Actress In Bollywood Films : आपने अक्सर काफ़ी बॉलीवुड मूवीज़ (Bollywood Movies) में फ़ीमेल एक्टर्स को हीरो के साइड रोल या उनके लव इंट्रेस्ट के तौर पर देखा होगा. हालांकि, ये चीज़ आज के समय में पहले से थोड़ी कम देखी जा रही है. लेकिन ऐसी कई बॉलीवुड मूवीज़ रही हैं, जिनमें फ़ीमेल एक्ट्रेस के टैलेंट को पूरी तरह बर्बाद किया गया है, जबकि उन्हें काफ़ी अच्छा रोल मिल सकता था. 

आज हम आपको कुछ उन्हीं मूवीज़ के बारे में बताएंगे.

Actress In Bollywood Films

1. सुप्रिया पाठक (द बिग बुल)

सुप्रिया पाठक बॉलीवुड इंडस्ट्री की टैलेंटेड फ़ीमेल एक्ट्रेसेस में से एक हैं. उन्होंने ‘लव पर स्क्वायर फ़ुट‘ और ‘राम लीला‘ में अपनी ज़बरदस्त परफॉरमेंस से दिल जीत लिया था. लेकिन ‘द बिग बुल‘ मूवी में मुश्किल से उनके 3 सीन ही होंगे और उनके डायलॉग भी काफ़ी कम थे. ऐसी प्रतिभाशाली एक्ट्रेस को साइडलाइन कर देने से अच्छा है कि उन्हें फ़िल्म में ना ही लिया जाता. 

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2. शीबा चड्ढा (शकुंतला देवी)

विद्या बालन की फ़िल्म ‘शकुंतला देवी‘ किसे नहीं याद होगी? ये मूवी महान गणितज्ञ शकुंतला देवी के जीवन पर आधारित है, जिन्हें ह्यूमन कंप्यूटर कहा जाता था. इसमें विद्या बालन लीड रोल में हैं. फ़िल्म की स्टारकास्ट में शीबा चड्ढा का भी नाम है, लेकिन उनका रोल मूवी में ना के बराबर ही है. वो सिर्फ़ एक ही फ्रेम में दिखाई दी हैं. उनके जैसी एक्ट्रेस पूरी मूवी में सिर्फ़ एक फ्रेम के लिए नहीं बनी है.

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3. राजश्री देशपांडे (द स्काई इज़ पिंक)

द स्काई इज़ पिंक‘ एक बेहद अच्छी फ़िल्म थी, लेकिन फ़िल्म में राजश्री देशपांडे को मिला ज़रा सा स्क्रीनटाइम बिल्कुल भी अच्छा नहीं था. राजश्री वो एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने ‘एस दुर्गा’, ‘एंग्री इंडियन गॉडेस‘ और बाद में ‘सेक्रेड गेम्स‘ जैसी वेब सीरीज़ में ऑडियंस को काफ़ी इम्प्रेस किया. उनको इस फ़िल्म की स्टोरी में और ज़्यादा स्क्रीनटाइम दिया जा सकता था. 

4. शेफ़ाली शाह (मोहब्बतें)

शेफ़ाली शाह वो एक्ट्रेस हैं, जो मात्र अपने एक्सप्रेशन से ही एक्टिंग की नई परिभाषा गढ़ सकती हैं. लेकिन फिर भी उन्हें ‘मोहब्बतें’ मूवी में बेहद कम स्क्रीनटाइम मिला. हालांकि, उन्होंने मूवी में अपने रोल्स के साथ पूरी तरह से न्याय किया, लेकिन वो फिर भी ज़्यादा स्क्रीनटाइम की हक़दार थीं. 

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5. सीमा पाहवा (सूरज पे मंगल भारी)

सीमा पाहवा ने ‘बरेली की बर्फ़ी‘ और ‘शुभ मंगल सावधान‘ जैसी मूवीज़ में बतौर देसी मां क़माल की भूमिका निभाई है. लेकिन एक्टर कितना भी टैलेंटेड क्यों ना हो, अगर आप बतौर एक्टर उसके रोल को स्टीरियोटाइप करने लगेंगे जैसा कि ‘सूरज पे मंगल भारी‘ फ़िल्म में हुआ, तो फिर वो अपनी परफॉरमेंस को यूनिक दिखाने के लिए उससे ज़्यादा कुछ एक्सपेरिमेंट नहीं कर पाएंगे. 

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6. तबू (गोलमाल अगेन)

फ़िल्म ‘गोलमाल अगेन‘ में तबू के क़िरदार को बेहद बुरी तरीक़े से लिखा गया था. फिर भी इस एक्ट्रेस ने अपने टैलेंट से इस रोल में जान भर दी थी. लेकिन उनकी प्रतिभा को इस तरह की सामान्यता के अधीन करना बिल्कुल भी उचित नहीं है.  

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7. तिलोत्तमा शोम (हिंदी मीडियम)

तिलोत्तमा शोम ने अपनी डेब्यू फ़िल्म ‘मानसून वेडिंग‘ से ही एक्टिंग की दुनिया में तहलका मचा दिया था. इसके बाद उन्होंने ‘क़िस्सा’ और ‘सर’ मूवी से बता दिया कि उनमें एक्टिंग का कीड़ा कूट-कूट कर भरा है. इसके बावजूद फ़िल्म ‘हिंदी मीडियम‘ जैसी अच्छी प्लॉट की मूवी के लेखक उनके लिए एक फ़िल्म में एक बेहतर रोल नहीं लिख पाए. 

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8. टिस्का चोपड़ा (गुड न्यूज़)

टिस्का चोपड़ा के टैलेंट को जानते हुए भी उन्हें ‘गुड न्यूज़’ फ़िल्म में एक पलक झपकने वाले रोल में कास्ट करना बिल्कुल भी गुड न्यूज़ नहीं है. उनकी ‘तारे ज़मीन पर‘ फ़िल्म और ‘होस्टेजेस’ वेब सीरीज़ में दी गई ज़बरदस्त परफॉरमेंस के बावजूद उन्हें इतना कम रोल देना उनकी एक्टिंग के साथ अन्याय है. 

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9. आयेशा रज़ा (लक्ष्मी)

फ़िल्म ‘लक्ष्मी‘ में आयेशा रज़ा के रोल को बर्बाद किया गया, ये कहना बिल्कुल भी ग़लत नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने अपने रोल को बेहद उम्दा तरीक़े से निभाया. 

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इन फ़ीमेल स्टार्स को और बेहतर रोल दिया जा सकता था.