भारत की आज़ादी के लिए 1757 से 1947 के बीच कई तरह के प्रयत्न किये गए, जिनमें स्वतंत्रता का सपना अपनी आंखों में संजोये क्रान्तिकारियों और शहीदों की कुर्बानियां देश के लिए प्रेरणादायी सिद्ध हुईं. भारत की स्वतंत्रता के लिये देशवासियों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध दो प्रकार के आन्दोलन हुए थे - एक अहिंसा आन्दोलन और दूसरा सशस्त्र क्रान्तिकारी आन्दोलन. क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है. भारत की धरती के प्रति जितनी भक्ति और मातृ-भावना उस युग में थी, उतनी कभी नहीं रही. मातृभूमि की सेवा और उसके लिए मर-मिटने की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी.

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अंग्रेजों की गुलामी से देश को आज़ाद कराने के लिए देशभक्तों ने तरह-तरह के आंदोलन जैसे 'असहयोग आंदोलन', 'सत्याग्रह आंदोलन', 'नमक आंदोलन' (दांडी मार्च), 'अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन', 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन' आदि किये. लेकिन क्या आपको पता है कि दांडी मार्च के साथ ही एक और आंदोलन देश में चल रहा था, जिसे वेदरनयम मार्च का नाम दिया गया था.

दांडी मार्च

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दांडी मार्च के बारे में तो आप सभी जानते होंगे. इस मार्च का मतलब उस पैदल यात्रा से है, जो महात्मा गांधी और उनके स्वयं सेवकों द्वारा 12 मार्च, 1930 को शुरू की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य था- "अंग्रेज़ों द्वारा बनाये गए 'नमक क़ानून को तोड़ना'." गांधी जी ने अपने 78 स्वयंसेवकों, जिनमें वेब मिलर भी एक था, के साथ साबरमती आश्रम से 358 कि.मी. दूर स्थित दांडी के लिए प्रस्थान किया. लगभग 24 दिनों बाद 6 अप्रैल, 1930 को दांडी पहुंचकर उन्होंने समुद्र तट पर नमक क़ानून को तोड़ा.

आइये अब जानते हैं 'वेदरनयम मार्च' के बारे में:

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मद्रास प्रेसीडेंसी के सालेम जिले के थोरापल्ली गांव में जन्मे चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जो एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, लेखक और वकील थे. राजगोपालाचारी तमिलनाडु कांग्रेस के प्रमुख नेता थे और बाद में तमिलनाडु कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी बन गए. 1930 में जब गुजरात में गांधी जी ने नमक सत्याग्रह के दौरान दांडी मार्च किया, उसी दौरान चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने भी नागपट्टनम के पास 'वेदरनयम' में नमक कानून तोड़ा, जिसके कारण सरकार ने उन्हें जेल भेज दिया. राजगोपालाचारी के इस मार्च को 'वेदरनयम मार्च' कहते हैं.

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नमक क़ानून भारत के और भी कई भागों में तोड़ा गाया. सी. राजगोपालाचारी ने त्रिचनापल्ली से वेदारण्यम तक की यात्रा की. इसके अलावा असम में लोगों ने सिलहट से नोआखली तक की यात्रा की. 'वायकोम सत्याग्रह' के नेताओं ने के. केलप्पन एवं टी. के. माधवन के साथ कालीकट से पयान्नूर तक की यात्रा की. इन सभी लोगों ने नमक क़ानून को तोड़ा. नमक क़ानून इसलिए तोड़ा जा रहा था, क्योंकि सरकार द्वारा 'नमक कर' बढ़ा दिया गया था, जिससे रोजमर्रा की ज़रूरत के लिए नमक की क़ीमत बढ़ गई थी.

ब्रिटिश सरकार पर इन आंदोलनों का क्या असर हुआ?

देश में जगह-जगह हो रहे आंदोलनों के कारण ब्रिटिश हुकूमत बुरी तरह से झल्ला गयी थी. इसी झल्लाहट में कई आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी भी हुई थी. उसी दौरान 5 मई, 1930 को गांधी जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

हम कहते हैं कि हम आज़ाद हैं, लेकिन ये आज़ादी बहुत मुश्किलों के बाद हमको मिली है और इस आज़ादी का हमको सम्मान करना चाहिए. साथ ही देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीदों का भी सम्मान करना चाहिए.

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