टेक्नोलॉजी के इस दौर में आज दुनिया के कई देशों की सेनाओं के पास में एक से बढ़कर एक ऑटोमैटिक हथियार हैं. इन हथियारों दम ये देश अपने दुश्मन को चंद मिनटों में ढेर कर देते हैं. दुनिया के अन्य देशों की तरह ही भारतीय सेना के पास भी ऐसे कई हथियार हैं.


आज हम आपको एक ऐसी जर्मन गन (बंदूक) के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आज भी ब्रह्मांड की सबसे बड़ी बंदूक के तौर पर जाना जाता है.

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ब्रह्मांड की इस सबसे बड़ी बंदूक का नाम Schwerer Gustav है. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन सेना ने इसका इस्तेमाल फ़्रांस और रूस के ख़िलाफ़ किया था. इसे रेल गन के नाम से भी जाना जाता है. ये आज भी टेक्नोलॉजी का एक अद्भुत उदाहरण है. मानव इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब ट्रेन के आकर की कोई बंदूक बनाई गई थी. इसकी सबसे ख़ास बात ये थी कि इसके आकार के कारण उड़ते हुए हवाई जहाज से भी इसे देखा जा सकता था.

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दरअसल, द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले एडोल्फ़ हिटलर (Adolf Hitler) को ऐसे हथियारों की आवश्यकता थी जो दुश्मन सेना को तहस-नहस कर दे. ऐसे में हिटलर ने रक्षा अनुसंधान पर विशेष रूप से ध्यान दिया और कुछ विशेष एवं उत्कृष्ट तकनीक वाले हथियार बनाए. इन्हीं हथियारों में से एक Schwerer Gustav बंदूक भी थी. सन 1937 में इसे बनाने का काम शुरू हुआ और 1941 में हिटलर ने इसे अपनी सेना में शामिल कर लिया. इसके आने से जर्मन सेना काफ़ी मज़बूत हो गयी थी. ऐसे में जर्मन आर्मी, वायुसेना और सबमरीन दस्ता ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस जैसे देशों पर भारी पड़ने लगी थी.

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Schwerer Gustav बंदूक को जर्मन तानाशाह हिटलर की Wehrmacht Army के प्रमुख हथियार के तौर पर भी जाना जाता है. ये बंदूक आकर में बेहद विशाल थी इसलिए इसे व्यापक रूप से प्रयोग करना बेहद कठिन था, लेकिन जब भी Schwerer Gustav का इस्तेमाल किया गया इसने दुश्मन पर कहर बरपाया. इसे चलाने के लिए 400 से 500 सैनिकों की आवश्यकता होती थी. इससे दिन भर में केवल 10 से 15 गोले ही दागना संभव हो पाता था.

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Schwerer Gustav बंदूक एक जर्मन 80-सेंटीमीटर रेलवे गन थी. सन 1940 के दशक में हिटलर ने इसे मुख्य रूप से रूगेनवाल्डे में फ़्रेंच ‘मैजिनॉट लाइन’ के मुख्य क़िलों को नष्ट करने के उद्देश्य से घेराबंदी तोपखाने के रूप में विकसित किया था. क़रीब 47.3 मीटर लंबी इस बंदूक की बैरल ही 32.5 मीटर लंबी थी, जबकि गोलियों क़रीब 12 फ़ीट लंबी हुआ करती थीं. इसे असेंबल करने में क़रीब 3 दिन लगते थे. बंदूक 48 डिग्री घूमकर 30 से 45 मिनट में 1 राउंड फ़ायर करती थी.

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हिटलर की सेना ने मुख्य रूप से फ्रांस और रूस की सेना के ख़िलाफ़ इसका इस्तेमाल किया था. Schwerer Gustav बंदूक की मारक क्षमता क़रीब 47 किलोमीटर की थी. ये बंदूक अपने किसी भी लक्ष्य को चंद मिनटों में ख़ाक में मिला दिया करती थी. अपनी पराजय की डर से हिटलर ने नष्ट करवा दिया था ताकि ये शत्रुओं के हाथ ना लग जाए और इस प्रकार से ये बंदूक इतिहास में समा गई.