हिंदी सिनेमा हमेशा से ही ऐसी फ़िल्में बनाता आ रहा है, जिनसे लोगों को कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. शायद इसलिये ये भी कहा जाता है कि सिनेमा समाज को आईना दिखाने का काम करता है. पर हिंदी सिनेमा से ये उम्मीद हर फ़िल्म के लिये नहीं की जा सकती. कई बार फ़िल्मों के ज़रिये लोगों तक ग़लत मैसेज भी जाता है.

अगर बात की जाये रिलेशनशिप की, तो कई बार फ़िल्मों में इसे लेकर ग़लत दिखाया गया. ये भी कह सकते हैं कि रिलेशनशिप को लेकर समाज में ग़लत संदेश पहुंचाया गया.

जैसे इन फ़िल्म्स को ही ले लीजिये:

1. 'कबीर सिंह'

बीते साल शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी की फ़िल्म 'कबीर सिंह' ने ख़ूब सुर्खियां बटोरीं. ये फ़िल्म विवादों में रही, पर बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा कलेक्शन भी किया. फ़िल्म में कबीर सिंह को एक ज़िद्दी और सनक वाला आशिक दिखाया गया. यहां तक कि गुस्से में वो अपनी प्रेमिका पर हाथ तक उठा देता है. सवाल ये है कि क्या आज के ज़माने में आप इसे प्यार कह सकते हैं? वो भी ऐसा प्यार, जिसमें एक लड़का प्यार के लिये अपना जीवन और करियर तबाह कर लेता है.

Kabeer Singh
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2. 'डर'

सनी देओल, शाहरुख़ ख़ान और जूही चावला स्टारर ये फ़िल्म भी सुपरहिट साबित हुई थी. इस फ़िल्म में शाहरुख़ के किरदार को खू़ब सराहना भी मिली. हांलाकि, देखा जाये, तो ऐसे किरदारों को हमें जीवन में बढ़ावा नहीं देना चाहिये. अगर कोई लड़की आपसे प्यार नहीं करती है, तो उसकी 'न' की कद्र होनी चाहिये.

Darr
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3. 'कुछ-कुछ होता है'

रानी मुखर्जी, काजोल और शाहरुख़ ख़ान स्टारर ये फ़िल्म ब्लॉकबस्टर थी. फ़िल्म एक तरफ़ा प्यार पर आधारित थी, जिसमें अंजली, राहुल से अपने प्यार का इज़हार नहीं कर पाती. वहीं राहुल को टीना पसंद होती है, जिससे वो शादी कर लेता है. दूसरी तरफ़ अंजली, राहुल की ज़िंदगी से दूर जाने का फ़ैसला लेती है. मुद्दे की बात ये है कि जब तक आप किसी से अपने प्यार का इज़हार ही नहीं करेंगे, सामने वाले को कैसे पता चलेगा कि आप उससे प्यार करते हैं या नहीं?

Kuch Kuch Hota Hai
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4. 'रांझणा'

इस फ़िल्म में धनुष और सोनम कपूर की जोड़ी को ख़ूब प्यार मिला. फ़िल्म एक लड़के के प्यार के बारे में थी, जो अपना करियर और फ़ैमिली छोड़ कर एक लड़की का पीछा करता रहता है. ज़ाहिर सी बात है आज के युवाओं को फ़िल्म ने अच्छा संदेश नहीं दिया.

Raanjhanaa
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5. 'रहना है तेरे दिल में'

आर माधवन, दिया मिर्ज़ा और सैफ़ अली ख़ान स्टारर ये फ़िल्म एक लव ट्रैंगल थी. फ़िल्म में आर माधवन ने एक ऐसे आशिक का किरदार निभाया है, जो सड़क किनारे एक लड़की को देखता है. लड़के को लड़की पहली नज़र में ही पसंद आ जाती है और अपनी पहचान छुपा वो उसका प्यार भी हासिल कर लेता है. झूठ बोलकर किसी का प्यार जितना कितना सही है?

rehna hai tere dil mein
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6. 'लव आज कल'

फ़िल्म एक मॉर्डन कपल के बारे में है. वो कपल जो Move On करने के बाद अपने-अपने पार्टनर्स के पास चले जाते हैं. हांलाकि, अलग होने के बाद भी दोस्त की तरह वो एक-दूसरे के टच में रहते हैं. एक दिन अचानक से उन्हें एहसास होता है कि वो प्यार में हैं. इसके बाद दोनों अपने-अपने पार्टनर्स को छोड़ कर एक हो जाते हैं. सच्ची में असल ज़िंदगी में ऐसा मुमकिन है क्या?

Love aaj kal
Source: HT

प्यार की कोई परिभाषा नहीं होती है. किसी रिश्ते में ईमानदार रहना ही प्यार है. शायद इसीलिये इसे ख़ुदा की इबादत सा बताया गया है. आपके लिये रिलेशनशिप क्या है, कमेंट में बता सकते हैं.

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