता के कारण भगवान शिव ने उन्हें मृत्यु का दूत बना दिया था.

अमृत और यमराज की कहानी

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यमुना के पास एक गांव था जहां अमृत नाम का शख़्स रहता था. वह मौत से बेहद डरता था इसलिए वह यमराज को खुश करने के लिए कड़ी तपस्या में लीन रहता था. उसका मकसद था कि वह यमराज को खुश कर अपनी मौत से दूरी बनाए रखेगा.

अमृत के इरादों के बारे में यमराज जानते थे, हालांकि वह उसकी भक्ति से बेहद प्रभावित थे. उन्होंने कहा कि 'मुझसे लोग तभी मिल पाते हैं, जब उनकी मौत निश्चित होती है, लेकिन तुमने कड़ी प्रतिज्ञा की है. मुझे अपनी शक्तियों के ज़रिए ये अंदाज़ा हो गया है कि तुम मुझे दोस्त बनाना चाहते हो. मृत्यु एक शाश्वत सत्य है, लेकिन फ़िर भी मैं तुम्हारी एक मांग पूरी कर सकता हूं'.

इसके जवाब में अमृत ने कहा कि अगर मृत्यु निश्चित ही है तो मुझे एक वरदान दीजिए कि कम से कम मुझे अपनी मौत का संदेशा काफ़ी पहले पहुंच जाए, ताकि मरने से पहले मैं अपने परिवार के लिए उचित तैयारियां कर सकूं और भगवान की भक्ति में लीन होकर अपने अगले जन्म को बेहतर बना सकूं.

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यमराज ने अमृत को वादा किया कि वे उसकी मौत से पहले उन्हें संदेश ज़रूर भेजेंगे. यमराज ने इसके साथ ही कहा कि जैसे ही तुम्हें ये संदेश मिले, तुम अपने बाकी काम शीघ्र ख़त्म कर लेना.

कई साल बीत गए और अमृत अब भोग विलास में लिप्त रहने लगा. अमृत को विश्नास था कि यमराज उसकी मौत से पहले उसे संदेश ज़रूर भेजेंगे. उसने तपस्या और पूजा पाठ करना भी छोड़ दिया था.

अमृत को मरने का कोई डर नहीं था. यही कारण था कि उसके भोग विलासों में कोई कमी नहीं आई थी. उसके बाल सफ़ेद होने लगे थे. इस सबके बावजूद उसके पास यमराज का कोई संदेश नहीं पहुंचा.

कुछ और साल बीते, अमृत के सारे दांत गिर चुके थे, लेकिन वह अब भी खुश था क्योंकि उसके पास कोई संदेश नहीं आया. अमृत अब बूढ़ा होने लगा था. उसे आंखों से भी कम दिखने लगा था, लेकिन उसे संतोष था कि यमराज का कोई संदेश उसके पास नहीं पहुंचा है.

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फिर एक दिन अचानक अपनी नींद में वह यमदूतों को देखकर चौंक गया. अमृत की मौत हो चुकी थी. हैरान-परेशान होकर वह अपने घर में यमराज के संदेश को ढूंढ़ने लगा, लेकिन उसे कहीं भी कोई संदेश या पत्र नहीं मिला. वह यमराज से बेहद खफ़ा था. अमृत ने यमलोक पहुंच कर यमराज से कहा, 'तुमने मुझे धोखा दिया है. तुमने मेरी मौत से पहले कोई संदेश नहीं भेजा. क्या तुम्हें अपने धोखे पर कोई पछतावा नहीं?'

यमराज ने कहा कि 'तुमने आध्यात्मिक और धार्मिक ज़िंदगी से किनारा कर लिया. भोग-विलास ने तुम्हें अंधा कर दिया. मैंने तुम्हें एक नहीं, बल्कि चार संदेश भेजे थे'. अमृत ने हैरानी से पूछा 'चार संदेश?' 'लेकिन मेरे पास तो एक भी नहीं पहुंचा. शायद डाकिया ने उसे गलत जगह भेज दिया होगा'.

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इसके जवाब में यमराज ने कहा, 'नहीं वो तुम्हारे पास ही आए थे. तुमने भले ही चालाकी दिखाने की कोशिश की, लेकिन तुम मूर्ख थे जो ये समझ रहे थे कि मैं कागज़-कलम लेकर तुम्हारे लिए मौत की चेतावनी लिखूंगा. तुम्हारा शरीर ही वो कागज़ था. तुम्हारे शरीर में होने वाले बदलाव ही मेरी कलम थी और बीतता हुआ समय ही मेरा डाकिया था. तुम्हारे बाल पके, आंखों की रोशनी जाती रही, सारे दांत गिर गए, यहां तक की तुमसे चलना दूभर हो गया. क्या ये चार संदेश तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं थे?'

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जब हम जवान और स्वस्थ होते हैं, तब हमें यमराज के किसी पत्र की फ़्रिक नहीं होती. समय और मौत को कोई टाल नहीं सकता, ऐसे में बेहतर है कि अपने डाकिया रूपी समय की सुनी जाए. अगर आप बुढ़ापे तक पहुंच रहे हैं तो बेहतर स्वास्थ्य के साथ ही आप अपने जीवन को लंबा और खुशहाल बना सकते हैं.

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