Shankar

मैं पत्रों का आकार हूं, शायद... मैं पत्रकार हूं.

रात में मस्ती भरे ये Pubs दिन होते ही तब्दील हो जाते हैं ऑफ़िस में, लोगों को भा रहा है ये कॉन्सेप्ट

निर्भया के माता-पिता चाहते हैं कि साइंस म्यूज़ियम का नाम ‘निर्भया’ नहीं, बल्कि उसके असली नाम पर हो

Valentine’s Day था, बाराती भी थे, धूम-धाम से हुई शादी, लेकिन इंसान की नहीं, बल्कि गधे और गधी की

खुशख़बरी! अब महीने और हफ़्ते नहीं, बल्कि कुछ मिनटों में ही आपको मिल सकता है PAN कार्ड

ऐसे ही नहीं कहते, दुआओं में ताक़त होती है. अब इस मस्जिद से निकली दुआएं लौटेंगी बिजली के रूप में

पापा समोसे बेचते थे, खुद जागरण में जाकर गाती थी और आज बन गई है बॉलीवुड की दमदार आवाज़

ज़ुर्म चाहे कुछ भी हो, मगर महिलाओं की भीड़ द्वारा एक महिला को सरेआम निर्वस्र करना क्या जायज़ है?

फैन्स के लिए खुशख़बरी, 28 साल बाद दूरदर्शन चैनल पर फिर शुरू होगा शाहरुख खान का सीरियल ‘सर्कस’