आज तापसी पन्नू स्टारर फ़िल्म 'थप्पड़' सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई. फ़िल्म को क्रिएटिक्स और पब्लिक के अच्छे रिव्यूज़ मिल रहे हैं. हांलाकि, ट्रेलर रिलीज़ के समय से ही ये फ़िल्म लोगों के लिये चर्चा का विषय बनी हुई थी. अनुभव सिन्हा ने एक ऐसे मुद्दे पर फ़िल्म बनाई है, जिसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता. न जानें हर रोज़ कितनी महिलाएं और लड़कियां पुरुषों का 'थप्पड़' खा कर चुप रहती हैं. कुछ परिवार के सम्मान के लिये इसे बर्दाशत करती हैं, तो कुछ अपने प्यार के कारण. मगर ये पहला थप्पड़ ही तो घरेलू हिंसा की शुरुआत होता है और इसको अगर तभी न रोका जाए तो ये हिंसा बढ़ती जाती है.

कमाल की बात तो ये है कि अगर इस बात का ज़िक्र घर पर करें, तो मुद्दे को मामूली सा बता कर टाल दिया जाता है. ऐसे में कोई महिला करे भी तो क्या, ये फ़िल्म उन तमाम महिलाओं के लिये है, जो पतियों के 'थप्पड़' को सहन करके चुप रह जाती हैं. 'थप्पड़' मूवी जितनी दमदार है, उतने ही दमदार इस फ़िल्म के डायलॉग्स भी हैं.

डायलॉग को सिर्फ़ पढ़ना ही नहीं, बल्कि समझना भी है:

तो, कैसे लगे आपके 'थप्पड़' के डायलॉग, कमेंट में बता सकते हैं.

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