'सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है' 

बॉलीवुड मूवी लवर्स को ये डायलॉग ज़रूर याद होगा और याद होंगे इसे बोलने वाले एक्टर. नाम है अजीत ख़ान (Ajit Khan) जिन्हें लोग इनके ऑनस्क्रीन किरदार 'लायन' के नाम से भी जानते हैं. 'मोना डार्लिंग' के लिए भी इनको जाना जाता है. इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री में जितने मशहूर विलेन (Bollywood's Famous Villain) हुए हैं उनमें एक नाम इनका भी है.

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अजीत ख़ान (Ajit Khan) ने बहुत सी हिट फ़िल्मों में विलेन से लेकर कैरेक्टर आर्टिस्ट के रोल निभाए हैं. इनकी एक्टिंग के लोग कायल थे. 'कालीचरण', 'नास्तिक', 'मुगल ए आज़म', 'नया दौर', 'मिलन', ‘नटवरलाल’,  अजीत की कुछ यादगार फ़िल्में हैं. आज हम आपको अजीत से जुड़ा एक मज़ेदार क़िस्सा बताने जा रहे हैं, जब उन्होंने रियल गुंड़ो को सबक सिखाया था.

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क़िताबें बेचकर मुंबई आए थे अजीत ख़ान (Ajit Khan)

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अजीत हैदराबाद रियासत के गोलकुंडा के रहने वाले थे. इनके पिता का नाम था बशीर अली ख़ान और वो हैदराबाद के निज़ाम की सेना में काम करते थे. बात उन दिनों की है जब हामिद अली ख़ान यानी अजीत ख़ान फ़िल्मों में काम करने के लिए मुंबई आए थे. यहां न तो कोई इनका जानकार था न ही कोई रिश्तेदार. क़िबाते बेंच कर ये मुंबई के लिए किराया जुटाकर आए थे. ऐसे में रहने के लिए भला घर कहां से होता. इसलिए वो सीमेंट से बने बड़े-बड़े पाइप्स मे रहने लगे, जहां दूसरे ग़रीब लोग रहा करते थे. 

बदमाशों को सिखाया सबक

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उन दिनों वहां के कुछ बदमाश उन पाइप्स में रह रहे लोगों से हफ्ता वसूलते थे. जो लगो उन्हें पैसे दे देते वो वहां रह सकता था, नहीं तो वो उन्हें वहां से मारकर भगा देते थे. एक दिन एक बदमाश उनसे हफ्ता मांगने आया, उन्होंने इंकार किया तो वो दूसरे गुंडो को बुला लाया. जैसे ही वो लोग उन्हें मारने चले अजीत ने एक-एक को पकड़कर धुन दिया. बस फिर क्या था वो गुंडे वहां से नौ दो ग्यारह हो गए. इसके बाद वहां रह रहे लोगों में उनका रूतबा बढ़ गया और वो उनके लिए खाने-पीने का इंतज़ाम भी करने लगे.

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ख़ैर इसके बाद अजीत ख़ान को फ़िल्मों में काम मिल गया और वो वहां से पहले किराए के घर और फिर अपने घर में रहने लगे. फ़िल्मों में काम करने के लिए ही इन्होंने अपना नाम हामिद से बदलकर अजीत ख़ान (Ajit Khan) रखा था. अपने करियर में इन्होंने लगभग 200 फ़िल्मों में काम किया था. इनके डायलॉग डिलीवरी के स्टाइल की लोग आज भी मिमिक्री करते हैं.