पंकज त्रिपाठी! ये नाम जुबां पर आते ही हमारे सामने एक ऐसे एक्टर की छवि नज़र आने लगती है जो अपनी शालीनता भरी एक्टिंग से हर किसी का दिल जीत लेते हैं. पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) की अदाकारी देख हमें इस बात का अहसास होता है कि केवल ज़ोर ज़ोर से चीखने-चिल्लाने और मारधाड़ करने भर से आप एक्टर नहीं बन जाते. बल्कि आपकी अदाकारी में एक शालीनता का भाव होना चाहिए फिर चाहे वो ग़ुस्से वाला कैरेक्टर हो या फिर शांत स्वभाव के इंसान का किरदार. पंकज त्रिपाठी अपने हर किरदार को बड़ी ख़ूबसूरती के साथ निभाते हैं.

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असल ज़िंदगी में कौन हैं पंकज त्रिपाठी

पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) का जन्म 28 सितंबर, 1976 को बिहार के गोपालगंज ज़िले के बेलसंड गांव में हुआ था. उनका असली नाम पंकज तिवारी है, लेकिन अपने चाचा के कहने पर उन्होंने अपना सरनेम तिवारी से त्रिपाठी कर लिया था. पंकज के पिता पंडित बनारस तिवारी पुजारी के रूप में काम करते हैं. 10वीं तक की पढ़ाई गांव में ही पूरी करने के बाद पंकज पटना चले गए और यहीं से 12वीं और स्नातक की पढ़ाई पूरी की.

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पंकज त्रिपाठी के माता-पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. पटना में ही उन्हें पहली बार नाटक (थियेटर) देखने का मौका मिला था. उन्हें ये इतना पसंद आया कि फिर ठान लिया अब बस एक्टर ही बनना है, लेकिन कैसे ये नहीं मालूम था. आख़िरकार पटना में 7 साल रहने के बाद वो दिल्ली चले आये और दिल्ली के मशहूर एक्टिंग स्कूल ‘राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय’ में दाखिला लिया. साल 2004 में यहां से पास-आउट हुये थे. लेकिन अब थोड़ा पीछे चलते हैं.

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पंकज त्रिपाठी की दिलचस्प लव स्टोरी

बात साल 1993 की है. पटना में पढ़ाई के दौरान पंकज त्रिपाठी एक बार अपने गांव गये थे. वो गांव में अपनी चहेरी बहन के तिलक में गये हुए थे. इस दौरान उनकी मुलाक़ात मृदुला नाम की एक ख़ूबसूरत लड़की हुई. पंकज को पहली नज़र में उससे प्यार हो गया था और तय कर लिया कि शादी करेंगे तो सिर्फ़ इसी लड़की से. बहन की शादी के बाद रिश्तेदार बन गए तो पंकज की मृदुला से बातचीत शुरू होने लगी और बातचीत प्यार में बदल गई.

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मृदुला कोलकाता की रहने वाली थीं. इसलिए पंकज साल दो साल में एक बार उनसे मिलने कोलकाता चले जाया करते थे. पटना में पढ़ाई पूरी करने के बाद पंकज साल 1999 में एक्टिंग सीखने दिल्ली चले गए और नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD) में दाखिला ले लिया. इस दौरान पंकज और मृदुला एक दूसरे से चिट्ठी के माध्यम से जुड़े रहे. हफ़्ते में कभी कभार पीसीओ कॉलिंग कर लिया करते थे. इस बीच इन दोनों का प्यार शादी तक पहुंच चुका था. आख़िरकार साल 2004 में घरवालों की सहमति से पंकज और मृदुला ने शादी कर ली.

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NSD के बॉयज़ हॉस्टल में पत्नी के साथ रहे छुपकर

साल 2004 में जब पंकज और मृदुला की शादी हुई तब वो नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD) के फ़ाइनल ईयर के छात्र थे. लव मैरिज की थी इसलिए पत्नी को गांव में रखना उचित नहीं समझा और शादी के बाद पत्नी को लेकर दिल्ली आ गए. इस दौरान रहने का कोई ठिकाना नहीं था. इसलिए मजबूरन 6 महीने तक पत्नी के साथ NSD के बॉयज़ हॉस्टल में छुपकर रहना पड़ा. साल 2004 में NSD से पास-आउट होने के बाद पंकज एक्टिंग में हाथ आज़माने अपनी पत्नी को लेकर मुंबई चले गए. इस दौरान मृदुला ने हर मोड़ पर पंकज का साथ निभाया.

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मुंबई पहुंचने के बाद पंकज त्रिपाठी ने बॉलीवुड फ़िल्मों के लिए सैकड़ों ऑडिशन दिए, लेकिन कई महीनों तक कोई काम ही नहीं मिला. आख़िरकार साल 2004 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘रन’ में उन्हें एक छोटा सा रोल मिला. इसके बाद उन्होंने साल 2004 से लेकर साल 2011 तक ‘अपहरण’, ‘ओमकारा’, ‘शौर्या’, ‘रावण’, ‘आक्रोश’, ‘चिल्लर पार्टी’, ‘अग्निपथ’ समेत दर्जनभर से अधिक फ़िल्मों में छोटे मोठे रोल निभाए. लेकिन साल 2011 में आई अनुराग कश्यप की फ़िल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ ने पंकज की क़िस्मत बदल दी.

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आज पंकज त्रिपाठी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं. पंकज ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उन्हें बॉलीवुड की किसी फ़िल्म में लीड एक्टर का रोल मिलेगा. लेकिन साल 2020 में वो सलमान ख़ान के प्रोडक्शन वाली फ़िल्म ‘काग़ज़’ में बतौर लीड एक्टर नज़र आ चुके हैं.

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