आशुतोष गोवारिकर इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री के एक जाने-माने डायरेक्टर हैं. वो इंडस्ट्री के उन चंद डायरेक्टर्स में शामिल हैं जो इतिहास पर फ़िल्म बनाना पसंद करते हैं. इसकी बानगी आपको लगान, जोधा अकबर, मोहन जो दाड़ो जैसी फ़िल्मों में देखने को मिली होगी.

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आशुतोष गोवारिकर फ़िल्म इंडस्ट्री में एक एक्टर के रूप में अपना करियर बनाने के लिए आए थे. उन्होंने फ़िल्म होली से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. केतन मेहता की इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान ही उनकी मुलाक़ात आमिर ख़ान से हुई थी. यहीं उनकी दोस्ती हो गई और ये आज भी कायम है. आज हम आपको आमिर और आशुतोष से जुड़ा एक दिलचस्प क़िस्सा लेकर आए हैं, जो जुड़ा है उनकी सुपरहिट फ़िल्म लगान से.

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बात उन दिनों की है जब आशुतोष गोवारिकर फ़िल्म लगान की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे. तब इसकी कहानी को लेकर वो अपने सबसे अच्छे दोस्त आमिर ख़ान के पास पहुंचे. वो चाहते थे कि उनकी इस फ़िल्म में आमिर काम करें. लेकिन फ़िल्म की कहानी सुनने के बाद आमिर का रिएक्शन कुछ ऐसा था जो आशुतोष ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

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आमिर ने कहा- 'ये कैसा आइडिया ले आए तुम ब्रिटिश राज के गांव वाले और क्रिकेट? किसी और प्रोड्यूसर को सुना भी मत देना इसे. मुझे ये लगान भरने और क्रिकेट खेलने वाले आइडिया में कोई दिलचस्पी नहीं है.'

इंडस्ट्री के इतने बड़े स्टार की ये बात सुनकर कोई और डायरेक्टर होता उस स्क्रिप्ट को कूड़े में डाल चुप बैठ जाता. मगर आशुतोष कहां हार मानने वाले थे और वो जिस काम को ठान लेते हैं उसे पूरा कर के ही दम लेते हैं.

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5-6 महीने बाद वो फिर आमिर ख़ान से मिले और उन्हें फिर से लगान की कहानी सुनाई. इस बार जिस तरह से आशुतोष ने कहानी सुनाई वो इससे काफ़ी इम्प्रेस हो गए. पर समस्या थी फंड्स. क्योंकि एक पीरियड ड्रामा बनाने के लिए बहुत से पैसे की ज़रूरत होती है.

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चूंकि सेकंड मीटिंग में आमिर को ये स्किप्ट पसंद आ गई तो उन्होंने आगे बढ़कर इस फ़िल्म को प्रोड्यूस करने का फ़ैसला किया. फ़िल्म बनी और पर्दे पर हिट भी रही. इस फ़िल्म में क्रिकेट और लगान का अनोखा संगम देखने के मिला था दर्शकों को. इसने साल 2002 में कई अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए थे. इनमें 9 फ़िल्म फ़ेयर अवॉर्ड, 8 नेशनल अवॉर्ड और 10 आइफ़ा अवॉर्ड हासिल किए थे.

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इस फ़िल्म को रियलिस्टिक लुक देने के लिए आशुतोष ने बहुत मेहनत भी की थी. इसी के चलते इसे ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फ़िल्म श्रेणी के लिए भारत की तरफ़ से नॉमिनेट किया गया था. हालांकि, ये अवॉर्ड नहीं जीत पाई लेकिन इस फ़िल्म ने हमें एक ऐसा डायरेक्टर दे दिया, जो एक नए नज़रिये के साथ फ़िल्म की कहानी को दर्शकों के सामने पेश करने का माद्दा रखता है.

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