उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत और चीन की सीमा से लगभग 24 किलोमीटर दूर देश के अंतिम गांव 'माणा' में चाय की एक छोटी-सी दुकान है. ये दुकान 'भारत की आखिरी चाय की दुकान' के नाम से प्रसिद्ध है. पर्यटक इस दुकान पर चाय की चुस्कियों का लुत्फ उठाने और फोटो खिंचवाने से खुद को रोक नहीं पाते हैं.

शायद ही कोई ऐसा पर्यटक होगा जो बद्रीनाथ धाम से 3 किलोमीटर आगे इस दुकान पर लगे ‘भारत की आखिरी चाय की दुकान’ के बोर्ड के सामने फोटो न खिंचवाता हो. इस बोर्ड पर अंग्रेजी और हिन्दी सहित 10 भारतीय भाषाओं में लिखा है ‘भारत की आखिरी चाय की दुकान में आपका हार्दिक स्वागत है'.

यह चाय की दुकान वेद-व्यास की गुफाओं के पास स्थित है. माना जाता है कि इन्हीं गुफाओं में वेद व्यास ने दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' की रचना की थी.

- इस दुकान पर चाय ही नहीं, बल्कि नूडल्स भी मिलते हैं.

- अब इससे बड़ा साक्ष्य क्या होगा जबकि SBI ने भी इसको भारत का आखिरी टी-स्टॉल बोल दिया है.

- और इसके पास ही है दुनिया की सबसे ऊंची Motorable Road

- इसके अलावा यहां दूसरे टी-स्टॉल भी हैं, लेकिन इंडिया से तिब्बत में प्रवेश करने से पहले केवल यही टी-स्टॉल है, जो सबके आकर्षण का केंद्र है.

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- उत्तराखंड सरकार ने माणा गांव को यहां की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के कारण ‘Tourism Village’ का दर्जा दिया है.

सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र चाय की यह दुकान चंद्रसिंह बड़वाल की है, जो लगभग पच्चीस साल से इस दुकान को चला रहे हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए यह दुकान खोली थी. समुद्र तल से 11 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित 'माणा' गांव साल के छह महीने बर्फ के से ढका रहता है.

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