कहानी भारत के उस नवाब की, जिसने अपने कुत्ते की शादी में ख़र्च कर दिए थे 10 करोड़ रुपये

Maahi

भारत में राजशाही ख़त्म हुये 70 साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन आज भी दुनिया के कई देशों में राजशाही चलती है. भारत ने सन 1950 में भारतीय संविधान की घोषणा के साथ ही ब्रिटिश राजशाही के तहत अपनी राजशाही को समाप्त कर दिया था. हम बचपन से ही ब्रिटिशकाल काल के दौरान भारत के राजा महाराजाओं से जुड़े कई क़िस्से और कहानियां सुनते आ रहे हैं. आज जब हम देश के राजा महाराजाओं की नवाबी के क़िस्से पढ़ते हैं तो लगता है उस दौर में प्रजा कितनी ग़रीब और राजा महाराजा कितने अमीर थे. इनके कुछ क़िस्से तो इतने अतरंगी हमें उन पर यकीन कर पाना भी मुश्किल हो जाता है.  

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भारत के राजा-महाराजा हमेशा से ही अपनी नवाबी जीवनशैली के लिए चर्चा का विषय रहे हैं. कई राजा-महाराजा अपने अजीबो-ग़रीब शौक के लिए भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर थे. आज इनके शौक और उसके लिए खर्च किए जाने वाले पैसों के बारे में जानकर हर कोई दंग रह जाता था. ब्रिटिशकाल के दौरान कोई राजा डायमंड को पेपरवेट के रूप में इस्तेमाल करता था तो किसी ने रोल्स रॉयस कार कूड़ा फेंकने के लिए इस्तेमाल की थी.  

 Nawab of Junagarh Mahabat Khan

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आज हम आपको भारत के एक ऐसे ही राजा की कहानी बताने जा रहे हैं, जो अपनी नवाबी जीवनशैली के साथ-साथ एक अजीब तरह के ‘शौक’ के लिए भी ख़ासा मशहूर था. हम बात कर रहे हैं जूनागढ़ के नवाब महाबत ख़ान (Nawab Mahabat Khan) की. महाबत को ‘कुत्तों से मोहब्बत का शौक’ था. शौक भी ऐसा कि उसने अपने पालतू कुत्तों के लिए अपनी बीवी व बच्चों तक को भी छोड़ दिया था. कुत्तों के लिए उसका जूनून इस कदर था कि उसने अपने सबसे प्यारे कुत्ते की शादी में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिये थे.

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इतिहासकार परिमल रूपाणी के मुताबिक़, जूनागढ़ का नवाब महाबत ख़ान कुत्तों का शौकीन था. उसके पास तक़रीबन 800 पालतू कुत्ते थे. उस वक्त वो अपने इन पालतू कुत्तों 800 से लेकर 1000 रुपये महीने तक का खर्च करता था. इन कुत्तों की देखभाल के लिए उन्होंने अलग-अलग कमरे, नौकर और टेलीफ़ोन की व्यवस्था भी कर रखी थी. अगर किसी कुत्ते की जान चली जाती, तो उसको तमाम रस्मों-रिवाज़ के साथ कब्रिस्तान में दफनाया जाता और उसकी शव यात्रा में शोक संगीत भी बजता था.

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‘रोशना’ थी महाबत ख़ान की जान 

नवाब महाबत ख़ान के पास वैसे तो सैकड़ों कुत्ते थे, लेकिन उन्हें फ़ीमेल डॉगी ‘रोशना’ से मोहब्बत थी. मोहब्बत भी ऐसी कि नवाब साहब उसे अपनी बेटी से कम नहीं मानते थे. यहां तक कि महाबत ख़ान ने ‘रोशना’ की शादी बड़ी धूमधाम से अपने दूसरे डॉग ‘बॉबी’ से कराई थी. ‘रोशना’ और ‘बॉबी’ की शादी कोई आम शादी नहीं थी. इस शादी में शामिल होने के लिए नवाब साहब ने तमाम राजा-महाराजा समेत वायसराय को आमंत्रित किया था. शादी में 1.5 लाख से अधिक मेहमान शामिल हुए थे. इस शादी में नवाब ने क़रीब 9 लाख रुपये (आज के 10 करोड़ रुपये के बराबर) खर्च किये थे. 

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‘रोशना’ को पहनाये थे सोने के हार

मशहूर इतिहासकार डॉमिनिक लॉपियर और लैरी कॉलिन्स ने अपनी किताब ‘फ़्रीडम एट मिडनाइट’ में भी नवाब महाबत ख़ान के इस शौक का ज़िक्र किया है. किताब में बताया गया है कि नवाब महाबत ख़ान ने इस शादी में ‘वायसराय’ को भी आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया था. ‘रोशना’ को शादी के दौरान सोने के हार, ब्रेसलेट और महंगे कपड़े पहनाए गए थे. इतना ही नहीं ‘मिलिट्री बैंड’ के साथ ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ से 250 कुत्तों ने रेलवे स्टेशन पर इनका स्वागत भी किया था. 

बंगले बनवाने का भी बहुत शौक भी था 

नवाब महाबत ख़ान को इसके अलावा ‘बंगले बनवाने’ का भी बहुत शौक था. जब वो भारत छोड़कर जाने लगा तो उसने अपनी 4 बेगमों को भारत में ही छोड़ दिया था. ताकि वो अपने कुत्तों को अपने साथ पाकिस्तान ले जा सके. महाबत ख़ान ने इसके बाद अपनी आगे की ज़िंदगी पाकिस्तान में ही बिताई. इस दौरान उसने पाकिस्तान के कराची शहर में कई इमारतें बनवाई, जो आज भी काफ़ी मशहूर हैं.  

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जूनागढ़ का इतिहास

आज़ाद भारत से पहले ‘जूनागढ़’ एक रियासत हुआ करती थी, जिसके नवाब, महाबत ख़ान हुआ करते थे. जूनागढ़ उस समय हैदराबाद के बाद दूसरे नंबर का सबसे धनवान राज्य था. 15 अगस्त 1947 को भारत की आज़ादी के बाद रियासतों का एकीकरण कर दिया गया. इसका ज़िम्मा उस वक्त के गृहमंत्री सरदार पटेल ने उठाया था. आज़ादी के बाद महाबत ख़ान अपनी पत्नी भोपाल बेगम के कहने पर ‘जूनागढ़’ को पाकिस्तान में शामिल करवाना चाहता था, लेकिन जूनागढ़ के लोगों ने पाकिस्तान में शामिल होने से इंकार कर दिया था. तब ‘जूनागढ़’ भारत में शामिल होगा या पाकिस्तान में, इसके लिए ‘जनमत संग्रह’ करवाया गया.

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20 फ़रवरी 1948 को ‘जनमत संग्रह’ के लिए वोटिंग हुई. इस दौरान 1 लाख 90 हज़ार 688 लोगों ने ‘लाल’ और ‘हरे’ रंग के बैलेट बॉक्स में अपने-अपने वोट डाले. लाल रंग भारत के लिए था, जबकि हरा रंग पाकिस्तान के लिए था. वोटिंग में केवल 91 लोगों ने पाकिस्तान के पक्ष में वोट दिया, जबकि 1 लाख 9 हज़ार 688 लोगों ने भारत में रहने के पक्ष में वोट दिया. नवाब महाबत ख़ान नतीज़े आने से पहले ही पाकिस्तान भाग गया था और फिर कभी वापस लौटकर नहीं आया.

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