म्यूज़िक इंडस्ट्री में येसुदास सिर्फ़ एक नाम नहीं हैं. अगर संगीत की कोई शक़्ल होती, तो वो उनके जैसी होती. उन्होंने अपने संगीत और आवाज़ से शब्दों में जान भर दी. 10 जनवरी 1940 को कैथोलिक ईसाई परिवार में जन्में येसुदास ने 5 साल की उम्र से कर्नाटक संगीत सीखना शुरू किया था. इनके पहले गुरू इनके पिता ऑगस्टीन थे. येसुदास अपने 55 साल के करियर में अबतक 60 हज़ार गाने गा चुके हैं.

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Source: deccanherald

इनके बेहतरीन और लाजवाब गानों के साथ-साथ इनके उत्कृष्ट करियर पर भी एक नज़र डाल लीजिए.

1. प्यारे पंछी बाहों में, हिंदुस्तानी (1996)

2. चांद अकेला जाये सखी री, आलाप (1977)

3. निन्ने निन्ने, रक्षाकुडु (तेलुगु, 1997)

4. तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है, सावन को आने दो (1979)

5. धीरे धीरे सुबह हुई, हैसियत (1984)

6. माता सरस्वती शारदा, आलाप (1972)

येसुदास को 4 नेशनल अवॉर्ड के साथ-साथ बेस्ट सिंगर का केरल स्टेट फ़िल्म अवॉर्ड 25 बार दिया जा चुका है. अगर इसमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिल नाडु और बंगाल राज्य के पुरस्कार मिला दिए जाएं तो ये रिकॉर्ड 43 हो जाएगा. उन्होंने बाकी प्रतिभावान लोगों को उनका हक़ दिलाने के लिए एक अनोखा कदम उठाया, जिसके तहत उन्होंने 1987 में राज्य सरकार से विनती कर ख़ुद को अवॉर्ड की रेस से दूर रखने को कहा.

7. मधुबन ख़ुशबू देता है, साजन बिना सुहागन (1978)

8. ओ भंवरे, दौड़ (1997)

9. ज़िद ना करो अब तो रुको, लहू के दो रंग (1979)

10. जब दीप जले आना, चितचोर (1976)

11. चांद जैसे मुखड़े पे बिंदिया सितारा, सावन को आने दो (1979)

12. कहां से आए बदरा, चश्म-ए-बद्दूर (1981)

येसुदास को पहला नेशनल अवॉर्ड 1972 में मलयालम फ़िल्म ‘अछनम बप्पयम’ के गाने ‘मनुष्यम‘ के लिए मिला था. म्यूज़िक में महारत हासिल कर चुके येसुदास ने अपने सीखने की प्रक्रिया को निरंतर चालू रखते हुए कोचीन के आर.एल.वी. म्यूज़िक अकैडमी में गणभूषणम कोर्स में एडमिशन लिया और 1960 में अच्छे नम्बरों के साथ पास किया.

13. श्याम रंग रंगा रे, अपने पराये (1980)

14. तुझे देखकर जग वाले पल, सावन को आने दो (1979)

15. कोई गाता, मैं सो जाता, आलाप (1977)

16. आ आ रे मितवा, आनंद महल (1972)

1961 में पहली बार फ़िल्म के लिए गाना गाने वाले येसुदास सोवियत संघ के साथ-साथ लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल और सिडनी के ओपेरा हाउस में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं.

येसुदास ने एन.टी. रामाराव, अमिताभ बच्चन, अमोल पालेकर, कमल हसन, रजनीकांत और संजीव कुमार सहित कई दिग्गज कलाकारों के लिए अपनी आवाज़ दी हैं.

17. आज से पहले आज से ज़्यादा, चितचोर (1976)

18. सुरमई अखियों में, सदमा (1983)

ग़ौरतलब है कि, अपनी बेहतरीन आवाज़ से उन्होंने समाज और कला के क्षेत्र में जो योगदान दिया उसके लिए उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से नवाज़ा जा चुका है. इसके अलावा 2017 में उन्हें नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाज़ा गया था. पूरे देश में सौहार्द और समानता की बात करने वाले येसुदास को 1999 में युनेस्को द्वारा सम्मानित किया गया था.

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