अंडमान निकोबार द्वीप समुह के सेंटीनल द्वीप पर आम लोगों का जाना मना है. वजह वहां पर रहने वाली Jarawa नाम की जनजाति, जो बाकी दुनिया से कटी हुई है. ये जनजाती अाम लोगों से दूरी बनाए रखती है और साथ ही किसी को अपने इलाके में आने नहीं देती. इन्हीं आदिवासियों ने एक अमेरिकी नागरिक की हत्या कर दी है.

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पुलिस का कहना है कि 27 साल के अमेरिकी नागरिक जॉन चाउ स्थानीय मछुआरों के साथ वहां पहुंचे थे. लेकिन वहां के आदिवासियों ने तीर मार कर उसकी हत्या कर दी. नॉर्थ सेंटीनल नाम के इस द्वीप पर जाना भारत सरकार के आदेशानुसार बैन है. कोस्ट गार्ड समय-समय पर लोगों को यहां न जाने की वॉर्निंग देते रहते हैं लेकिन चाउ इस चेतावनी को नज़र अंदाज कर वहां गए.

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स्थानीय मछुआरे जिनके साथ चाउ गए थे, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बताया कि चाउ उन आदिवासियों को क्रिश्चियन धर्म अपनाने के लिए मनाने गए थे. उनके मना करने पर भी वो एक छोटी नाव में उस द्वीप की तरफ बढ़ गए थे. जितने भी लोगों ने नॉर्थ सेंटिनल द्वीप के बारे में पढ़ा है, उन्हें ये पता होगा कि यहां रहने वाली जनजाति बाहरी लोगों से कोई संबंध नहीं रखती.

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ये जनजाति संरक्षित जनजातियों में आती है. इनसे आज तक कम ही लोग संपर्क कर पाए हैं और इससे आगे के प्रयास हमेशा विफ़ल ही हुए हैं. कहा जाता है कि इस जनजाति के लोगों कि संख्या सिर्फ़ 46 है और किसी भी बाहरी व्यक्ति का आगमन ये अटैक की तरह देखते हैं.

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बावजूद इसके चाउ वहां गए. चाउ ने अमेरिका में भी अपने परिवार को भी कह दिया था कि अगर वो वापस नहीं आते या मर जाते हैं तो उनसे नाराज़ ना हों. वो अपने साथ फ़ुटबॉल, सेफ़्टी पिन जैसी कुछ चीज़ें आदिवासियों को उपहार के रूप में ले गए थे. जैसे ही चाउ किनारे पर पहुंचने लगे आदिवासियों ने उन पर तीर से हमला कर दिया और बाद में उनके गले में रस्सी डाल कर घसीटते हुए अपने साथ ले गए.

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चाउ की ये हालत देखकर मछुवारे वहां से भाग खड़े हुए. इसके बाद उन्होंने चाउ के एक दोस्त को इस पूरी घटना के बारे में बताया. उसी ने पुलिस में शिकायत की और चाउ के घरवालों को इन्फॉर्म किया. फ़िलहाल पुलिस ने मछुआरों के खिलाफ़ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है क्योंकि इस संरक्षित जनजाति को चाउ की हत्या का ज़िम्मेदार नहीं मान सकते.

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उनके क्षेत्र में जाना पहले से ही प्रतिबंधित है, इसलिए उनके द्वारा की गई हत्या के लिए भी उन मछुआरों को ज़िम्मेदार माना जाएगा, जो चाउ को वहां ले गए थे. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दीपक यादव ने कहा कि, ‘इस मामले में जांच जारी है. चाउ ने हाल के दिनों में कई बार अंडमान का दौरा किया था और स्थानीय मछुआरों को पैसे दे कर आखिरकार इस इलाके में जाने में सफ़ल हुआ.’

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मछुआरों के बयान के मुताबिक आदिवासियों ने चाउ की लाश को समुद्र किनारे रेत में दबा दिया था. उसकी लाश को लेने कोस्ट गार्ड की एक टीम गई थी, लेकिन आदिवासियों के संभावित हमला किए जाने के चलते वो अपने काम में सफ़ल नहीं हो पाए.

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