हमारी ज़िंदगी सिर्फ़ हमारी नहीं होती है. इसमें घरवाले और बाहरवाले बहुत बड़ा रोल प्ले करते हैं. हम ख़ुद के बारे में वही सोचते और महसूस करते हैं, जो बचपन से हमारे पेरेंट्स या सोसायटी हमें फ़ील कराती है. पर एक समय ऐसा भी आता है, जब हम समाज की इन दकियानूसी बातों से ऊभरकर अपनी कमियों और ताक़त के बारे में सोचते हैं.

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बस जिस दिन हम अपनी शक्तियों को पहचान उसका इस्तेमाल करने लगते हैं, उसी दिन से अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने लग जाते हैं. इन्हीं चंद लोगों में गुजरात के जूनागढ़ के मोनार्क त्रिवेदी भी हैं.

मोनार्क पेशे से डांसर हैं और आप टीवी के डांस रियलिटी शो 'डांस प्लस-5' में उनका ज़बरदस्त डांस देख सकते हैं. बाकि लोगों की तरह मोनार्क के लिये भी इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था. एक समय ऐसा था जब मोनार्क की कद-काठी के लिये उन्हें काफ़ी आलोचना सुननी पड़ती थी.

मोनार्क का कहना है कि 11 साल की उम्र से ही उन्होंने डांस करना शुरु कर दिया था, पर छोटे कद की वजह उन्हें बार-बार शर्मिंदा किया जाता था. इन तानों का आलम ये था कि एक समय में वो डरा-सहमा रहता था. यही नहीं, मोनार्क को यहां तक लगता था कि वो ज़िंदगी में कभी एक कामयाब इंसान नहीं बन पायेगा. हांलाकि, कुछ समय बाद मोनार्क ने डांस से प्रेरणा लेते हुए ख़ुद पर काम किया और आज टीवी के बड़े मंच तक पहुंचने के क़ाबिल बना.

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मोनार्क ने बताया कि उसके पापा ने भी कभी उसका साथ नहीं दिया और हमेशा डांस को लेकर उसके ख़िलाफ़ रहे. दरअसल, मोनार्क के पिता नहीं चाहते थे कि वो इस फ़ील्ड में आकर अपना पूरा जीवन व्यतीत करे. मोनार्क ने सारी आलोचनाओं और पिता की बातों को दरकिनार डांसिग में अपने कदम रखे और धर्मेश येलाण्डे के सामने परफ़ॉर्म किया. धर्मेश येलाण्डे को मोनार्क का डांस इतना पसंद आया कि आज वो 'डांस प्लस' के सेट पर है.

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मोनार्क की जूनागढ़ और अहमदाबाद में डांस एकेडमी भी है और इसके साथ ही वो उदयपुर में डांस ट्रेनर भी हैं. मोनार्क का मानना है कि ज़िंदगी में दिक्कतें आती हैं. पर इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि आप घर बैठ जायें. बाहर निकलें, हालातों का सामना करें और छोटी-छोटी चीज़ों से सबक लेकर आगे बढ़ें.

शाबाश!

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