Bollywood Male Characters: हम हमेशा महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की बात करते हैं, जोकि सही भी है. इस मुद्दे पर बातचीत होनी भी ज़रूरी है, लेकिन ये भी बात सच है कि समय के साथ समाज में काफ़ी बदलाव आया है और इसका प्रभाव महिलाओं के साथ ही कुछ हद तक पुरुषों पर भी पड़ा है. ऐसे कई पुरुष हैं, जो उनके बारे में समाज द्वारा बनाए गए स्टीरियोटाइप को तोड़ रहे हैं. इसका काफ़ी हद तक क्रेडिट कुछ बॉलीवुड मूवीज़ को भी जाता है, जिन्होंने अपने मेल कैरेक्टर्स के द्वारा समाज में मर्दों के प्रति बनाई गई पूर्वाग्रह धारणा को तोड़ने का काम किया है.

आज हम बॉलीवुड के उन्हीं कैरेक्टर्स (Bollywood Male Characters) के बारे में बात करेंगे, जो संदेश देते हैं कि रियल आदमियों को ‘मर्दाना’ या ‘मैनली’ दिखने के लिए महिलाओं को कंट्रोल करने की ज़रूरत नहीं है.

1. जीतेंदर (बधाई हो)

बधाई हो‘ फ़िल्म में ‘जीतेंदर‘ के क़िरदार में एक्टर गजराज ने दर्शकों की ख़ूब वाहवाही लूटी थी. वो फ़िल्म में अपनी पत्नी मिसेज कौशिक (नीना गुप्ता) के लिए जिस तरह से समाज के खिलाफ़ खड़े हुए थे, उनकी उस ख़ूबी ने हमारा दिल जीत लिया था. फ़िल्म में उनकी पत्नी को हमेशा 50 की उम्र में बच्चा पैदा करने के लिए डर लगता रहा, लेकिन जीतेंदर हमेशा उसका साथ देते दिखाई दिए. उन्होंने अपनी पत्नी को आश्वासन दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वो हमेशा उनका सपोर्ट करेंगे.

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2. सनी (दिल धड़कने दो)

इस मूवी में हम ‘मानव’ (राहुल बोस) और ‘सनी’ (फ़रहान अख़्तर) के बीच हुई वार्तालाप को कैसे भूल सकते हैं? इस बातचीत में जब मानव अपने दोस्त सनी से कहता है कि “मेरे डैड की जनरेशन तक किसी औरत ने काम नहीं किया. नेवर. फिर मैंने आएशा को मंजूरी दी बिज़नेस चलाने के लिए?” इसके जवाब में सनी उससे कहता है, “तुमने आएशा को मंज़ूरी दी? और उसे तुम्हारी परमिशन की ज़रूरत क्यूं है?” सनी आगे कहता है, “जब तुम किसी को मंजूरी देते हो, तो तुम अपने आप को एक कंट्रोल की पोज़ीशन में डालते हो और ये बराबरी नहीं है.” सनी की इस बात पर थिएटर में लोगों को ताली पीटने पर मजबूर कर दिया था.  (Bollywood Male Characters)

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3. कबीर (की एंड का)

जब बेहतरीन ऑन-स्क्रीन कैरेक्टर्स की बात चल रही है, तो हम अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) द्वारा फ़िल्म ‘की एंड का’ में निभाए गए क़िरदार ‘कबीर‘ को कैसे भूल सकते हैं? इस दिल छू लेने वाले कैरेक्टर ने बताया कि मर्द होममेकर भी हो सकते हैं. इसके साथ ही इस क़िरदार ने ये भी बताया कि कैसे होममेकर को बाकी जॉब की तरह समान इज्ज़त मिलनी चाहिए.

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4. इक़बाल सईद (राज़ी)

इस बात को आप नकार नहीं सकते कि फ़िल्म ‘राज़ी‘ में विक्की कौशल (Vicky Kaushal) द्वारा निभाया गया कैरेक्टर ‘इक़बाल सईद’ ही वो परफ़ेक्ट जेंटलमैन है, जो हमें अपनी ज़िंदगी में चाहिए. अभी तक हमने ऑनस्क्रीन जितने पति देखे हैं, इक़बाल सईद उनमें से सबसे अंडरस्टैंडिंग पतियों में से एक हैं. वो न ही सिर्फ़ ‘सहमत’ (आलिया भट्ट) को उससे प्यार करने का टाइम देते हैं, बल्कि ये भी समझते हैं कि सहमत को उसको प्यार करने के लिए अपने देश के प्रति प्यार को त्यागने की ज़रूरत नहीं है. (Bollywood Male Characters)

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5. सुगंधा के पिता (शुभ मंगल सावधान)

नपुंसकता पर ख़ुलकर चर्चा करने से लेकर दुनिया के खिलाफ़ अपनी बेटी को सपोर्ट करने तक, फ़िल्म ‘शुभ मंगल सावधान‘ में ‘सुगंधा के पिता’ का रोल निभाने वाले नीरज सूद बताते हैं कि कैसे एक मिनिस्ट पिता अपनी बेटी को हर हालातों में सपोर्ट करता है. वो समाज के पुरुषों के लिए एक जीती-जागती मिसाल हैं.

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6. जय सिंह राठौड़ (जाने..तू या जाने ना)

फ़िल्म ‘जाने तू या जाने ना‘ में इमरान ख़ान के क़िरदार ‘जय सिंह राठौड़‘ ने बताया कि आदमी भी इमोशनल हो सकते हैं. जय के कैरेक्टर ने पुरानी धारणा को तोड़ते हुए दिखाया कि पुरुषों को हमेशा अपनी माचो मैन वाली टफ़ साइड दिखाने की ज़रूरत नहीं है. वो एक आम इंसान हैं और वो भी अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं.

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7. पारस (लस्ट स्टोरीज़)

इस मूवी में कैसे ‘पारस’ (विक्की कौशल) एक अनभिज्ञ स्वार्थी प्रेमी से एक विचारशील पति के रूप में विकसित होता है, वो काफ़ी सराहनीय है. ये कैरेक्टर दर्शाता है कि कैसे एक पुरुष को महिला की इमोशनल और मेंटल के साथ ही फ़िज़िकल ज़रूरतों के बारे में भी जागरूक होना चाहिए. ये काफ़ी रिफ्रेशिंग है कि कैसे वो अपनी टॉक्सिक मेल इगो अपनी शादी के बीच में नहीं लाता है और बेहद शांत तरीक़े से अपने मैरिज इश्यूज़ को समझता है. 

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ये सभी मेल कैरेक्टर्स समाज को एक नई अप्रोच देते हैं.